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11 साल बाद गैंगरेप विक्टिम बोली, 'अब जश्न की बारी मेरी'

गौरव शुक्ला सपा के एक बड़े नेता का भतीजा है. इसलिए उसने कानून के हर दांव पेंच का इस्तेमाल किया.

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आशुतोष चचा
14 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 14 अप्रैल 2016, 06:45 AM IST)
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वो ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेंस एसोसिएशन के लखनऊ ऑफिस में आकर बैठी. बुधवार का दिन. साड़ी पहने और बालों को कंधों पर बिखेरे हुए. चेहरे पर कभी गुस्सा आकर लौटता था कभी उकताहट. वो बेसब्री से फोन का इंतजार कर रही थी. आखिर शाम साढ़े चार बजे वो फोन आया. जिसमें वो एक खबर का इंतजार कर रही थी. पिछले 11 साल से. बात करके एकदम से शांत हो गई. जैसे उस वक्त के सुकून को पूरी तरह महसूस कर लेना चाहती है. वह लम्हा बीत जाने के बाद खुद को समेट कर बताना शुरू किया "2 मई 2005 की रात आज भी याद है. जब गौरव शुक्ला और उसके दोस्तों ने मुझे चलती कार में घसीटा. सीट पर डाल कर मेरे कपड़े फाड़े. और मेरे साथ हैवानियत की हर हद पार की. मेरे प्राइवेट पार्ट में गन डाली. सिगरेट से जलाया. मैं रहम के लिए रोती रही. लेकिन वो नहीं माने. वह उनके लिए पार्टी टाइम था. वो जश्न मना रहे थे शराब, तेज म्यूजिक और मेरे साथ रेप करके." थोड़ा रुक कर बोली "अब सेलिब्रेट करने की बारी मेरी है. ये 11 साल बड़ी मुश्किल में बीते. हर एक दिन उस रात को याद करके. कानून की देरी मेरी चिंता बढ़ाती जाती थी. मैं उसके लिए ताउम्र कैद से नीचे कुछ नहीं चाहती. मैं चाहती हूं कि वो उसी तरह सालों साल झेले जैसे मैंने 10 साल से ज्यादा गुजारे." ये लड़की थी लखनऊ के आशियाना गैंगरेप की विक्टिम. आगे इस लड़की की बहादुरी और केस की पूरी कहानी पढ़ो. क्योंकि इस केस का फैसला आया है. लखनऊ का आशियाना रेप केस बहुत लंबा खिंच गया. कानूनी लड़ाई 11 साल चली. लखनऊ की निचली अदालत ने अब इसका फैसला दिया है. खुद को नाबालिग बता रहा था मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला. अब उसे दोषी करार दिया गया है. सजा 16 अप्रैल को सुनाई जाएगी. केस के तीन आरोपियों को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है. दो आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई.

ये था आशियाना गैंगरेप केस

2 मई 2005 को दौरव और उसके पांच साथियों ने एक 13 साल की लड़की का अपहरण कर लिया था. लखनऊ के आशियाना इलाके से. फिर उसके साथ सबने रेप किया. दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं. उसे सिगरेट से जलाया भी. फिर बुरी तरह जख्मी हालत में उसे शहर में छोड़ कर भाग गए. मामला पुलिस के पास पहुंचा. फिर कोर्ट. लेकिन इस लड़ाई में उस लड़की के गरीब परिवार ने बड़ी तकलीफ उठाई.

समाजवादी पार्टी से आरोपी का कनेक्शन

गौरव शुक्ला सपा के नेता अरुण शंकर शुक्ला का भतीजा है. इसलिए कानून के हर दांव पेंच का फायदा उसने उठाया. खुद को नाबालिग बताता रहा. आखिर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बता दिया कि वह बालिग था.

ऐसे चला पूरा केस

18 अक्टूबर 2005 : मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला सहित आसिफ सिद्दीकी व सौरभ जैन को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग घोषित कर बाल गृह भेजा. बाद में आरोपी आसिफ सिद्दीकी व सौरभ जैन जमानत पर छूटे और दोनों की एक्सीडेंट में मौत हो गई. 5 सितंबर 2007 : बालिग आरोपी अमन बख्शी और भारतेंदु मिश्र को सेशन कोर्ट से दस साल कैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा. 20 अप्रैल 2006 : एक और आरोपी फैजान उर्फ फज्जू को बालिग घोषित कर मामला विचार के लिए सत्र अदालत को सौंपा गया. 8 अप्रैल 2010 : कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को जांच कर साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की उम्र निर्धारित करने के ऑर्डर्स दिए. 15 जनवरी 2013 : आरोपी गौरव शुक्ला को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बालिग डिक्लेयर किया. आरोपी की ओर से फैसले के खिलाफ अपील की गई. 22 जनवरी 2013 : आरोपी फैजान उर्फ फज्जू को अदालत से उम्रकैद और जुर्माने की सजा. 21 मार्च 2013 : जुवेनाइल कोर्ट से बालिग घोषित मुख्य आरोपी ने सेशन कोर्ट में अपील की कि मुझे सुना नहीं गया. इस पर दो महीने का वक्त देकर केस वापस जुवेनाइल कोर्ट भेजा गया. बाद में मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट पहुंची. 21 मार्च 2014 : किशोर न्याय बोर्ड ने मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को बालिग करार दिया. 11 मार्च 2015 : फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को बालिग करार देने के किशोर न्याय बोर्ड के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली अपील को खारिज किया. 16 नवंबर 2015 : हाई कोर्ट का इस प्रकरण में देरी होने एवं तीन महीने के भीतर इस मामले की सुनवाई के निर्देश. 26 नवंबर 2015 : कोर्ट में मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल.

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