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गायब नहीं था सलमान का ड्राइवर, केस से बर्बाद हो गया है

हरीश दुलानी के मां-बाप नहीं रहे, नौकरी गई, घर-गाड़ी गई, और दुनिया ने समझा वो गायब हो गया.

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27 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 27 जुलाई 2016, 01:20 PM IST)
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हरीश दुलानी की पहली तस्वीर, 1998 को जोधपुर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस में सलमान के सामने हरीश दुलानी बैठे हुए हैं. ये तस्वीर दैनिक भास्कर के सौजन्य से है. दूसरी तस्वीर हरीश दुलानी की ताजा तस्वीर है. ये तस्वीर NDTV से ली गई है.
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सलमान खान के केस का फैसला आया अभी. राजस्थान हाई कोर्ट ने पाक-साफ बता छोड़ दिया. बताया गया कि शिकार के 3 मामलों का सबसे बड़ा, सबसे मेन गवाह ड्राइवर गायब है. गायब ड्राइवर का नाम बताया गया हरीश दुलानी. सब जगह खबर चली कि यार वो तो 17 साल से कहीं दिखा ही नहीं. कोई बोले दुबई चला गया. कोई बोले, दबी में मार-मूर दिया गया.
लेकिन ल्यो दैनिक भास्कर अखबार वाले ढूंढ लाए उसको. जोधपुर में जीता-जागता आदमी बैठा है. दुनिया उसे गुमा मान रही है. जब फैसला आया उस रात वो अहमदाबाद से टैक्सी से जोधपुर आ रहा था. आज भी वो ड्राइवरी करता है. आज भी वो इस बात पर कायम है कि उस रात सलमान खान ने शिकार किया था. और हां वो दुबई नहीं गया था, आज भी जोधपुर में रहता है.
अखबार वालों ने पूछा कि सलमान उनकी गवाही के बिना छूट गए, वो गवाही देने काहे नहीं गए. तो उसने कहा. मेरी तो अभी तक गवाही ही नहीं हुई. बचाव पक्ष ने कभी इन्फॉर्म ही नहीं किया कि जिरह के लिए कोर्ट में आना है. मैं गायब नहीं हुआ था. पेशी में भी जाता था. पिछले साल नवंबर में गया था. अभी 17 मई को पेशी में गया था. कोर्ट में जाकर साइन किए हैं. आप साइन देख लो. फैमिली इश्यू के कारण बीच में नहीं जा पाया था. अभी दस अगस्त को फिर पेशी होनी है, फिर जाना है. सुप्रीम कोर्ट में बुलाया जाता है, तो जाऊंगा. लेकिन सिक्योरिटी और खर्च की चिंता है. पहले ड्राइवर था. नौकरी में था, इस केस के चक्कर में जॉब चली गई. उसने ये भी बताया कि इस केस के चक्कर में उसका मकान बिक गया. बाइक बिक गई. दुबई वाली बात भी फर्जी बताई. काहे के पासपोर्ट तक नहीं है. उसके मम्मी-पापा भी नहीं रहे, जीते में उसके पापा को धमकियां मिलती थीं. बताते नहीं थे, चिंता के चलते मर गए, वो गए तो उनकी चिंता में मां भी चल बसी. सलमान ने शिकार किया था कि नहीं वाले सवाल पर बोले, मैंने मजिस्ट्रेट के सामने जो कहा था. मैं उसी पर कायम हूं. तब हरीश ने कहा था. ‘रात का वक़्त था. चिंकारा का एक झुण्ड भाग रहा था. उसके पीछे एक जिप्सी. तीन फायर होते हैं. गाड़ी रुक जाती है. सन्नाटा छा जाता है. सलमान गाड़ी से उतरते हैं. अपना चाक़ू निकालते हैं और रेत पर गोली से घायल चिंकारा की गर्दन चीर देते हैं. फिर हाथ साफ़ करते हैं. बाकी लोग खून के धब्बों पर रेत डाल देते हैं.’ 2006 में हुआ क्या कि लोअर कोर्ट ने इस गवाह के क्रॉस वेरिफिकेशन को वैल्यू दिए बिना सबूतों के बेस पर सलमान को सजा सुना दी. लेकिन हाई कोर्ट ने सलमान को बरी किया. क्योंकि गवाह उपस्थित नहीं था.

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