तेल के बढ़ते दामों पर फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन, इमरजेंसी जैसे हालात
ग्लोबल लेवल पर कीमतें कम होने पर भी फ्रांस में कीमतें कम नहीं हुईं, टैक्स बढ़ा दिया.

Photos show the aftermath of France's worst urban riot in decades https://t.co/ewu1od2eI4
— Jack Posobiec 🇺🇸 (@JackPosobiec) December 3, 2018
विरोध प्रदर्शन करने वाले ये लोग हैं कौन? इन्होंने खुद को नाम दिया है- ज़िलै ज़ोन. इसको हिंदी में समझें, तो मतलब होगा पीली बंडी. ये जो प्रदर्शनकारी हैं, वो शरीर के ऊपरी हिस्से में बंडी जैसा वेस्ट पहनते हैं. ये पीले रंग का होता है. आपने यहां भी देखा होगा. जो कई बार कंस्ट्रक्शन में काम करने वाले मजदूर भी पहनते दिख जाते हैं. ये एक किस्म का सेफ्टी जैकेट होता है. अपने चमकीले रंग की वजह से दूर से ही दिख जाता है. फ्रांस में ऐसा नियम है कि ये 'येलो वेस्ट' गाड़ियों में रखना ही होगा. चूंकि प्रोटेस्ट हो रहा है ईंधन की महंगाई पर, इसीलिए लोगों ने खुद को इस 'येलो वेस्ट' से कनेक्ट किया है. ऐसा नहीं कि इनका कोई एक चेहरा हो. कोई एक नेता हो. बल्कि ये प्रोटेस्ट सोशल मीडिया के रास्ते देशभर में फैल गया है. सबसे ज्यादा असर पड़ा है राजधानी पैरिस पर.BREAKING: Paris police say 133 injured, 412 arrested during France's worst urban riot in years.
— The Associated Press (@AP) December 2, 2018
सरकार ने इतना ज्यादा फ्यूल टैक्स लगाया क्यों? आपको पैरिस क्लाइमेट समझौता याद है? दिसंबर 2015 की बात है. फ्रांस की राजधानी पैरिस में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ. इसमें बात हुई दुनिया में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन और कार्बन गैसों के बढ़ते उत्सर्जन पर. क्योंकि इनकी वजह से धरती और उसपर रहने वाले जीवों का अस्तित्व खतरे में है. तो इस सम्मेलन के अंदर दुनिया के खूब सारे देश इस बात पर राजी हुए कि तापमान को बढ़ने से रोकने के लिए जो जरूरी है, वो काम किए जाएंगे. सबसे जरूरी था कार्बन उत्सर्जन को कम करना.92 injured so far as anti-fuel tax riots continue in France. pic.twitter.com/NSw67sutqS
— Paul Joseph Watson (@PrisonPlanet) December 1, 2018
ईंधनों की वजह से खूब सारा कार्बन एमिशन होता है. फ्रांस इस पैरिस अग्रीमेंट को लेकर काफी गंभीर है. वो चाहता है कि बाकी सारे देश भी इसे लेकर गंभीरता दिखाएं. तो फ्रांस ने अपने यहां प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कई सारी चीजें लागू की हैं. इनमें से ही एक है फ्यूल टैक्स. ईंधन महंगा होगा तो लोग गाड़ियों का इस्तेमाल सोच-समझकर करेंगे. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल होगा. पेट्रोल-डीज़ल की जगह वैकल्पिक और साफ ऊर्जा (इलेक्ट्रिक कार,सोलर ऐनर्जी) वगैरह के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा. ऊंचे टैक्स से जो रकम आएगी, उससे सरकार प्रदूषण से लड़ने का इंतजाम करने में और फंड खर्च कर पाएगी. इको-फ्रेंडली प्रॉजेक्ट्स के लिए फंड जुटा पाएगी.Globalism transforms France... pic.twitter.com/jj15F5KUQM
— James Woods (@RealJamesWoods) December 2, 2018
