The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Farooq Abdullah Says That BJP IS Using Kashmiri Pandits For Politics

फारूक अब्दुल्ला किस बात के लिए कश्मीरी पंडितों से माफी मांग रहे हैं?

कहा-पंडितों को पलायन के लिए मजबूर करने वाले मुसलमान नहीं थे.

Advertisement
pic
11 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 11 दिसंबर 2021, 01:14 PM IST)
Img The Lallantop
Farooq Abdullah ने कहा कि पंडितों को घाटी से निकालने वालों को लगा था कि कश्मीर उन्हें मिल जाएगा. (फोटो: PTI)
Quick AI Highlights
Click here to view more
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने बीजेपी पर कश्मीरी पंडितों को वोट बैंक की तरह प्रयोग करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने बस कश्मीरी पंडितों के नाम पर अपनी राजनीति चमकाई है और असल में उनके लिए कुछ नहीं किया. साथ ही साथ अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों से माफी भी मांगी. उन्होंने कहा कि वो इस बात के लिए माफी मांगते है कि 90 के दशक में वो घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन नहीं रोक पाए. इंडिया टुडे से जुड़े नीरज कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, फारूक अब्दुल्ला ने ये सब बातें नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे की बैठक के दौरान कहीं. फारुक अब्दुल्ला ही पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष हैं. इस बैठक के दौरान मोर्चे ने कश्मीरी पंडितों के संबंध में तीन प्रस्ताव पारित किए. पहला, कश्मीरी पंडितों के लिए राजनीतिक आरक्षण. दूसरा, कश्मीरी हिंदू टेंपल प्रोटेक्शन बिल को पारित करना और तीसरा, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए अच्छा खासा आर्थिक पैकेज. कश्मीरी पंडितों से माफी मांगते हुए अब्दुल्ला ने कहा,
"अपने शासन के दौरान हमने कश्मीरी पंडितों को वापस लाने का भरकस प्रयास किया. लेकिन कुछ तत्वों ने हमारे प्रयासों पर पानी फेर दिया. पलायन के बाद कश्मीरी पंडितों ने बहुत कष्ट सहा है. इसकी कोई सीमा नहीं है."
फारुक अब्दुल्ला ने आगे कहा,
"कुछ ताकतों ने कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों को बांटने की कोशिश की. पंडितों को घाटी से बाहर निकालने वाले मुसलमान नहीं थे, बल्कि कुछ आत्म केंद्रित लोग थे. उन्हें लगा था कि घाटी से पंडितों को निकालने के बाद कश्मीर उनका हो जाएगा. लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि वो अपने इस कुंठित लक्ष्य को कभी हासिल नहीं कर पाएंगे. मैं जम्मू के लोगों को बधाई देता हूं कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों को शरण दी."
अब्दुल्ला ने ये भी कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों को आपस में बनी दूरी को कम करने की कोशिश करनी चाहिए. नफरत की जगह प्रेम को जगह देनी चाहिए. अब्दुल्ला ने कहा कि हमें अपने जेहन को साफ करने की जरूरत है और जम्मू-कश्मीर को बचाने की भी. उन्होंने आगे कहा,
"हम नेता अपने फायदे के लिए लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन लोगों को एकता प्रदर्शित करनी होगी. सांप्रदायिक ताकतों के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देना होगा."
इस बैठक के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र की मोदी सरकार पर दूसरे मुद्दों को लेकर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि कृषि बिलों को मोदी सरकार ने पारित किया था और अब वापस ले लिया है. सिर्फ इसलिए ताकि पार्टी को राजनीतिक तौर पर कोई नुकसान ना हो. अब्दुल्ला ने यह भी पूछा कि आखिर अभी तक मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल पेश क्यों नहीं किया.

Advertisement

Advertisement

()