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तस्वीरों में: किसानों के 'रेल रोको' आंदोलन ने रेलवे के लिए क्या आफ़त मचाई?

लखीमपुर कांड में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन.

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किसानों का रेल रोको. (फोटो- PTI)
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सोम शेखर
18 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 18 अक्तूबर 2021, 01:01 PM IST)
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लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के विरोध में और आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर किसानों ने 18 अक्टूबर को देशभर में कई जगहों पर 'रेल रोको' आंदोलन किया. इसके तहत शाम 4 बजे तक अलग-अलग रूट्स पर ट्रेनें रोकी गईं. इस आंदोलन के चलते उत्तर पूर्व रेलवे को दिल्ली-UP रूट की कुछ ट्रेनों को रद्द करने का ऐलान करना पड़ा. वहीं, कई ट्रेनों के रूट डायवर्ट किए गए.
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7 जोन में किसानों ने रेल रोको आंदोलन के तहत ट्रेनें रुकवाईं. 184 रेलवे लोकेशंस पर किसान धरने पर बैठे. 290 से अधिक ट्रेनें कथित रूप से प्रभावित हुईं और 40 से अधिक ट्रेनें रद्द की गईं.

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मध्य प्रदेश में शहीद किसान श्रद्धांजलि पदयात्रा और अन्य प्रांतों में शहीद कलश यात्रा निकाली गई.  लोकनीति सत्याग्रह पदयात्रा वाराणसी के अपने गंतव्य तक पहुंची.

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की तरफ़ से आदेश आया कि जो भी लोग किसानों द्वारा बुलाए इस रेल रोको आंदोलन में हिस्सा लेंगे, उनके ख़िलाफ़ सीआरपीसी की धारा 144 के तहत कार्रवाई होगी और नॉर्मलसी बिगाड़ने वाले लोगों के ख़िलाफ़ रासुका भी लगाई जा सकती है.

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43 ट्रेनें कैंसल की गईं. एक ट्रेन डायवर्ट और क़रीब 50 ट्रेनों को आंशिक रूप से कैंसल किया गया.
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लखीमपुर खीरी कांड के बाद किसान लगातार मोदी कैबिनेट के मंत्री और आरोपी आशीष मिश्रा के पिता अजय मिश्रा टेनी को मंत्री पद से बर्ख़ास्त करने की मांग कर रहे हैं. इसी को लेकर रेल रोको जैसे प्रदर्शन किए जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में पुलिस ने कई जगह किसान नेताओं को हिरासत में लिया है. मध्य प्रदेश में पुलिस ने गुना, ग्वालियर, रीवा, बामनिया (झाबुआ) और अन्य जगहों पर प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया.
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संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ़ से रेल रोको आंदोलन रखा गया था. रविवार 17 अक्टूबर को भी मोर्चे की तरफ से कहा गया कि जब तक खीरी मामले में न्याय नहीं मिलता, तब तक अलग-अलग आंदोलन चलते रहेंगे. पुलिस की तमाम चेतावनियां के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई रेलवे लोकेशंस पर प्रदर्शन हुए. मेरठ के क़रीब मोदीनगर में प्रदर्शनकारियों ने चलती ट्रेन को रुकवा दिया.
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आंदोलन में संख्या और जोश पंजाब और हरियाणा में सबसे ज़्यादा दिखा, क्योंकि किसान आंदोलन का सबसे ज़्यादा प्रभाव भी इन्हीं इलाक़ों में रहा. एएनआई से संक्षेप में बात करते हुए, किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा,
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फिलहाल लखीमपुर खीरी मामले के आरोपी आशीष मिश्रा पुलिस कस्टडी में हैं. उनके पिता अजय मिश्रा कह चुके हैं कि अगर उनके बेटे के ख़िलाफ़ लगे आरोप सही साबित हुए तो वे मंत्री पद छोड़ देंगे.

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