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11 साल इंतजार के बाद 10 साल की सज़ा

आशियाना गैंगरेप मामले में कोर्ट ने सज़ा का ऐलान कर दिया है. 11 साल लंबा चला यह केस.

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आशुतोष चचा
18 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 18 अप्रैल 2016, 08:23 AM IST)
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आशियाना गैंगरेप मामले में सजा का ऐलान हो गया है. 11 साल तक चलने वाले केस में मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को 10 साल कैद की सजा मिली है. जस्टिस महेंद्र दयाल ने सेशन कोर्ट के निर्णय को पक्का कर दिया था. गौरव को एडल्ट करार देकर. 16 अप्रैल को सजा का ऐलान होना था. फिर डेट बढ़ गई थी.

ये था आशियाना गैंगरेप केस

2 मई 2005 को दौरव और उसके पांच साथियों ने एक 13 साल की लड़की का अपहरण कर लिया था. लखनऊ के आशियाना इलाके से. फिर उसके साथ सबने रेप किया. दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं. उसे सिगरेट से जलाया भी. फिर बुरी तरह जख्मी हालत में उसे शहर में छोड़ कर भाग गए. मामला पुलिस के पास पहुंचा. फिर कोर्ट. लेकिन इस लड़ाई में उस लड़की के गरीब परिवार ने बड़ी तकलीफ उठाई.

ऐसे चला पूरा केस

18 अक्टूबर 2005 : मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला सहित आसिफ सिद्दीकी व सौरभ जैन को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग घोषित कर बाल गृह भेजा. बाद में आरोपी आसिफ सिद्दीकी व सौरभ जैन जमानत पर छूटे और दोनों की एक्सीडेंट में मौत हो गई. 5 सितंबर 2007 : बालिग आरोपी अमन बख्शी और भारतेंदु मिश्र को सेशन कोर्ट से दस साल कैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा. 20 अप्रैल 2006 : एक और आरोपी फैजान उर्फ फज्जू को बालिग घोषित कर मामला विचार के लिए सत्र अदालत को सौंपा गया. 8 अप्रैल 2010 : कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को जांच कर साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की उम्र निर्धारित करने के ऑर्डर्स दिए. 15 जनवरी 2013 : आरोपी गौरव शुक्ला को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बालिग डिक्लेयर किया. आरोपी की ओर से फैसले के खिलाफ अपील की गई. 22 जनवरी 2013 : आरोपी फैजान उर्फ फज्जू को अदालत से उम्रकैद और जुर्माने की सजा. 21 मार्च 2013 : जुवेनाइल कोर्ट से बालिग घोषित मुख्य आरोपी ने सेशन कोर्ट में अपील की कि मुझे सुना नहीं गया. इस पर दो महीने का वक्त देकर केस वापस जुवेनाइल कोर्ट भेजा गया. बाद में मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट पहुंची. 21 मार्च 2014 : किशोर न्याय बोर्ड ने मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को बालिग करार दिया. 11 मार्च 2015 : फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को बालिग करार देने के किशोर न्याय बोर्ड के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली अपील को खारिज किया. 16 नवंबर 2015 : हाई कोर्ट का इस प्रकरण में देरी होने एवं तीन महीने के भीतर इस मामले की सुनवाई के निर्देश. 26 नवंबर 2015 : कोर्ट में मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल.
 

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