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ममता के मंत्री ने कहा जीएसटी के जरिए हवाला कारोबार चल रहा

'एजेंडा आजतक' मेें पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री अमित मित्रा, नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी के बीच तीखी बहस.

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18 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 18 दिसंबर 2018, 02:40 PM IST)
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एजेंडा आजतक में पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री अमित मित्रा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी.
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आर्थिक सुधार, कितना असरदार?
नई दिल्ली में चल रहे 'एजेंडा आजतक' के इस सेशन में आर्थिक सुधारों पर 18 दिसंबर को जमकर बहस हुई. इस सेशन के तीन प्रमुख वक्ता थे. इस शो के संचालक थे सीनियर जर्नलिस्ट राजदीप सरदेसाई.
-अमित मित्रा, वित्तमंत्री, पश्चिम बंगाल -जयंत सिन्हा, नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री -मनीष तिवारी, सीनियर लीडर, कांग्रेस
बहस के दौरान पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा सरकार के आर्थिक सुधार बिलकुल असरदार साबित नहीं हुए. इस पर नागरिक उड्ययन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने सरकार का पक्ष रखा.
बहस की शुरुआत करते हुए राजदीप ने अमित मित्रा से पूछा कि वो अर्थव्यवस्था की हालत कैसी मानते हैं? इस वक्त इकॉनमी कैसी है, गंभीर है, नार्मल है या उम्दा है?
एजेंडा आजतक में अमित मित्रा, जयंत सिन्हा और मनीष तिवारी.
एजेंडा आजतक में अमित मित्रा, जयंत सिन्हा और मनीष तिवारी.

जवाब में अमित मित्रा ने आंकड़ों के जरिए सरकार हमला बोला. उन्होंने कहा कि
'इस सरकार की शुरुआत 7.2 की ग्रोथ रेट से हुई थी. फिर तरक्की की रफ्तार 8.1 तक गई. मगर नोटबंदी और जीएसटी की वजह से ये 6.7 तक गिर गई.इसको मतलब ये हुआ कि 4 लाख 35 हजार करोड़ रुपए इकॉनमी से चले गए. इस दौरान निर्यात भी गिरा. औद्योगिक तरक्की की दर गिरकर 2017-18 में 5.54 फीसदी की दर पर आ चुकी है. बैंकों का एनपीए यानी डूबता हुआ कर्ज बढ़कर 8.5 लाख करोड़ रुपए हो चुका है. अभी ये 9.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने वाला है. साल 20014-15 एनपीए 2 लाख करोड़ रुपए था. इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि इन लोगों ने देश की हालत क्या कर रखी है.'
इस पर राजदीप ने इन आंकड़ों पर जयंत सिन्हा से सरकार का पक्ष जाना कि क्या हैं ये आंकड़े? जयंत सिन्हा ने कहा-
'अगर आप विपक्ष में हैं तो ऐसे आंकड़े लेकर आएंगे कि सरकार पर सवाल खड़े किए जा सकें. मैं सिर्फ दो बातें कहूंगा. पहली ये कि दुनिया में जितनी तेज हमारी विकास दर है, उतनी किसी और देश की नहीं है. दूसरी बात, नोटबदली और जीएसटी से सुधार के ठोस कदम उठाए गए. इससे कुछ रुकावटें हुईं. बाद में उससे ग्रोथ रेट ठीक हुई. आज विकास दर 7 से 7.5 फीसदी तक है. महंगाई भी कम है. हमारी उत्पादन क्षमता में भी गिरावट नहीं आई. अर्थव्यवस्था में सुधार आया है. लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है. लोगों को घर, गैस सिलेंडर, शौचालय, बैंक खाता,  बिजली और पानी जैसी चीजें मिल गईं. आम जनता की नजर से देखें तो बहुत कुछ बदला है.'
इस पर राजदीप ने उनसे फिर सवाल किया. आप कह रहे हैं कि आम जनता से पूछिए. मैं पांच राज्यों के चुनाव में गया. वहां लोगों ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से उनको दिक्कतें हुईं? जवाब देते हुए जयंत सिन्हा ने कहा कि कर्नाटक चुनाव के दौरान जहां मैं गया वहां लोग कह रहे थे कि विकास धरातल पर आया है. ये सही है कि चुनाव परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आए. मगर विकास हुआ है.
 
