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'संविधान फिर से लिखा जाए, 30 साल से लूटी गई संपत्ति की जांच हो', नेपाल में Gen-Z ने रखी डिमांड

Gen Z Protest: नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के बीच आंदोलन कर रहे Gen-Z ने राष्ट्रपति और सेना के सामने अपनी डिमांड रखी हैं. आंदोलनकर्ताओं का कहना है कि संविधान में संशोधन किया जाए या उसे फिर से लिखा जाए. साथ ही पिछले 30 साल से लूटी गई संपत्तियों की जांच हो और उनका राष्ट्रीयकरण हो.

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10 सितंबर 2025 (पब्लिश्ड: 12:47 PM IST)
Gen Z listed their demands in nepal amid voilence
सेना ने नेपाल की सुरक्षा की कमान अपने हाथों में ले ली है. (Photo: Rueters)
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नेपाल में पिछले दो दिन से चल रहे हिंसक देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच सेना ने सुरक्षा की कमान अपने हाथों में ले ली है. पूरे नेपाल में शाम पांच बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है. इस बीच Gen-Z आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं ने कई मांगें सेना और राष्ट्रपति के सामने रखी हैं. उनकी मांग है कि जेनेरेशन-जेड आंदोलन के दौरान शहादत पाने वाले सभी को आधिकारिक रूप से शहीद घोषित किया जाए.

इसके अलाव शहीद परिवारों को राष्ट्र की ओर से सम्मान, अभिनंदन तथा राहत उपलब्ध कराई जाए. बेरोजगारी, पलायन और सामाजिक अन्याय को समाप्त करने के लिए विशेष कार्यक्रम लाए जाएं. उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी दल या व्यक्ति के लिए नहीं है, बल्कि संपूर्ण पीढ़ी और राष्ट्र के भविष्य के लिए है. युवाओं का कहना है कि देश में शांति की आवश्यकता है, लेकिन यह केवल नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है. राष्ट्रपति और नेपाली सेना से उम्मीद है कि हमारे प्रस्तावों को सकारात्मक रूप से लागू किया जाएगा.

संविधान संशोधन की मांग

आंदोलन नेतृत्व ने कई राजनीतिक मांग भी राष्ट्रपति और सेना के समक्ष रखी हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिनिधि सभा जनता का विश्वास खो चुकी है, इसे तत्काल भंग किया जाए. संविधान का संशोधन किया जाए या फिर से लिखा जाए. जिसमें नागरिकों, विशेषज्ञों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी हो. अंतरिम अवधि समाप्त होने के बाद स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रत्यक्ष जनसहभागिता पर आधारित नया चुनाव कराया जाए. साथ ही प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी नेतृत्व की स्थापना की जाए.

इसके अलावा आंदोलनकर्ताओं ने फौरी एक्शन प्लान के तौर पर डिमांड की है कि पिछले तीन दशकों में लूटी गई संपत्ति की जांच कर अवैध संपत्ति का राष्ट्रीयकरण किया जाए. साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, सुरक्षा और संचार जैसे पांचों मूलभूत संस्थानों का संरचनात्मक सुधार और पुनर्गठन किया जाए.

सेना ने संभाली सुरक्षा की कमान

इधर नेपाली सेना ने मंगलवार रात 10 बजे देश भर में सुरक्षा अभियान की कमान संभाली. इसके बाद सेना ने काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर शहरों सहित देश के कई इलाकों में अशांति को रोकने के लिए प्रतिबंध लगा दिए. इससे पहले मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने देश की संसद भवन समेत कई मंत्रियों के घर में आग लगा दी थी. कई अन्य सरकारी इमारतों पर भी हमला किया गया. आगजनी में पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल की पत्नी राज्यलक्ष्मी चित्राकर की जलकर मौत हो गई.

अशांति के बाद मंगलवार को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शन शांत नहीं हुए. द हिन्दू ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बताया कि नेपाल में ही बुधवार सुबह से ही, आमतौर पर चहल-पहल वाली काठमांडू की सड़कें सुनसान थीं. कुछ ही लोग घरों से निकले, जो मुख्य रूप से रोजमर्रा की चीजें खरीदने गए थे.

लोगों से घरों में रहने की आपील

एक बयान में, सेना ने कुछ समूहों की गतिविधियों पर चिंता जताई, जो मुश्किल हालात का गलत फायदा उठा रहे हैं और आम लोगों और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. नेपाल आर्मी मुख्यालय के एक अधिकारी ने कहा, 'हम लूटपाट और तोड़फोड़ जैसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अपने सैनिकों को तैनात कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने लोगों से जरूरत न हो तो घरों में रहने का आदेश भी दिया है, ताकि और अशांति न फैले.

भारत सरकार ने नागरिकों को दी सलाह

वहीं रॉयटर्स ने बताया कि बुधवार को काठमांडू की सड़कों पर सैनिकों ने गश्त की. सेना के प्रवक्ता राजा राम बसनेट ने बुधवार को कहा, 'हम पहले हालात को सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं. हम लोगों की जान और संपत्ति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.' इधर, भारतीय सरकार ने नेपाल में रह रहे भारतीयों को सलाह दी कि वे घरों में रहें और बाहर न निकलें. कई भारतीय एयरलाइन ने काठमांडू से आने-जाने वाली उड़ानें भी बंद कर दीं.

यह भी पढ़ें- नेपाल संकट पर पीएम मोदी का पहला बयान, Gen Z से क्या कहा?

गौरतलब है कि नेपाल में छात्रों के नेतृत्व वाले “जेन जेड” विरोध प्रदर्शन, जो सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के जवाब में शुरू हुए थे, एक बड़े आंदोलन में बदल गए. यह आंदोलन भ्रष्टाचार और आम लोगों के प्रति उदासीनता के आरोपों के कारण केपी शर्मा ओली सरकार और देश के राजनीतिक नेताओं की बढ़ती आलोचना को दर्शाता है.

वीडियो: वो एक कारण जिसने नेपाल में क्रांति को भड़का दिया

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