अल्लाह हू अकबर हर हर महादेव के नारे लगाने वाले किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला नहीं रहे
गुलाम मोहम्मद जौला को किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत का करीबी कहा जाता था. साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के चलते जौला ने भारतीय किसान यूनियन को अलविदा कह दिया था.

रद्द हो चुके तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं में शामिल गुलाम मोहम्मद जौला का निधन हो गया है. आंदोलन के दौरान जौला ने ही 'हर-हर महादेव, अल्लाह-हू-अकबर' नारे की शुरुआत की थी. बाद में ये नारा काफी मशहूर हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक जौला का निधन 16 मई की सुबह करीब साढ़े छह बजे हृदयगति रुकने से हो गया.
गुलाम मोहम्मद जौला को किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत का करीबी कहा जाता था. साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के चलते जौला ने भारतीय किसान यूनियन को अलविदा कह दिया था. बाद में उन्होंने भारतीय किसान मजदूर मंच नाम के नए संगठन का गठन किया था. किसान आंदोलन के दौरान जौला हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े पैरोकार बनकर उभरे. किसान आंदोलन के दौरान जौला उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की दूसरी नीतियों की भी आलोचना करते रहे थे.
जाट-मुस्लिम एकता के बड़े चेहरेगुलाम मोहम्मद जौला महेंद्र सिंह टिकैत के जमाने से ही जाट-मुस्लिम एकता का बड़ा चेहरा रहे. ऐसे में जब किसान आंदोलन के दौरान फिर से इस एकता की जरूरत महसूस हुई, तो जौला को एक बार फिर से आगे किया गया. जौला महेंद्र सिंह टिकैत के मंचों का संचालन करते थे.

किसान आंदोलन की एक तस्वीर. (फोटो: PTI)
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2103 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जौला ने खुलकर राकेश टिकैत और नरेश टिकैत पर निशाना साधा था. इधर, किसान आंदोलन के मंच पर जौला की मौजूदगी पर बीजेपी नेताओं ने निशाना साधा था. पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेताओं ने कहा था कि मुजफ्फरनगर को दंगों की आग में झोंक देने वाले नेता किसान आंदोलन के मंच पर बैठे हैं.
पिछले साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था, तब गुलाम मोहम्मद जौला का बयान आया था. उन्होंने कहा था कि किसानों को सफलता इसलिए मिली क्योंकि वो धर्म के नाम पर नहीं बंटे. इससे पहले उन्होंने कहा था कि कुछ साल पहले जो युवा धर्म के नाम पर भटक गए थे, वो वापस आ गए हैं.
वीडियो-सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन को लेकर रिपोर्ट में क्या बताया?

