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दिल्ली के वकील के दफ्तर में छापा अलग वजह से पड़ा, FIR अलग वजह से हो गई!

वकील महमूद प्राचा का मामला आखिर है क्या?

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तस्वीर 24 दिसंबर की है. महमूद प्राचा के दफ्तर पहुंची पुलिस से लैपटॉप सीज़ करने को लेकर उनकी बहस हो गई थी. (फोटो- Social Media Screenshot)
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अभिषेक त्रिपाठी
26 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 26 दिसंबर 2020, 06:09 AM IST)
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दिल्ली के वकील महमूद प्राचा के ख़िलाफ FIR दर्ज हो गई है. आरोप- पब्लिक सर्वेंट को अपनी ड्यूटी निभाने से रोकना और इसके लिए आपराधिक ताकतों का इस्तेमाल करना. महमूद प्राचा वही वकील हैं, जिनके दफ्तर पर दो दिन पहले 24 दिसंबर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने छापा मारा था. छापेमारी इसलिए की गई थी, क्योंकि उन पर कथित रूप से एक फर्ज़ी हलफनामा देने और दंगा पीड़ितों को झूठे बयान देने के लिए मजबूर करने का आरोप है. प्राचा पर ये आरोप भी है कि उन्होंने एक अन्य वकील के हस्ताक्षर वाला शपथ पत्र आगे बढ़ाया था, जबकि वो वकील तीन साल पहले मर चुका था. बताते चलें कि प्राचा 2019 में CAA के ख़िलाफ हुए प्रदर्शन में जामा मस्जिद के बाहर अंबेडकर की फोटो लहराकर चर्चा में आए थे. पुलिस से बहस भी हो गई थी छापेमारी के दौरान का प्राचा का एक वीडियो सामने आया था. इसमें पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि प्राचा के लैपटॉप, कम्प्यूटर सीज़ होंगे. प्राचा कह रहे हैं कि ये ऑर्डर के ख़िलाफ है. उनका कहना है कि पुलिस उनके सामने लैपटॉप, कंप्यूटर देख तो सकती है, लेकिन सीज़ करके ले नहीं जा सकती. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया था कि जब दिल्ली दंगों की जांच की जा रही थी, तभी प्राचा के फर्ज़ी हलफनामे वाला मामला भी सामने आया था. जांच शुरू की गई. जांच के लिए ही अदालत से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के सर्च वॉरंट लिए गए थे. कौन हैं महमूद प्राचा? 20 दिसंबर 2019 को जामा मस्जिद के बाहर प्रदर्शन तेज़ हो गया. नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के खिलाफ. हज़ारों की संख्या में लोग जुटे थे. टीवी स्क्रीन्स पर दिख रही भीड़ की तस्वीरों के बीच एक शख्स नज़र आया. काले कोट में. हाथ में अंबेडकर की फोटो लहराता हुआ. बॉडी लैंग्वेज से लग रहा है कि बेहद गुस्से में कोई बात कह रहा है. कौन था ये शख़्स? महमूद प्राचा. सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. जामिया मिल्लिया इस्लामिया कैंपस में 15 दिसंबर 2019 को पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले वकीलों में से एक थे. दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित के वकील रहे हैं. उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी है. CAA के खिलाफ मुखर हैं और कई टीवी डिबेट्स का हिस्सा बनते रहे हैं.

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