राष्ट्रपति को गालियां दो इनाम पाओ प्रतियोगिता
एक मैगजीन का ऐलान है. टर्की के प्रेसिडेंट को ज्यादा से ज्यादा बेइज्जत करते हुए कविताएं लिखिए. इनाम मिलेगा.
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Böhmermann
जर्मनी में तानाशाही के आलम से हम सबकी मुलाक़ात बरसों पहले ही हो गयी थी. अरे वही जिसकी मूंछें चार्ली चैपलिन जैसी थीं. हिटलर. तो हालत ये है कि अभी भी जर्मनी में चांसलर होते हैं. इस वक़्त वहां एक महिला चांसलर हैं. एंजेला मर्केल.एंजेला ने किया क्या कि एक जर्मन कॉमेडियन जान बोह्मरमान के खिलाफ़ केस चलाने के आदेश दे दिए. हां, इसीलिए क्यूंकि उसने कुछ ऐसा मज़ाक कर दिया जो किसी को पसंद नहीं आया. कोई बड़ा आदमी ऑफेंड हो गया. ये बड़ा आदमी टर्की का राष्ट्रपति था. नाम है रेचेप ताइप एर्दोगान (नाम बहुत टेढ़ा है. भूल-चूक लेनी-देनी)

Recep Tayyip Erdogan
पूरा मामला विस्तार से बताते हैं. पिछले महीने टर्किश टीवी पे एक जर्मन सटायर वाले प्रोग्राम में एक गाना चलाया गया. गाने में एर्दोगान का मज़ाक उड़ाया गया. उनकी बमचक लाइफस्टाइल, प्रेस को दबाये रखने का उनका तरीका और खासकर कि जैसे वो कुर्दों को मारने पर तुले हुए हैं. साथ ही ये भी कहा कि इस्लामिक स्टेट आतंकी ग्रुप के लोग उनके भाई हैं. इस गाने के बाद तुर्की फॉरेन मिनिस्ट्री ने जर्मन एम्बेसडर से इसके खिलाफ़ शिकायत की. जर्मनी की ओर से ये जवाब आया कि पॉलिटिकल सटायर (कटाक्ष) जर्मनी में बैन नहीं हैं और सरकार उनका समर्थन करती है (यहां ये न समझा जाए कि सरकार उस कॉमेडियन की कही बातों का समर्थन कर रही थी).
इसके बाद कॉमेडियन जान बोह्मरमान शांत नहीं बैठे और लगभग 15 दिन पहले एक और कमाल कर दिखाया. उन्होंने टीवी पर अपने शो में एक कविता सुनाई. उस कविता में कुछ गाली-गलौज भी थी. पॉलिटिकल कटाक्ष मारना तो नहीं लेकिन ऐसा करना जर्मनी में अपराध है. साथ ही जान बोह्मरमान ने टर्की के राष्ट्रपति से कहा कि अब उन्हें मामले को कोर्ट में ले जाना चाहिए. उसने कहा कि अब एक लीगल डिसीज़न आना चाहिए जहां "सत्तावादी, राष्ट्रवादी लोग जो तानाशाह बनने बैठे हैं(authoritarian, nationalistic wannabe despots)" को आटे-दाल का भाव पता चलना चाहिए.
अब हुआ क्या? हुआ ये कि टर्की वालों की कम्प्लेंट पे टीवी पर से उस प्रोग्राम को बंद करवा दिया गया. जान बोह्मरमान को पुलिस प्रोटेक्शन लेनी पड़ी. और उनके लिए सबसे बुरी खबर तब आई जब जर्मनी की चांसलर मेर्केल ने उनके खिलाफ़ कानूनी कार्रवाही करने के ऑर्डर दे दिए.
अजीबोगरीब बात ये है कि एक तानाशाह के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले को मेर्केल ने एक लिबरल कदम बताया है.
जबकि ऐसे किसी शख्स के खिलाफ़ कदम उठाये जाने की गुंजाइश ही नॉन-लिबरल कहलाती है. ऐसे में जान बोह्मरमान के दोषी पाए जाने या न पाए जाने से ज़्यादा कुछ फ़र्क नहीं पड़ेगा. क्यूंकि असली डैमेज तो उनके ऊपर की जाने वाली कार्रवाही से होगा.
इन सारी चीज़ों को सामने रखते हुए ब्रिटिश मैगजीन स्पेक्टेटर ने एक बेहतरीन स्कीम निकाली है. इस स्कीम में फ्री-स्पीच को सपोर्ट करते हुए स्पेक्टेटर ने टर्की के प्रेसिडेंट के खिलाफ़ उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा बेइज्ज़त करते हुए कवितायें मांगी हैं. उनके इस इन्विटेशन में साफ़ साफ़ लिखा है कि रीडर्स को ज़्यादा से ज़्यादा ऑफेंसिव होना है. जैसे कि अगर कोई उनकी मर्दानगी पर सवाल उठाते हुए कविता लिख भेजता है तो उसके जीतने के चान्सेज़ और भी ज़्यादा बढ़ जायेंगे. लोगों को इन्वाईट करते हुए स्पेक्टेटर ने लिखा है कि कविताओं में पॉलिटिकल पॉइंट्स हों तो चलेगा लेकिन वो उन कविताओं को प्राथमिकता देंगे जिन कविताओं में टर्की के प्रेसिडेंट का चिड़ियाघर और उसके बाहर बकरियों के प्रति प्रेम उजागर किया जायेगा.
स्पेक्टेटर ने इस कविता के कम्पटीशन को जीतने वाले को 1 हज़ार पौंड देने की घोषणा भी की है.
इसके साथ ही सोशल मीडिया पे उनके सपोर्ट में काफी लोग आये हैं. फोटुएं और पोस्ट्स लिखे जा रहे हैं.








अपने सपोर्ट में कही गयी बातों पर जान बोह्मरमान का रीऐक्शन कुछ ऐसा था -


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