दिल्ली बॉर्डर पर 75 साल के किसान ने टॉयलेट में जान दी, सुसाइड नोट में लिखा-यहीं अंतिम संस्कार हो
आंदोलन के दौरान अब तक 50 से ज्यादा किसान जान गंवा चुके हैं.
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आंदोलन में अब तक 50 से ज्यादा किसान जान गंवा चुके हैं. इनमें से कुछ लोगों ने आत्महत्या कर ली तो कुछ की ठंड से मौत हुई है.
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दो जनवरी 2021. किसान आंदोलन का 38वां दिन. दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे एक और किसान ने आत्महत्या कर ली. गाजियाबाद के यूपी गेट पर किसान ने शौचालय में सुसाइड कर लिया. किसान का नाम कश्मीर सिंह है. वह 75 साल के थे. किसान की मौत पर कांग्रेस नेता और पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया,
कश्मीर सिंह का सुसाइड नोट भी मिला है. अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा है कि जहां उनकी मौत हुई है, वहीं उनका पोता अंतिम संस्कार करे. उनकी अंत्येष्टि दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर ही हो. सुसाइड नोट में लिखा है कि सरकार फेल हो गई है. आखिर हम यहां कब तक बैठे रहेंगे. सरकार सुन नहीं रही है, इसलिए मैं जान देकर जा रहा हूं. मृतक किसान का सुसाइड नोट पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है. किसान नेता अशोक धवाले ने बताया कि अब तक 50 किसानों की जान जा चुकी है. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रदेश प्रमुख बिजेंद्र यादव ने कहा कि एक दिन पहले भी ठंड लगने की वजह से एक किसान की मौत हो गई थी. इसके एक दिन बाद ही किसान कश्मीर सिंह ने सुसाइड कर लिया. यादव ने कहा कि कश्मीर सिंह का बेटा और पोता भी किसान आंदोलन में शामिल है. इससे पहले गाजीपुर सीमा पर एक जनवरी को एक किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी. बागपत जिले के भगवानपुर नांगल गांव के निवासी मोहर सिंह (57) को धरनास्थल पर ही दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव का कहना है कि अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को किसान 'किसान गणतंत्र परेड' आयोजित करेंगे. उन्होंने कहा कि हम दिल्ली और आपसास के इलाके के किसानों से अपील करते हैं कि इसके लिए तैयार रहें. उन्होंने किसान परिवार से आग्रह किया कि वे परिवार के एक सदस्य को दिल्ली भेजें अगर संभव हो तो. वहीं क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रेसिडेंट दर्शन पाल का कहना है कि 23 जनवरी को किसान राज्यपाल हाउस की तरफ मार्च करेंगे. अलग-अलग राज्यों में. 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर किसान परेड निकलेगी.करनाल(हरियाणा) से संत बाबा राम सिंह व फाजिल्का(पंजाब) से अमरजीत सिंह के बाद बिलासपुर(उत्तराखण्ड) के किसान कश्मीर सिंह द्वारा #किसान_आंदोलन में प्राणों की आहुति के समाचार से मन बेहद व्यथित है।
निष्ठुर सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ते हुए 3 काले कानूनों को तुरंत वापिस लेना चाहिए। https://t.co/ks8QHa42Qu — Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) January 2, 2021

