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कल भूख हड़ताल करेंगे किसान, 27 को मोदी जब 'मन की बात' करेंगे तब थाली बजाएंगे

आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को दी गई श्रद्धांजलि.

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मीडिया से बात करते किसान नेता जगजीत सिंह बाएं और योगेंद्र यादव दाएं. फोटो- ANI
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Varun Kumar
20 दिसंबर 2020 (Updated: 20 दिसंबर 2020, 02:11 PM IST)
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20 दिसंबर. किसान आंदोलन का 25वां दिन. जगह जगह उन किसानों को श्रद्धांजलि दी गई जिनकी जान किसान आंदोलन के दौरान चली गई. कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ किसानों के एक दल ने मीटिंग भी की. साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की गई कि 27 दिसंबर को जब पीएम मोदी 'मन की बात' करेंगे, किसान थाली बजाएंगे.
संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस
भारतीय किसान यूनियन के जगजीत सिंह डालेवाल ने कहा कि,'हम सभी से अपील करते हैं कि वो अपने घरों में उतनी देर ताली बजाएं जितनी देर पीएम मोदी अपने कार्यक्रम में बोलें.' उन्होंने कहा,
"25 दिसंबर से लेकर 27 दिसंबर तक हमने हरियाणा के सभी टोल प्लाजा फ्री करने का फैसला किया है."
स्वराज इंडिया प्रमुख योगेंद्र यादव ने कहा,
"हमने सभी प्रदर्शन स्थलों पर कल से (21 दिसंबर) 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला किया है."
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा,
"किसान दिवस 23 दिसंबर को मनाया जाता है. मैं लोगों से उस दिन का भोजन छोड़ने का आग्रह करूंगा."
नरेंद्र सिंह तोमर से मिले किसान
वैसे तो सरकार और आंदोलन कर रहे किसानों के बीच कई राउंड की बातचीत हो चुकी है. इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री कई अन्य किसान प्रतिनिधिमंडलों से भी मिले हैं. कुछ किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों के पक्ष में अपनी प्रतिबद्धता जताई है और वापस लेने पर आंदोलन करने तक की बातें कही हैं. नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा कुछ और मंत्री भी किसानों से मिल रहे हैं और नए कानूनों के फायदे बता रहे हैं. आज 20 दिसंबर को भी नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से कृषि भवन में मुलाकात की. इस दौरान क्या बातें हुईं, यह फिलहाल विस्तार से पता नहीं चल सका है.
Kisan Meeting
कृषि मंत्री से मिलने कृषि भवन पहुंचे किसान. फोटो- ANI

युवा किसान ने की आत्महत्या
पंजाब के एक 22 साल के युवा किसान ने आत्महत्या कर ली. हाल ही में ये किसान दिल्ली में जारी प्रदर्शन से लौटा था. भटिंडा का ये किसान गुरलाभ सिंह 18 तारीख को दिल्ली बॉर्डर पर जारी प्रदर्शन से अपने गांव वापस आया था. शनिवार 19 दिसंबर को उसने अपने घर पर जहरीला पदार्थ खा लिया. उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. उसकी मौत के कारण का पता नहीं चल पाया है हालांकि उस पर छह लाख का कर्ज था.
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भटिंडा के किसान गुरलाभ सिंह की फाइल फोटो. फोटो- इंडियाटुडे

कुछ किसानों की जान तक जा चुकी है
प्रदर्शन में शामिल 20 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है. अलग अलग कारणों से इन लोगों की मौत हुई है. एक के बाद एक किसानों की मौत से किसान संगठनों के साथ साथ सरकार भी परेशान है. किसानों ने आज 20 दिसंबर को देश में अलग अलग जगहों पर इन 'शहीद' किसानों को श्रद्धांजलि दी. कई राज्यों में, कई जिलों में किसानों ने अपने उन साथियों को नमन किया जिन्होंने इस प्रदर्शन, आंदोलन के दौरान अपनी जान गवां दी.

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