फरवरी का महीना खत्म नहीं हुआ, फिर भी इतनी गर्मी क्यों पड़ रही है?
गर्मी के रिकॉर्ड टूटने वाले हैं, फसलें बर्बाद हो सकती हैं!

मार्च का महीना अभी शुरू भी नहीं हुआ, लेकिन मौसम अप्रैल वाली फील दे रहा है (India Heat Wave February). देशभर के अलग-अलग राज्यों में पिछले साल की तुलना में गर्मी जल्दी आ रही है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो कुछ दिनों में हालात और खराब होंगे. आशंका है कि भारत और पाकिस्तान में गर्मी से जुड़े दर्जनों रिकॉर्ड टूटने वाले हैं.
पिछले साल भारतीय मौसम वैज्ञानिकों ने मार्च में साल की पहली हीट वेव का अलर्ट जारी किया था. तब भी गर्मी ने जल्दी दस्तक देकर कई रिकॉर्ड तोड़े थे. इस साल हीट वेव का अलर्ट और पहले आ गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 19 फरवरी को साल का पहला हीट वेव अलर्ट जारी किया. चेतावनी दी गई कि भारत के पश्चिमी क्षेत्र के हिस्सों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा. भारत के बाकी हिस्सों में भी जो तापमान रिकॉर्ड किया गया, वो आमतौर पर मिड-मार्च में देखा जाता है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक नरेश कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया,
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ कमजोर है, जिसके चलते सर्दियों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. इस वजह से तापमान बढ़ा है. इधर, 16 फरवरी को गुजरात के भुज में तापमान बढ़कर 40.3 सेल्सियस हो गया.
भारतीय जलवायु विशेषज्ञ राजेश कपाड़िया ने अनुमान जताया है कि इस साल भारत में रिकॉर्ड गर्मी की लहर आ सकती है, क्योंकि भारत में पहले से ही तापमान बढ़ने लगा है. राजेश कपाड़िया ने अनुमान जताते हुए कहा,
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक सलाहकार अनूप कुमार श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान वॉशिंगटन पोस्ट से कहा,
फसलों पर क्या असर?भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 17 फरवरी को एक एडवाइजरी जारी की थी. इसमें किसानों को पीले रतुआ रोग (Yellow Rust Disease) के लिए अपनी फसलों का निरीक्षण करने के लिए कहा गया. फसलों में ये बीमारी ज्यादा तापमान की वजह से होती है. 20 फरवरी को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने एडवाइजरी में लिखा,
इधर 21 फरवरी को IMD ने प्रेस रिलीज में कहा,
पिछले साल क्या हाल थे?इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले साल अप्रैल में भयंकर लू चली थी. अप्रैल में 122 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा था. गर्मी के चलते भारत में खेती और किसानों पर भी बुरा असर पड़ा. तेजी से बढ़ते तापमान ने नौ राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में फसलों, फलों, सब्जियों और जानवरों को भी प्रभावित किया. गेंहूं का प्रोडक्शन करीब 10 प्रतिशत तक कम हुआ था. करीब 11 मिलियन मीट्रिक टन.
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