विदेशी मीडिया ने भारत सरकार की आलोचना की तो विदेश मंत्री ने अपनी टीम को काम पर लगा दिया!
एस जयशंकर ने बैठक बुलाकर अहम निर्देश दिए.
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पिछले कुछ दिनों में भारत में Covid-19 के कारण जैसे हालात बने हैं, उसे लेकर NYT और The Australian जैसे अख़बार सरकार पर ख़ासे आक्रामक रहे हैं. इसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अधिकारियों से बात की है.
ऑस्ट्रेलिया का एक अख़बार है ‘द ऑस्ट्रेलियन’. हाल ही में उसने भारत में कोविड-19 की स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर लिखा था –
यानी - मोदी की वजह से भारत क़यामत की स्थिति में पहुंच गया है.
अख़बार ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘भीड़ से प्यार करने वाला’ बताया. ये भी लिखा कि घमंड, उग्र-राष्ट्रवाद और अफ़सरों की अक्षमता ने मिलकर भारत में असाधारण स्तर का संकट खड़ा कर दिया है.
बाकी तमाम देशों का मीडिया भी भारत में बिगड़े हालातों को लेकर मुखर रहा और केंद्र सरकार के रवैये को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया. अब देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी टीम को निर्देश दे दिए हैं कि विदेश मीडिया की इस तरह की कवरेज को ‘काउंटर’ करना है. विदेश मंत्री के अलावा बैठक में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन, विदेश सचिव हर्ष श्रींगला भी मौजूद थे.
"विदेशी मीडिया एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा"
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक विदेश मंत्री ने 29 तारीख़ को तमाम भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों से बात की. इस वर्चुअल मीटिंग में एस जयशंकर का कहना रहा कि विदेश मीडिया ने भारत में कोविड के हालातों पर जो रिपोर्टिंग की है, वो एकतरफा और भेदभाव से पूर्ण रही. विदेश मंत्री ने निर्देश दिए कि आगे इस तरह की रिपोर्टिंग होने पर तत्काल उसका जवाब दिया जाए और सरकार की तरफ से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी जाए.
उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी ये बात मजबूती से सामने रखें कि सरकार कोविड-19 के बीच किस तरह से ऑक्सीजन की कमी को पूरा कर रही है. ये बताएं कि कंसंट्रेटर, सिलेंडर, दवाइयां, वेंटिलेटर, वैक्सीन वगैरह की आपूर्ति पर कैसे ध्यान दिया जा रहा है.
जयशंकर बोले- दबाव में न आएं
इंडियन एक्सप्रेस ने मीटिंग में शामिल अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि एस जयशंकर ने मीटिंग में स्पष्ट कर दिया कि अगर किसी देश का मीडिया भारत को लेकर नकारात्मक बात लिखता है तो उसके दबाव में आने की ज़रूरत नहीं है. बल्कि वहां मौजूद भारतीय प्रतिनिधियों को दोगुनी ताकत से भारत सरकार का पक्ष रखना चाहिए. विदेश मंत्री ने कहा कि कोविड एक अभूतपूर्व समस्या सामने आई है. इसके सामने बड़े-बड़े देशों के सिस्टम बैठ गए. इसलिए कोई भी ऐसा कतई न सोचे कि केवल भारत में ही स्थितियां ख़राब हुई हैं.
विदेशी मीडिया ने क्या लिखा था?
द ऑस्ट्रेलियन के अलावा ब्रिटिश अख़बार ‘द गार्डियन’ ने अपने संपादकीय में सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताया है. अख़बार ने लिखा कि कोरोना से निपटने में भारत की विफ़लता का कारण मोदी का अति-आत्मविश्वास है.
टाइम मैगज़ीन ने लिखा- ‘ये नरक है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की विफ़लता ने भारत का कोरोना संकट और गहरा कर दिया है.’
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि इस तबाही से बचा जा सकता था. संक्रमण के खतरे के बीच स्टेडियम्स, कुंभ और चुनावी रैलियों की भीड़ ने सब बर्बाद कर दिया.

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