हाई हील के अंदर बैठेंगे भगवान
ताकि एक और लड़की का शादी का ख्वाब न टूटे.
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फोटो - thelallantop
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ये जूते के आकार में कोई मॉल, ऑडिटोरियम, थिएटर या म्यूजियम नहीं है. चर्च है. 56 फुट ऊंचा, मेटल की छड़ों और नीले कांच से बना. अब आप सोचेंगे कि अपने ईश्वर को जूते में कौन रखता है? तो सुनो. चर्च ईश्वर के लिए नहीं, प्रेम के लिए है. क्योंकि इस शहर के लोग धरम की लड़ाई और ढोंग से ऊपर उठ कर शायद ये समझ गए हैं कि प्रेम में प्रार्थना जैसी ताकत है.
ताइवान में एक शहर है, बुदाई. आज से करीब पचास साल पहले बुदाई में पीने के पानी की शॉर्टेज हो गयी थी. लोग प्यास से बेहाल होने लगे थे. तब कुएं खोदकर पानी निकालना ही आखिरी रास्ता था. लोगों ने कुएं खोदे. पर पानी में आर्सेनिक हुआ करता था. आर्सेनिक वाला पानी पीने से शरीर के निचले हिस्से की खून की धमनियां खराब हो जाती हैं. पैर सड़ने लगते हैं. ब्लैकफुट डिजीज कहते हैं इसे. बुदाई के लोगों को ब्लैकफुट डिजीज होने लगा. इस बीमारी में जान बचाने का एक ही तरीका था. दोनों पांव कटवा देना.
बुदाई की लडकियां शादी के सपने देखतीं, तो उनमें शुमार होता था एक सुन्दर सी ड्रेस पहन कर, हाई-हील वाले जूतों में दुल्हन बनकर चर्च में घुसना. ब्लैकफुट डिजीज ने लड़कियों के पांव ले लिए. और कई लड़कियों का ये सपना अधूरा रह गया.
तो बुदाई की लोकल गवर्नमेंट ने तय किया, कि एक चर्च होगा ऐसी ही लड़कियों को डेडिकेटेड. जहां लोग प्रार्थना नहीं करेंगे, बल्कि लड़कियां अपने प्रेमियों से शादी करेंगी, सबसे सुंदर ड्रेस और जूतों में. और उस सिंड्रेला, जिसका एक जूता उसके राजकुमार के पास छूट गया था, की लव स्टोरी को फील कर सकेंगीं.
तो बुदाई की लोकल गवर्नमेंट ने तय किया, कि एक चर्च होगा ऐसी ही लड़कियों को डेडिकेटेड. जहां लोग प्रार्थना नहीं करेंगे, बल्कि लड़कियां अपने प्रेमियों से शादी करेंगी, सबसे सुंदर ड्रेस और जूतों में. और उस सिंड्रेला, जिसका एक जूता उसके राजकुमार के पास छूट गया था, की लव स्टोरी को फील कर सकेंगीं.
