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नवाज़ शरीफ को किस मामले में मिली सात साल जेल की सजा?

एक केस में बचे लेकिन दूसरे केस में नप गए नवाज़.

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24 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 24 दिसंबर 2018, 11:58 AM IST)
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नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम.
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नवाज शरीफ़. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री. पाकिस्तान की अकांउटिबिलिटी कोर्ट ने उन्हें सात साल जेल की सज़ा सुनाई है. ये सज़ा मिली है अल-अज़ीज़िया स्टील मिल्स करप्शन के केस में. नवाज के वकील ने कोर्ट से दरख्वास्त की कि उन्हें लाहौर की कोट लखपत जेल भेजा जाए. कोर्ट ने उनकी अपील मान ली. नवाज़ को मिली सज़ा में शामिल है-
सात साल की जेल 221 करोड़ और 13 करोड़ रुपये का जुर्माना संपत्ति जब्त करने का आदेश
कौन-कौन से केस थे नवाज़ के खिलाफ?
पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद से ही नवाज शरीफ के लिए दिक्कतें शुरू हुईं. वो भ्रष्टाचार के मामलों में फंसते चले गए. जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ के खिलाफ फैसला दिया. उन्हें न केवल प्रधानमंत्री के पद से हटाया, बल्कि अकाउंटिबिलिटी अथॉरिटीज़ को उनके खिलाफ केस चलाने को भी कहा था. जो तीन मामले नवाज़ के खिलाफ चलाए गए, वो थे- ऐवनफील्ड प्रॉपर्टीज़, अल-अज़ीज़िया और फ्लैगशिप इन्वेस्टमेंट. सितंबर 2017 में नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ केस फाइल किए. तब से लेकर अब तक नवाज़ लगभग 165 बार अकाउंटिबिलिटी कोर्ट के सामने पेश हो चुके हैं.
इसके पहले कौन से केस में फैसला आया था?
जुलाई 2018 में अकाउंटिबिलिटी जज ने एवनफील्ड प्रॉपर्टीज का फैसला सुनाया. नवाज़, उनकी बेटी मरियम और दामाद कैप्टन मुहम्मद सफ़दर (रिटायर्ड) को सज़ा सुनाई गई. नवाज़ को मिली 10 साल की जेल, मरियम को मिली सात साल जेल और सफ़दर को मिली एक साल की जेल. सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ये सज़ाएं सस्पेंड कर दीं. तीनों को जमानत भी दे दी. NAB ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील की हुई है.
नवाज़ शरीफ अब आने वाले टाइम में जेल में मिलेंगे.
नवाज़ शरीफ अब आने वाले टाइम में जेल में मिलेंगे.

अभी किस केस में सज़ा हुई है?
जिस केस में नवाज़ को सज़ा हुई है, वो सऊदी अरब में अल-अज़ीज़िया और हिल मेटल एस्टेबलिशमेंट खोले जाने से जुड़ा है. NAB जांच कर रही थी कि शरीफ परिवार ने विदेश में कंपनियां कैसे खोलीं और इनके लिए संसाधन कैसे जुटाए गए. नवाज की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि उनके पिता मियां मुहम्मद शरीफ ने साल 1974 में संयुक्त अरब अमीरात के अंदर गल्फ स्टील मिल्स (GSM) की नींव रखी. इस GSM के 75 फीसद शेयर अब्दुल्ला कायद अहली और उनकी कंपनी को बेच दिए गए. वहां से इसका नाम हुआ अहली स्टील मिल्स(ASM). बाकी के 25 फीसद शेयर फिर 1980 में इसी ASM को बेच दिए गए. इससे जो मुनाफ़ा आया, वो क़तर के शाही परिवार में निवेश किया गया.
नवाज के मुताबिक, उनके पिता मियां मुहम्मद शरीफ ने ही सऊदी अरब में अल-अज़ीज़िया और हिल मेटल इस्टेबलिश्मेंट खोलने के लिए नवाज के बेटों- हुसैन और हसन को पैसे दिए थे. साथ में, फ्लैगशिप एन्वेस्टमेंट और 16 और कंपनियों को शुरू करने का पैसा भी यहीं से आया. मगर शरीफ परिवार की तरफ से दिए गए इन तर्कों से प्रॉसिक्यूशन सहमत नहीं था. उसका कहना था कि शरीफ परिवार ये बताने में नाकाम रहा है कि विदेशों में कंपनियां खोलने के लिए पैसा कहां से आया. सरकारी वकील ने इसे आय से अधिक संपत्ति जमा करने का मामला बताया. नवाज के खिलाफ ये बात भी गई कि उनकी तरफ से कहा गया था कि उनके पिता ने कतर के शाही परिवार के साथ निवेश किया था. मगर इस बात की तस्दीक करने के लिए कतर के प्रिंस शेख हामद जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (JIT) के सामने पेश नहीं हुए. डिफेंस का कहना था कि JIT ने प्रिंस की गवाही लेने की गंभीरता से कोशिश ही नहीं की. वरना उनका कहा सच साबित हो जाता.
किस केस में बरी हुए हैं नवाज़?
फ्लैगशिप इन्वेस्टमेंट वाले केस से नवाज़ को बरी कर दिया गया है.


वीडियो-भारत में पाकिस्तान बनाने की धमकी देने वाला टीटी

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