दो साल की बच्ची का रेप, डॉक्टरों ने नहीं किया इलाज
कहा, पहले पुलिस को बुलाओ. तब करेंगे भर्ती.
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फोटो - thelallantop
गुड़गांव में दो साल की बच्ची के साथ रेप हुआ. विक्टिम को बिना इलाज किए डॉक्टर्स ने वापस भेज दिया. डाक्टर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
बच्ची की मां ने बताया कि शनिवार दोपहर में उसने अपनी बच्ची की ब्लीडिंग होते देखा. वो उसे लेकर सिविल हॉस्पिटल गई. लेकिन डॉक्टर्स ने कहा कि वो इलाज तभी करेंगे जब पुलिस आएगी. वो वापस लौट गई. अगले दिन भी जब दर्द बंद नहीं हुआ तो वो उसे लेकर फिर हॉस्पिटल गई. डॉक्टर्स ने उसे फिर से वापस भेज दिया.
डॉक्टर्स के खिलाफ सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में सेक्शन 166B के तहत FIR दर्ज की गई है. सेक्शन 166B यानी Public Servant disobeying law for intent to cause injury.
डॉक्टर्स का बच्ची को इस तरह बिना इलाज किये वापस भेज देना बेहद अमानवीय है. पुलिस के न आने से उन्होनें इलाज करने से मना कर दिया, जबकि रेप विक्टिम्स के इलाज के लिए तय गइडलाइंस कुछ और ही कहते हैं. मार्च 2014 में यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने नई गाइडलाइंस रिलीज़ की थीं. जिनके मुताबिक:
1. अगर विक्टिम पुलिस को इन्फॉर्म किये बिना भी हॉस्पिटल पहुंचती है तो डॉक्टर को उसका इलाज शुरू करना होगा. इससे पहले इलाज के पहले पुलिस का साथ में होना जरूरी था. अब ऐसा नहीं है. 2. इलाज के लिये विक्टिम को सारे रिस्क समझाकर उससे अनुमति लेना जरूरी है. अगर विक्टिम 12 साल से छोटी है या अनुमति देने की हालत में नहीं है तो उसके गार्जियन की अनुमति ली जाएगी. पुलिस को भी डॉक्टर्स ही इन्फॉर्म करेंगे. 3. विक्टिम के लिये दूसरे कपड़ों का इंतज़ाम जरूरी है. इलाज के दौरान मरीज़ को संवेदनशीलता से हैंडल करना होगा. 4. इनके इलाज के लिए हर हॉस्पिटल में एक सेपरेट रूम होना चाहिए. इलाज के समय कमरे में डॉक्टर और मरीज़ के अलावा कोई तीसरा नहीं होना चाहिए. अगर डॉक्टर मेल है तो एक फीमेल अटेंडेंट का होना जरूरी है. 5. डॉक्टर्स अब विक्टिम का टू-फिंगर टेस्ट नहीं करेंगे. टू-फिंगर टेस्ट ये पता करने के लिए होता है कि क्या मरीज़ ने पहले भी सेक्स किया है. 6. डॉक्टर्स अपनी राय या रिपोर्ट में ‘रेप’ वर्ड यूज़ नहीं कर सकते हैं. रेप कोई मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है बल्कि इसकी एक लीगल परिभाषा है.हमारे समाज में रेप विक्टिम को शर्मिंदा महसूस कराया जाता है. लोग उन्हें बुरा मानते हैं. कम से कम पुलिस औऱ डॉक्टर्स को तो इस तरह जजमेंटल न होकर प्रोफेशनल होना चाहिए. कम से कम अपनी इंसानियत तो नहीं भूलनी चाहिए. (ये स्टोरी द लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही आकांक्षा ने एडिट की है.)

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