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शक्ति मिल : जहां एक लड़की का गैंगरेप हुआ था, और 22 दिन बाद फोटो जर्नलिस्ट का

कोर्ट ने तीन को फांसी सुनाई थी, क्योंकि ये तीनों दोषी दोनों केस में शामिल थे.

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14 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 14 सितंबर 2017, 01:38 PM IST)
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22 अगस्त 2013 को शक्ति मिल में फोटो जर्नलिस्ट का गैंगरेप हुआ. पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए स्केच जारी किए थे. (Source: PTI)
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मुंबई की शक्ति मिल. जहां एक महीने के अंदर दो लड़कियां गैंगरेप की शिकार हुईं. 31 जुलाई 2013 को टेलीफोन ऑपरेटर का गैंगरेप हुआ. 22 अगस्त को फोटो जर्नलिस्ट का. दोनों रेप केस में मुंबई के सेशन कोर्ट ने तीन को फांसी, एक को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. इन दोनों केसों में दो नाबालिग भी शामिल थे. जिन्हें तीन साल के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने जुलाई 2014 में नासिक बोर्स्टल स्कूल भेज दिया था. अब उनके तीन साल पूरे हो चुके हैं और जुलाई में अपने घर लौट आए हैं. 22 अगस्त को मुंबई की शक्ति मिल में जो हुआ वो सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

क्या हुआ था फोटो जर्नलिस्ट के साथ

मुंबई का महालक्ष्मी इलाका. जहां शक्ति मिल सुनसान पड़ी थी. सालों से बंद पड़ी इस मिल में कोई आता जाता नहीं था. शायद इसलिए नशेड़ियों और बदमाशों की पनाहगाह बन गई थी. 22 अगस्त को एक फोटो जर्नलिस्ट की दर्दनाक चीखों से वह गूंजी. कोई उस लड़की की मदद के लिए वहां नहीं था. एक सहकर्मी था जो रस्सी से बंधा था. लड़की के साथ हुए गैंगरेप ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. जो मिल पहले सुनसान पड़ी थी, अब वो ख़बरों में थी.
सालों से बंद होनी की वजह से शक्ति मिल नशेड़ियों का अड्डा बन गई थी.
सालों से बंद होनी की वजह से शक्ति मिल नशेड़ियों का अड्डा बन गई थी.

शक्ति मिल में 22 अगस्त 2013 के दिन एक फोटो जर्नलिस्ट अपने एक दोस्त के साथ ऑफिस के असाइंनमेंट के लिए आई. शाम के 6 बजे होंगे. दोनों शक्ति मिल के कंपाउंड में दाखिल हुए. वो खंडहर पड़ी मिल के फोटो ले रहे थे. उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनके कदम खतरे की तरफ बढ़ रहे हैं. उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि अगले पल उनके साथ क्या होने वाला है.
खुद को पुलिस वाला बताकर जर्नलिस्ट को फोटो खींचने से मना किया और उसे अंदर ले गए.
खुद को पुलिस वाला बताकर जर्नलिस्ट को फोटो खींचने से मना किया और उसे अंदर ले गए.

जैसे ही दोनों मिल के अंदर गए, वहां उन्हें कुछ लोग मिले. उन्होंने खुद को पुलिस वाला बताया और उन्हें उस जगह के फोटो लेने से रोका. उन लोगों ने दोनों से कहा कि फोटो लेने से पहले इजाजत लेनी होगी. इस बहाने ही वो लोग फोटो जर्नलिस्ट और उसके सहकर्मी दोस्त को मिल के और अंदर की तरफ ले गए. वहां पर कुछ और लोग मौजूद थे. वो कुछ समझ पाते इससे पहले ही फोटो जर्नलिस्ट के दोस्त पर उन लोगों ने हमला कर दिया. दोनों को मारा-पीटा गया. लड़की के दोस्त को रस्सियों से बांध दिया गया. लड़की के दोस्त ने मीडिया को बताया था उसे शराब की बोतल से पीटा गया था.
दोस्त को बांधने के बाद पांच लोगों ने लड़की का गैंगरेप किया. जिंदा बचे ये दोनों लोग किसी तरह हॉस्पिटल पहुंचे. डॉक्टरों ने पुलिस को खबर की. गैंगरेप की खबर से इलाका सन्न रह गया. जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे. आनन-फानन में पुलिस ने कई टीमें बना कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी.
गैंगरेप के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हुए थे.
गैंगरेप के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हुए थे.

24 घंटे के भीतर ही पुलिस ने एक आरोपी को दबोच लिया. इसके बाद 72 घंटे के अंदर ही बाकी के 4 लोग भी पुलिस की गिरफ्त में थे. इनमें एक आरोपी नाबालिग था. जब पुलिस की पूछताछ शुरू हुई तो पता चला कि 31 जुलाई को यानी 22 दिन पहले ही इनमें से कुछ आरोपियों ने शक्ति मिल में ही एक 18 साल की टेलीफोन ऑपरेटर का भी गैंगरेप किया था. इन आरोपियों के अलावा एक नाबालिग भी इस केस में शामिल था.

सेशन कोर्ट से तीन को मिली फांसी

दोनों गैंगरेप केस में अप्रैल 2014 में मुंबई की सेशन कोर्ट ने फैसला सुनाया. विजय जाधव (19 साल), मोहम्मद क़ासिम शेख (21 साल) और मोहम्मद अंसारी (28 साल) दोनों मामलों में दोषी क़रार दिए गए थे. इन तीनों को दोबारा रेप का दोषी होने के कारण फांसी की सज़ा दी गई. इस मामले के चौथे दोषी सिराज रहमान खान को टेलीफ़ोन ऑपरेटर के मामले में शामिल न होने की वजह से उम्रक़ैद की सज़ा दी गई. कोर्ट ने जिन्हें फांसी सुनाई उनको 'आदतन अपराधी' माना था. जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उनकी अपील मुंबई हाईकोर्ट में पेंडिंग है. जिस पर सुनवाई होनी है.
गैंगरेप के तीन दोषियों को सेशन कोर्ट ने फांसी की सज़ा सुनाई तो एक को उम्रकैद.
गैंगरेप के तीन दोषियों को सेशन कोर्ट ने फांसी की सज़ा सुनाई तो एक को उम्रकैद.

वहीं दोषी दो नाबालिगों को जुवेनाइल कोर्ट ने 3 साल के लिए नासिक के बाल सुधार गृह भेज दिया था. अब वो जुलाई में रिहा हो चुके हैं. नासिक में बोर्स्टल स्कूल के प्रिंसिपल और सुपरिन्टेन्डेंट श्रीकृष्णा भुसरे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'इंस्टीट्यूशन में टेक्निकल एजुकेशन के लिए कई सर्टिफिकेट कोर्स कराए जाते हैं. दोनों लड़कों ने कई कोर्स किए हैं. जो कोर्स किए, उनमें दो पहिया वाहन की सर्विस करना, एयर कंडीशन, रेफ्रिजरेटर रिपेयर और इलेक्ट्रिकल वायरमैन का कोर्स शामिल है.'
स्कूल के अफसरों का कहना है कि स्कूल से निकलने पर दोनों लड़के एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए उत्साहित थे. एक ने 10वीं की पढ़ाई पूरी कर ली है तो दूसरा न पढ़ सकता था और न लिख सकता था, उसने भी चौथी क्लास तक पढ़ाई कर ली है. अब दोनों ही अगली क्लास में दाखिल हो गए हैं.


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