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वाइट हाउस की बड़ी अधिकारी रही महिला साउथ कोरिया की 'जासूस' निकली, दस्तावेजों में बड़े दावे

जिस महिला पर आरोप हैं, वो पहले White House National Security Council (NSC) में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम करती थीं. North Korea पर एक प्रमुख विशेषज्ञ के तौर पर गिनी जाती हैं, और अब उन पर दक्षिण-कोरिया का विदेशी एजेंट होने के आरोप लगे हैं.

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Sue Mi Terry
कोरियाई-अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की स्कॉलर सू मी टेरी.
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सोम शेखर
17 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 12:14 AM IST)
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न्यूयॉर्क की एक अदालत (Grand Jury) ने एक पूर्व अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी की अधिकारी पर जासूसी करने के आरोप लगाए हैं. जिस महिला पर आरोप हैं, उनका नाम सू मी टेरी है. BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, वो पहले वाइट हाउस नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम करती थीं. उत्तर-कोरिया में एक प्रमुख विशेषज्ञ के तौर पर गिनी जाती हैं. अब उन पर दक्षिण-कोरिया का विदेशी एजेंट होने के आरोप लगे हैं. विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप हैं.

मंगलवार, 16 जुलाई को न्यूयॉर्क के दक्षिणी ज़िले में केस से संबंधित अदालती दस्तावेज़ सार्वजनिक किए गए. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि टेरी ने एक दशक से ज़्यादा समय तक दक्षिण कोरिया की सरकार के लिए एजेंट के रूप में काम किया है. और, FARA के तहत पंजीकरण नहीं कराया था.

अमेरिका का एक क़ानून है, विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA). इसके तहत, अमेरिका में विदेशी संस्थाओं की ओर से राजनीतिक या वकालत के इरादे से काम करने वाले लोगों को न्याय विभाग (डीओजे) में पंजीकरण कराना ज़रूरी होता है.

उधर सू टेरी का कहना है कि ये दावे झूठे हैं. उनके वकील ने कहा है कि इन आरोपों से उनकी छवि ख़राब की जा रही है, जबकि उन्होंने हमेशा अमेरिका के लिए काम किया है और अतीत में दक्षिण कोरिया की आलोचना तक की है. 

टेरी 12 बरस की थीं, जब अमेरिका आई थीं. साल 2001 में उन्होंने मैसच्युसेट्स की एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संबंध संस्था टफ्ट्स यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट पूरी की. तब सीधे सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के साथ काम शुरू कर दिया. 2001-08 तक वहीं काम किया. फिर अन्य सरकारी और निजी थिंक टैंक्स से जुड़ीं. टीवी, रेडियो और पॉडकास्ट पर अक्सर दिख जाने वाली हस्ती हैं. 

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अमेरिकी अफ़सरान का कहना है कि साल 2013 में टेरी ने दक्षिण कोरिया की सरकार के लिए जासूसी शुरू की. सरकार ने उन्हें 37,000 डॉलर दिए थे. आरोप ये भी हैं कि उन्होंने साउथ अफ़्रीका सरकार के लिए लेख लिखे हैं. 

पुलिस के दावे के अनुसार टेरी ने ख़ुद फ़ेड्रल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेशन (FBI) के साथ एक इंटरव्यू में क़ुबूल किया कि वो दक्षिण कोरिया की ख़ुफ़िया सर्विस के लिए एक ‘स्रोत’ थीं. दक्षिण कोरिया इस केस में प्रतिवादी नहीं है. वॉशिंगटन में उनके दूतावास ने मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. 

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