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पूर्व CJI रंजन गोगोई को मिली Z+ सुरक्षा, अभी तक और किसे मिला है ये सुरक्षा घेरा?

क्या होती है Z+ सुरक्षा और किसे दिया जाता है ये सुरक्षा घेरा.

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22 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 22 जनवरी 2021, 01:09 PM IST)
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मुकुल रोहतगी का मानना है कि पूर्व चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई को उस बेंच में नहीं होना चाहिए था जो उनके ही खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही थी. (तस्वीर: पीटीआई)
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सुप्रीम के पूर्व चीफ़ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई को Z+ की सुरक्षा दी गई है. सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) को जस्टिस रंजन की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है. जस्टिस रंजन के पूरे भारत में कहीं भी आने-जाने के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी CRPF पर होगी. CRPF अभी देश में 60 से अधिक लोगों को सुरक्षा दे रही है. अब पूर्व सीजेआई गोगोई को CRPF की तरफ से जेड प्लस कैटगरी की सुरक्षा दी जाएगी. इससे पहले रंजन को दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा दी जा रही थी. रंजन गोगोई 2019 के नवंबर महीने में चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के पद से रिटायर हुए थे. रिटायर होने के कुछ दिनों के बाद ही मोदी सरकार ने उन्हें राज्यसभा भेजा था. Z+ सिक्योरिटी के बारे में जानते जाइए Z+ कैटेगरी में सबसे तगड़ा सुरक्षा घेरा मिलता है. चुनिंदा लोगों को मिलने वाली इस सुरक्षा में हर वक़्त कम से कम 55 जवान तैनात रहते हैं. इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो रहते हैं. एनएसजी को वीवीआईपी सिक्योरिटी के लिए नहीं बनाया गया था. वो एक आतंकविरोधी दस्ता है. जिसके हर जवान को 90 दिन की कठिन ट्रेनिंग पास करनी होती है. हर कमांडो को ट्रेनिंग के दौरान पचास से बासठ हजार ज़िंदा कारतूसों की फायर प्रैक्टिस पूरी करनी होती है. जबकि किसी सामान्य सैनिक की पूरी जिंदगी में भी इतनी फायर प्रैक्टिस नहीं होती. NSG की इस ट्रेनिंग और क्षमता को देखते हुए ही उसे वीवीआईपी सिक्योरिटी के लिए भी तैनात किया जाता है. मौजूदा वक्त में भारत में अमित शाह, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और प्रियंका गांधी को Z+ सुरक्षा मिली हुई है. इस लिस्ट में अब रंजन गोगोई का नाम भी जुड़ गया है. रंजन गोगोई कौन हैं? सुप्रीम कोर्ट के 46वें चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई का कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा. इस दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए. इनमें से अयोध्या भूमि विवाद, सबरीमाला मंदिर मामला, चीफ जस्टिस का ऑफिस पब्लिक अथॉरिटी, सरकारी विज्ञापन में नेताओं की तस्वीर पर पाबंदी और अंग्रेजी-हिंदी समेत सात भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को प्रकाशित करने का फैसला प्रमुख रहा. मौजूदा वक्त में रंजन गोगोई राज्यसभा के सदस्य हैं. रंजन के पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. जस्टिस रंजन नॉर्थ ईस्ट से आने वाले पहले चीफ जस्टिस थे.

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