अमित मित्रा. जयंत सिन्हा और मनीष तिवारी. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
अमित मित्रा. जयंत सिन्हा और मनीष तिवारी. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

राजदीप ने अगला सवाल कांग्रेस नेता मनीष तिवारी से किया. आप कहां खड़े होते हैं इन सबके बीच में? आपके समय महंगाई 10 परसेंट थी. किस तरह देखते हैं, आज जब सरकार कहती है ग्रोथ रेट ठीक है? आल इज वेल है. जवाब में मनीष तिवारी ने कहा कि
'आल इज वेल का सबसे बड़ा प्रमाण है, छत्तीसगढ़. जब वहां चुनाव की तैयारी कर रहे थे तब ये पता चला कि सबसे बड़ी दिक्कत बेरोजगारी को लेकर है. सरकार ने दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया. सच्चाई में 8 लाख 23 हजार रोजगार दिए. मुंबई में दो-दो बार किसानों के प्रदर्शन हुए. अगर आप आंकड़ों के मायाजाल से फंसकर अच्छा बताना चाहते हैं, तो ठीक है. यूपीए सरकार में 2004 से 20014 तक 7.8 जीडीपी ग्रोथ रेट रही. हमारी सरकार 19 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाकर लाई. अगर आप ये कहें कि उस सराकर की उपलब्धियां नहीं थीं, तो ये सही नहीं है. आज आप कह रहे हैं कि आप अर्थव्यवस्था अच्छी है, ऐसा होता तो तीन राज्य न हारते.'
बहस का रुख एक बार फिर राजदीप ने अमित मित्रा की ओर किया. उनसे पूछा कि क्या वाकई आप लोगों (नेताओं) के पास इस (रोजगार) समस्या का कोई साल्यूशन है? जवाब देते हुए पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री ने कहा कि बंगाल में हमारी सरकार आने के बाद किसानों की आमदनी बढ़ी है. पहले किसानों की आमदनी 90 हजार रुपए सालाना थी. ये बढ़कर अब 2 लाख 98 करोड़ रुपए हो चुकी है. हमारी सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए डिमांड की तरफ ध्यान दिया. अब बाकी राज्यों से लोग देखने आ रहे हैं. ये जादू कैसे हुआ? नोटबंदी और जीएसटी से नुकसान हुआ.
इस पर राजदीप ने अमित मित्रा को घेरते हुए कहा कि ये आप कह रहे हैं, जबकि आप जीएसटी काउंसिल में हैं. इस पर अमित मित्रा ने कहा,
'हमने इसके लिए मना किया था. बिना तैयारी के जुलाई 2017 में इसको लांच नहीं करना चाहिए था. सिस्टम का न टेस्ट हुआ. न  टेस्ट रन हुआ. अब कंप्यूटर काम नहीं कर रहे हैं. अब दिक्कत हो रही है. जीएसटी से हवाला हो रहा है. अगर आप इनवाइस अपलोड नहीं करोगे, तो इनपुट क्रेडिट का लाभ कैसे मिलेगा. मैं दावे के साथ कह रहा हूं इसमें गड़बड़ है. इस तरह तो ब्लैक मनी क्रिएट होगी.' 
उनका जवाब देते हुए जयंत सिन्हा कहा कि मित्रा साहब जीएसटी काउंसिल में हैं. उनको जो भी सुधार जरूरी लगते हैं, उनको वहां चर्चा करनी चाहिए. जीएसटी काउंसिल में सहमति बनाकर काम होता है. उनकी जो आपत्तियां हैं, उनको ठीक करने का प्रयास किया जाएगा.
इस बीच राजदीप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भाषण का जिक्र करते हुए सवाल किया कि उन्होंने जीएसटी में रेट कम करने का भरोसा दिया है लोगों को. इस पर अमित मित्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस तरह का ऐलान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. रेट तय करने के लिए प्रधानमंत्री नहीं कह सकते हैं. तब राजदीप ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को कहा-इस पर अमित मित्रा ने कहा कि सरकार में बैठे लोग पटली खा जाते हैं.
इस पर राजदीप ने खेती के संकट और किसान कर्ज माफी पर सवाल किया. जवाब देते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि
'कांग्रेस ने पहली बार लोन माफ किया 2008 में. किसानी की समस्या जटिल है. इसके लिए एक राजनीतिक सहमित बनाने की जरूरत है. इसकी जिम्मेदारी सरकार की है. सरकार विपक्ष से बात करे. पंजाब में 84 फीसदी किसान 4 एकड़ से कम जमीन वाले हैं. देश में 65 फीसदी लोग खेती पर डिपेंड हैं. जब इतनी बड़ी समस्या है, तो क्या उन किसानों को मरने देंगे. अगर उनको राहत देने का तरीका कर्ज माफी है, तो करने में क्या दिक्कत है. देश के 90 करोड़ लोग खेती से जुड़े हैं, उनके बारे में क्या सोचेंगे नहीं.'


 
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