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यूपी में शिव मंदिर के बाहर नमाज पढ़ रहे लोगों के साथ जो हुआ वो सबको जानना चाहिए

फेसबुक पर खूब वायरल हो रही है ये पोस्ट.

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2 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 3 दिसंबर 2018, 10:16 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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'मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी'  लता मंगेशकर की आवाज में गंगा की सौगंध फिल्म का ये गाना तो आपने सुना ही होगा. इसी गाने में एक लाइन है
कोई वज़ू करे मेरे जल से कोई मूरत को नहलाए, कहीं मोची चमड़ा धोए कहीं पंडित प्यास बुझाए ........
जो भारत की सामाजिक ताने बाने को प्रदर्शित करती है. कि किस तरह से गंगा का व्यवहार सभी के लिए बराबर है. आप सोच रहे होंगे कि हम आपको ये सब क्यों बता रहे हैं. दरअसल  ऐसे समय में जब धर्म के नाम की राजनीति देश में अपने चरम पर है. सार्वजनिक मंचों से जाति और गोत्र पूछा और बताया जा रहा है. अली और बजरंग बली के नाम पर राजनीति की जा रही है और 'धर्म खतरे में है' का डर दिखाकर वोट मांगा जा रहा है. फेसबुक पर एक पोस्ट खूब वायरल हो रहा है. जिसे हिन्दुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब का पर्याय बताया जा रहा है.
दिल्ली से 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यूपी का बुलंदशहर. पूर्व दिशा में गंगा और पश्चिम में यमुना इसकी सीमा निर्धारित करती हैं. गंगा-यमुना की गोद में बसे बुलंदशहर के एक गांव दरियापुर-अढौली में शनिवार से अगले तीन दिन तक तब्लीगी इज्तमा का आयोजन हो रहा है. इस इज्तमा में करीब 10 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है. इज्तमा में शामिल होने के लिए दूर-दराज से लोग आ रहे है. रूड़की के रहने वाले सनव्वर आमीन भी जा रहे थे. सनव्वर जेनपुर गांव के पास पहुंचे थे कि भयानक जाम में फंस गए. सनव्वर के नमाज का समय हो रहा था. लेकिन न तो जाम खत्म होने का नाम ले रहा था और न ही उनके पास पानी का कोई इंतजाम था. सड़क के पास में ही शिव मंदिर था. सनव्वर अपने साथियों के साथ मंदिर में गए. शिव मंदिर की इंतजामिया कमेटी ने उन्हें पानी मुहैया कराया. सनव्वर और उनके साथियों ने नमाज पढ़ी और शिव मंदिर के इंतजामिया कमेटी का शुक्रिया अदा किया. इस पूरे वाकये को जैसे ही उन्होंने फेसबुक पर शेयर किया यह वायरल हो गया. वायरल होना भी चाहिए क्योंकि सोशल मीडिया को कुछ लोगों ने नफरत फैलाने का हथियार बना रखा है.
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 सियासत को आदत है लहू चखने की वरना मुल्क में सब खैरियत से हैं...
सनव्वर का पोस्ट हमें बताता है कि आज भी हमारे देश में लोग धार्मिक कट्टरता से ऊपर उठकर एक दूसरे की जरूरतों को अहमियत देते हैं. सड़क किनारे किसी अनजाने को पानी देने से पहले मंदिर के लोगों ने न जाति देखा न धर्म और न ही गोत्र. लेकिन वोट मांगने आने वाले जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांट रहे हैं. वोट बैंक की राजनीति में अली और बजरंग बली को भी घसीट लिया गया है. ऐसे समय में सनव्वर का यह पोस्ट हमें इन नेताओं को आईना दिखाता है.

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मंदिर भी चुप है मस्जिद भी चुप है, नफरत बोल रही है. जहर कहां तक पहुंचा सियासत तौल रही है

हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा, सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा लिखने वाले अल्लामा इकबाल ने एक कविता लिखी है नया शिवाला. जिसकी ये पंक्तियां आज के समय में ज्यादा प्रासंगिक प्रतीत होती हैं.
आ गैरियत के पर्दे एक बार फिर उठा दे बिछड़ों को फिर मिला दें, नक्शे दुई मिटा दें सूनी पड़ी हुई है मुद्दतों से दिल की बस्ती आ इक नया शिवाला इस देश में बना दें
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सनव्वर के पोस्ट पर आए कमेंट समाज में नफरत का बीज बोने वाले लोगों के मुंह पर करारा तमाचा मारते हैं. कमेंट में लोग मंदिर के इंतजामिया कमेटी की खूब तारीफ कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यही असली हिंदुस्तान है जो गंगा जमुनी तहजीब की सच्ची तस्वीर पेश करता है.

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