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पायलट का रेस्क्यू हो या लादेन को मारना, अमेरिका अपने ही एयरक्राफ्ट क्यों उड़ा देता है?

Osama Bin laden को मारने के मिशन में US Navy Seals को अपना ही एक हेलीकॉप्टर बम लगा कर उड़ाना पड़ा. और अब Iran में F-15 Pilot के Rescue Operation के दौरान भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला है.

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5 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 11:10 PM IST)
from killing osama bin laden to saving pilot in iran why us destroys its own planes helicopters after mission
अमेरिका का कहना है कि उसने अपने 2 विमानों को खुद उड़ा दिया है (PHOTO- Lockheed Martin, Press TV)
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2 मई, 2011 की रात पाकिस्तान की मिलिट्री सिटी कहे जाने वाले एबटाबाद के बाहरी इलाके में लोग गहरी नींद में सो रहे थे. ठीक उसी समय अफगानिस्तान के जलालाबाद में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर 'नेवी सील्स' की एक टीम अपने हथियार चेक कर रही थी. ये एक मिशन की तैयारी से पहले का फाइनल चेक था. इस मिशन में दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकी अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को मारा जाना था. 

ये मिशन तो पूरा हुआ, लेकिन वापसी में नेवी सील्स को अपना ही एक हेलीकॉप्टर बम लगाकर उड़ाना पड़ा और अब ईरान में F-15 Pilot के Rescue Operation के दौरान भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला है. खबर है कि अमेरिका ने अपने ही जहाजों को बम लगाकर उड़ा दिया है. लेकिन अमेरिका ऐसा क्यों करता है?

लादेन के मिशन में एक हेलीकॉप्टर उड़ा दिया 

2 मई 2011 की रात नेवी सील्स की एक टीम ने हेलीकॉप्टर्स के जरिए पाकिस्तान में एंट्री ली. ये ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर थे लेकिन ये किसी आम ब्लैक हॉक से बिल्कुल अलग थे. इनके ऊपर ऐसी परत (कोटिंग) थी, जिससे कोई रडार इन्हें देख नहीं पाता था. साथ ही इनके पंखे यानी रोटर्स को साउंड कटर के जरिए साइलेंट किया गया था. यानी अगर ये इंसान के घर के ठीक ऊपर भी आ जाए तो आवाज के मामले में ये बहुत कम था.

जैसे ही नेवी सील्स ओसामा के ठिकाने पर पहुंचे तो उन्होंने घर में एंट्री का सबसे ट्रेडिशनल तरीका अपनाया. किसी भी ऐसे ऑपरेशन में स्पेशल फॉर्सेज आमतौर पर 'टॉप-डाउन' एंट्री करती हैं. यानी एक टीम छत से तो दूसरी ग्राउंड फ्लोर से. इससे टारगेट का बच के भागना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

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ओसाम बिन लादेन को इसी घर में मारा गया था (PHOTO-Wikipedia)

एक हेलीकॉप्टर ने नेवी सील्स के एक ग्रुप को छत पर उतार दिया लेकिन दूसरे हेलीकॉप्टर को जवानों को जीचे उतारना था. यहीं एक गलती हो गई. सील्स को उतारने के लिए हेलीकॉप्टर इतना नीचे आया कि वो कंपाउंड की एक दीवार से टकरा गया. लिहाजा वो उड़ने लायक नहीं रहा.

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ओसामा बिन लादेन के ऑपरेशन को वाइट हाउस के सिचुएशन रूम में बैठकर देखते तत्काली प्रेसिडेंट बराक ओबामा (PHOTO-  by Pete Souza, The White House)

खैर, इसके बावजूद सील्स ने अपना ऑपरेशन शुरु किया. उन्होंने लादेन के अलावा उसके सबसे खास अबु-अहमद अल कुवैती को भी मार गिराया. ऑपरेशन खत्म होने के बाद बारी आई वहां से निकलने की. उन्हें न सिर्फ वहां से मिले सबूत बल्कि लादेन की बॉडी को भी ले जाना था. लेकिन एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुका था. हालांकि बैकअप में एक और हेलीकॉप्टर था और वो लेने आ गया. पर इससे पहले सील टीम के लीडर को बेस से आदेश मिला कि क्रैश हुए हेलीकॉप्टर को उड़ा दो. लिहाजा जाते-जाते सील्स ने स्टेल्थ ब्लैक हॉक में बारूद और विस्फोटक लगा दिया.

यही सीन ईरान में भी देखने को मिला. ईरान में फंसे अपने पायलट को अमेरिका ने बचा तो लिया लेकिन उसके दो हेलिकॉप्टर फंस गए. खबर है कि वापस लौटते हुए अमेरिकी सैनिकों को अपने इन हेलिकॉप्टर को उड़ाना पड़ा. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉलस्ट्रीट जर्नल से बात करने वाले एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस ऑपरेशन में दुश्मन की सीमाओं में फंसे पायलट के रेस्क्यू के लिए दो एमसी-130जे परिवहन विमान इस्तेमाल किए गए थे. ऐसा लगता है कि मिशन के दौरान विमान फंस गए थे. हालांकि ये कैसे हुआ, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. अधिकारी ने कहा कि दोनों विमानों को नष्ट करना इसलिए आवश्यक हो गया ताकि वे ईरान के हाथों में न पड़ें.

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बिन लादेन के ठिकाने के पास क्रैश हुए हेलीकॉप्टर के अवशेष (PHOTO-TIME)
अपने ही जहाज क्यों उड़ाता है अमेरिका?

इसके पीछे दो कारण माने जाते हैं. पहला अमेरिकन टेक्नोलॉजी और दूसरा है सेंसिटिव डेटा. इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि कुछ चुनिंदा टेक्नोलॉजी जैसे B-2 बॉम्बर, F-22 रैप्टर की तकनीक देश से बाहर न जाएं. इसके अलावा आधुनिक हथियार सिर्फ मशीन मात्र नहीं होते. उनमें तमाम तरीके का एनक्रिप्टेड माने सुरक्षित डेटा होता है. साथ ही उसके रडार, सेंसर और मिशन कंप्यूटर भी होते हैं. अगर ये दुश्मन के हाथ लग गए तो वो कई सेंसिटिव चीजें जैसे मैसेज, कम्युनिकेशन आदि की जानकारी को डिकोड कर सकता है. साथ ही वो सिस्टम की कमजोरी भी ढूंढ सकता है.

इसके अलावा अमेरिका कई ऐसे हथियार गुप्त तौर पर बनाता है जिनका इस्तेमाल सिर्फ वही करता है. ओसामा के मिशन में इस्तेमाल हुआ हेलीकॉप्टर भी अमेरिका का एक सीक्रेट प्रोजेक्ट ही था. यही वजह है कि चाहे पाकिस्तान हो या ईरान; अमेरिका अपनी टेक्नोलॉजी किसी के हाथ नहीं लगने देना चाहता जिससे कोई रिवर्स इंजीनियरिंग कर के वैसा ही कुछ बना ले और वो अमेरिका के लिए खतरा बन जाए.

वीडियो: क्या व्हाइट हाउस के नीचे मिलिट्री बंकर बन रहा है?

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