फेसबुक पर अब अंधे भी 'देख' सकेंगे फोटो
अब ब्लाइंड यूजर को बता लग जाएगा कि फोटो में पेड़ है, पहाड़ है या स्माइल करता हुआ कोई चेहरा है.
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फोटो - thelallantop
फेसबुक पर अब अंधे लोग भी तस्वीरें 'देख' सकेंगे. कैसे?
फेसबुक इसके लिए एक नई चीज लेकर आ रहा है, जिसे कहते हैं 'ऑटोमेटिक ऑल्टरनेटिव टेक्स्ट.' ये इमेज को अपनी इंटेलीजेंस से डिकोड करके उसे अंधे लोगों को डिस्क्राइब करेगा.
यह फीचर कैसे काम करेगा, आप इस वीडियो से समझें.
https://www.youtube.com/watch?v=Tjugc8a836Q
फेसबुक अपनी बुद्धि से, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कहा जाता है, तस्वीर की संभावित चीजों का अनुमान लगाएगा. फिर वह ब्लाइंड यूजर को बोलकर बता देगा कि फोटो में पेड़ है कि पहाड़ है या स्माइल करता हुआ कोई चेहरा है. इससे पहले ब्लाइंड यूजर सिर्फ फोटो पोस्ट करने वाले का नाम ही सुन पाते थे.अभी तक ब्लाइंड यूजर्स स्क्रीनरीडर सॉफ्टवेयर की मदद से कंप्यूटर चलाते थे. लेकिन ये सिर्फ टेक्स्ट को ही पढ़ सकता है. फेसबुक का ये नया फीचर लगभल 80 ऑब्जेक्ट्स को पहचान कर पढ़ सकेगा. इनमें से कुछ चीज़ें ये हैं: -कार, बोट, साइकिल, ट्रेन, रोड, मोटरसाइकिल, बस -पहाड़, पेड़, आकाश, समुद्र, बर्फ, पानी, घास, लहर, बीच -टेनिस, स्विमिंग, स्टेडियम, बास्केटबॉल, बेसबॉल, गोल्फ -आइसक्रीम, कॉफी, पिज्जा -दाढ़ी, स्माइल, गहने, जूते इस सर्विस के पीछे जिस बंदे का दिमाग है वो हैं इंजीनियर मैट किंग. किंग खुद भी नहीं देख पाते हैं. उन्हें ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ नाम की बीमारी है. इसमें धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चली जाती है.
फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर रोजाना करीब 1.8 अरब फोटोज हर रोज अपलोड होती हैं.इसकी कहानी यहां से शुरू हुई कि 6 साल पहले, एक सुबह किंग कुछ लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना चाहते थे. लेकिन इस काम में उन्हें 3-4 घंटे लग गए. फिर उन्होंने ऐसा एक फीचर बनाने के बारे में सोचा. किंग और उनकी टीम का प्लान इसे और ऐडवांस्ड बनाने का है. वो चाहते हैं कि फेसबुक अपने यूज़र्स का चेहरा पहचान कर भी बताए. अभी ये फीचर सिर्फ आईफोन प्लेटफॉर्म पर इंग्लिश भाषा में ही उपलब्ध है. इसे आईफोन का बिल्ट-इन रीडर ऑन करके यूज किया जा सकता है.

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