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जर्मन संसद ने कहा: लड़की की ना का मतलब ना

रेप की शिकार गिना पर फाइन लगा. क्योंकि उन्होंने रेपिस्ट से 'लड़ाई' नहीं की थी.

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8 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 8 जुलाई 2016, 08:26 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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जर्मनी की पार्लियामेंट ने रेप की नई डेफिनिशन देते हुए एक कानून पास किया है: 'नो मीन्स नो'. ये बिल पास होते ही वहां के सांसदों ने खड़े होकर तालियां बजाईं.

और गिना पर 27 हज़ार डॉलर का फाइन लगाया गया! दो 'निर्दोष' लोगों को फंसाने के लिए.

ये बिल यूं ही नहीं आ गया था. हुआ कि नए साल के मौके पर जर्मनी के कोलोन शहर में पार्टियां हुईं. पार्टियों में दारु और ड्रग्स प्रचुर मात्रा में मिल रहे थे. ऐसे माहौल में कुछ लोग जबरदस्ती अपने साथियों को पिला रहे थे. उसके बाद खबर आई कि पार्टी के दौरान बहुत सारी लड़कियों का रेप हुआ है. इस बात ने जर्मनी को हिला दिया. एक आधुनिक देश में ऐसा होना बड़ा अजीब था. फिर जब बारी आई कानूनी प्रक्रिया की तब जर्मनी की और लेह-देह हो गई. कानून के मुताबिक एक 'सेक्स अटैक' को रेप तभी कहा जा सकता है जब लड़की ने अपने आप को बचाने के लिए रेपिस्ट से लड़ाई की हो. पर इस मामले में तो लड़कियां दारु के नशे में 'नो..नो' के अलावा कुछ नहीं कह पाई थीं. पर ये तूफ़ान से पहले का छोटा तूफ़ान था. तूफ़ान तब आया जब एक जर्मन मॉडल गिना लोहफिंक को ड्रग दे के उनका रेप कर दिया गया. दो लोगों पर इसका आरोप लगा. गिना के पास इसका विडियो भी था. विडियो में नशे की हालत में वो बार-बार कह रही थीं: 'स्टॉप इट'. 'नो'. पर वो लड़ाई नहीं कर रही थीं. क्योंकि इतनी ताकत और होश नहीं था शरीर में. कानून के आधार पर दोनों आरोपियों को छोड़ दिया गया. इस अजीबोगरीब फैसले के बाद गिना को ताकत आई और जर्मनी को होश. लड़ाई शुरू हुई कानून के खिलाफ. अब कानूनों के मुताबिक लड़की ने एक बार भी 'नो' कहा है तो उसके बाद जबरदस्ती की कोई भी हरकत 'अपराध' मानी जाएगी. माना जाता है कि कई दूसरे देशों से आये लोग जर्मनी के पुराने कानून का फायदा उठाते थे. क्योंकि जर्मनी कई जगहों से ज्यादा ओपन देश है. वहां लड़कियों को इतना सोचना नहीं पड़ता. जैसे मन होता है वैसे रहती हैं. क्या खाना है क्या पीना है उनकी चॉइस है. क्या पहनना है वो भी उनकी ही चॉइस है. इस बात से 'अनजान' बाहर के लोग उनके नशे में होने को 'मौका' समझते थे. हालांकि लड़ाई लड़नेवाले इस कानून को भी अभी कमजोर ही बता रहे हैं. पर 'कानून-विशेषज्ञों' का कहना है कि शुरुआत तो हुई है. ऐसा ही कानून अपने देश में भी चाहिए.

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