कितना महंगा है ईंधन यहां? फ्रांस में ज्यादातर लोग डीज़ल वाली कार चलाते हैं. पिछले 12 महीनों में इसकी कीमतें 23 फीसद तक बढ़ गई हैं. इस बीच अगर ग्लोबल कीमतों को ट्रेंड देखें, तो पहले कीमतें बढ़ीं. लेकिन फिर कम भी हुईं. मगर इससे फ्रांस के लोगों को राहत नहीं मिली. बल्कि मैक्रों सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया. एक लीटर डीज़ल पर 7.6 सेंट का टैक्स. पेट्रोल पर 3.9 सेंट. जैसे 100 पैसे का एक रुपया होता है. वैसे ही 100 सेंट का एक डॉलर होता है. तो पहले से टैक्स था ही, सरकार ने फिर ऐलान किया कि 1 जनवरी, 2019 से डीज़ल पर लगने वाला हाइड्रोकार्बन टैक्स 6.5 सेंट प्रति लीटर और बढ़ा दिया जाएगा. पेट्रोल पर बढ़ेगा 2.9 सेंट प्रति लीटर. इस ऐलान के बाद लोग बिफर गए.Looking up Champs towards Arc de Triomphe - astonishing: a riot on avenue often described as most beautiful in France. #GiletsJaunes
— Peter Allen (@peterallenparis) November 24, 2018
pic.twitter.com/mF9kDKqT22
प्रदर्शनकारी क्या कह रहे हैं? उनका कहना है कि सरकार जो कर रही है, वो प्रैक्टिकल नहीं है. शहरों में फिर भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट अच्छा है. मगर शहर के बाहर रहने वाले लोगों को कहीं आने-जाने के लिए कार का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है. ये 'येलो वेस्ट' वाले कह रहे हैं कि पहले से ही देश में इतनी महंगाई है. फ्यूल टैक्स की ऊंची दरों ने महंगाई को और बढ़ा दिया है. मिडिल क्लास और उससे कम आमदनी वाले परिवार पहले ही किसी तरह से जोड़-तोड़कर महीना चलाते हैं. इस महंगाई ने उनका गुजर-बसर करना बहुत मुश्किल कर दिया है. उनका इल्जाम है कि सरकार की नीतियों से अमीरों और कारोबारियों को फर्क नहीं पड़ता. मगर बाकी लोग बदहाल हो गए हैं.“There are parallels between what is happening in France and almost every other developed country, as comfortable urban elites seek to impose their climate change agenda on a broader population just struggling to pay its bills and earn an honest buck.” https://t.co/0jXRNr4zhx
— Josh Kraushaar (@HotlineJosh) December 2, 2018

राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों जी-20 में शामिल होने अर्जेंटीना गए हुए थे. वहां से लौटकर वो पैरिस में दंगे से हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे. सरकार ने साफ कहा है कि प्रदर्शनों के बावजूद टैक्स वापस नहीं लिया जाएगा (फोटो: रॉयटर्स)
सरकार ने कैसे रिऐक्ट किया है? फ्रांस के राष्ट्रपति हैं इमैनुअल मैक्रों.
उन्होंने कहा है कि हिंसा को बर्दाश्त करने का सवाल ही नहीं पैदा होता. लोग पुलिस और सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ पर हमला कर रहे हैं. दुकानों और इमारतों में आग लगा रहे हैं. इन्हें कैसे मंजूर किया जाए? मैक्रों का कहना है कि विपक्ष भी इस हिंसा को शह दे रहा है. वैसे प्रदर्शनों की वजह से सरकार करीब 40 अरब रुपयों का एक पैकेज लाई है. इससे गरीबों, कम आमदनी वाले परिवारों की मदद की जाएगी. ताकि वो ईंधन की बढ़ती कीमतों में गुजर-बसर कर सकें. मगर सरकार का रवैया यही है कि विरोध प्रदर्शनों की वजह से पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं होगा. टैक्स की दरें घटाई नहीं जाएंगी.
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