मनीष सिसोदिया पर गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा, 'राजनीतिक जासूसी' के आरोप में केंद्र ने उठाया बड़ा कदम
'फ़ीडबैक यूनिट' के नाम पर जासूसी करने के लगे आरोप.

गृह मंत्रालय ने कथित ‘फ़ीडबैक यूनिट (FBU) जासूसी’ मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) पर मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी दे दी है. ये मंजूरी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दी गई है. केंद्र सरकार के इस कदम के बाद मनीष सिसोदिया पर गिरफ्तारी का एक और खतरा पैदा हो गया है.
मनीष सिसोदिया दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग के प्रमुख हैं. जब 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) सत्ता में वापस आई, तो सतर्कता विभाग के तहत ही एक फ़ीडबैक यूनिट (FBU) बनाई गई थी. मक़सद था कि दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले अलग-अलग विभागों और स्वायत्त निकायों-संस्थानों के कामकाज के बारे में जानकारी और प्रतिक्रियाएं इकट्ठा करना. कुछ हफ़्तों पहले CBI ने इस यूनिट को लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी. इसमें दावा किया गया कि FBU प्रतिक्रिया इकट्ठा करने के नाम पर 'राजनीतिक जासूसी' कर रही थी.
CBI ने आरोप लगाए हैं कि AAP ने गुप्त सेवा व्यय के लिए एक करोड़ रुपये लिए और 2016 से यूनिट ने काम करना शुरू किया. लेकिन कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोई एजेंडा तय नहीं किया. FBU में नियुक्तियों के लिए लेफ़्टिनेंट-गवर्नर से कोई मंज़ूरी नहीं ली गई. इसके बाद CBI ने उपमुख्यमंत्री सिसोदिया के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने की मंज़ूरी मांगी थी जिसे उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंजूरी दे दी और इसे गृह मंत्रालय को भेज दिया. मंज़ूरी देते हुए एलजी ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने ‘जासूसी और अतिचार’ के लिए एक गुप्त एजेंसी बनाने की सोची-समझी कोशिश की है.
मनीष सिसोदिया पर ये नई मुसीबत तब आई है जब उन पर शराब नीति घोटाले में गिरफ्तारी की तलवार पहले से लटक रही है. ED लगातार उस मामले की जांच कर रही है. गृह मंत्रालय की मंजूरी की खबर आने के बाद मामले पर मनीष सिसोदिया की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने ट्वीट किया,
वहीं AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि मामला पूरी तरह से फ़र्जी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर पूछा कि "करोड़ों में घोटाला" करने के बावजूद गौतम अडानी के ख़िलाफ़ कोई जांच क्यों नहीं हो रही?
वीडियो: MCD चुनाव में कैश फॉर टिकट मामले पर मनीष सिसोदिया की सफाई

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