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जिस पूर्व सैनिक ने खुदकुशी की, दिल्ली पुलिस ने उसके बेटे को हिरासत में लिया

राहुल गांधी को परिवार से मिलने से रोका गया. मनीष सिसौदिया को पुलिस ने हिरासत में लिया.

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अविनाश जानू
2 नवंबर 2016 (Updated: 2 नवंबर 2016, 02:27 PM IST)
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OROP के मसले पर खुदकुशी करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन के परिवार से मिलने जा रहे अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. केजरीवाल को लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के बाहर से हिरासत में लिया गया है. इससे पहले दोपहर में राहुल गांधी भी रामकिशन के परिवार से मिलने गए थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया था. इससे पहले काफी दिनों से पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं. मंगलवार दोपहर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे एक पूर्व सैनिक ने खुदकुशी कर ली. सूबेदार रहे सैनिक का नाम है रामकिशन ग्रेवाल. रामकिशन के परिवार वालों का कहना है कि मंगलवार की दोपहर रामकिशन अपने साथियों से मिलने के लिए डिफेंस मिनिस्ट्री की ओर जा रहे थे. उन्होंने इसी बीच रास्ते में उन्होंने जवाहर भवन के पीछे जहर खा लिया. रामकिशन के बेटे ने बताया कि जिन मांगों को लेकर रामकिशन डिफेंस मिनिस्टर को जो चिट्ठी देने जा रहे थे, उसी चिट्ठी पर उन्होंने अपना सुसाइ़ड नोट भी लिखा है. उनके छोटे बेटे के मुताबिक इसके बारे में खुद रामकिशन ने ही घर वालों को फोन कर बताया. जहर खाने का पता चलते ही लोग उनको लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए. जहां इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई. सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है, 'मैं मेरे देश के लिए, मेरी मातृभूमि के लिए एवं मेरे देश के वीर जवानों के लिए अपने प्राणों के न्यौछावर कर रहा हूं.' रामकिशन के बेटे ने बताया, रामकिशन को घर से निकले 3 दिन हो गए. बोल रहे थे वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा उठाऊंगा. पूरी टीम के साथ यहां आए हुए थे. उन्होंने भावुकता में ये कदम उठा लिया और देश के लिए शहीद हो गए. उन्हें रक्षा मंत्री से मिलने नहीं दिया गया था. उन्होंने कहा कि मैं पूरी ज़िंदगी फ़ौज में रहा और मुझे फिर भी डिफेंस मिनिस्टर से मिलने नहीं दिया गया. सुसाइड नोट चिट्ठी पर ही लिखा गया है. चिट्ठी पर और साथी जवानों के सिग्नेचर भी हैं. ये है वो चिट्ठी, जिसपर रामकिशन ने अपना सुसाइड नोट लिखा है - ex service man letter केंद्र सरकार ने जिस रूप में 'वन रैंक, वन पेंशन' को मंजूरी देने का ऐलान किया है, पूर्व सैनिक उससे खुश नहीं है. इसे लेकर अब तक जंतर-मंतर पर धरना चल रहा है. बाद में राहुल गांधी और मनीष सिसौदिया उनके परिवार से मिलने के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे. जहां राहुल गांधी को पुलिस ने अस्पताल के बाहर ही रोका फिर भी न मानने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया. जहां से उन्हें मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया है. वहीं दिल्ली पुलिस ने मनीष सिसौदिया को पहले ही हिरासत में ले लिया है. वहीं दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वो भी पूर्व फौजी के परिवार से मिलने जाएंगे. रोके जाने पर राहुल गांधी ने कहा,
ये कैसा हिंदुस्तान बना रहे हैं हम. रामकिशन ने देश के लिए खुदकुशी की है. ये पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है. पुलिस की इसमें गलती नहीं है. पुलिस को ऊपर से ऑर्डर मिले हुए हैं.
चंद मिनट पहले रामकिशन के बेटे को भी हिरासत में ले लिया गया है. जिसके बाद कुमार विश्वास ने कई ट्वीट किए और मनीष सिसौदिया ने पुलिस की हिरासत में ही कई ट्वीट सरकार और पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए किए - https://twitter.com/DrKumarVishwas/status/793736471299493889 https://twitter.com/msisodia/status/793727518792486912 https://twitter.com/msisodia/status/793728716757045248 https://twitter.com/msisodia/status/793733156176134144 https://twitter.com/msisodia/status/793736492237545473 https://twitter.com/msisodia/status/793736586940657664 https://twitter.com/msisodia/status/793737614603882496 https://twitter.com/msisodia/status/793738715323437057

पढ़िए, इस आर्टिकल में गौरव सावंत ने समझाया था, वन रैंक वन पेंशन  का मामला कहां तक पहुंचा है -

‘#सन्देशटूसोल्जर्स’ इस सीजन का नया फ्लेवर है. और ये होना भी चाहिए. इससे पता चलता है हम अपने वर्दी वाले लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं. प्राइम मिनिस्टर मोदी ने देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए लिखने को कहा है और ये ठीक बात है. मैंने सियाचिन ग्लेशियर और लाइन ऑफ़ कंट्रोल से रिपोर्टिंग की है. ऐसी जगहें जहां एक घंटा भी खड़े रहना मुश्किल है, वहां खड़े होकर ये सैनिक पूरे साल हमारी रक्षा करते हैं. मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं, हर दीवाली उन्होंने सैनिकों के साथ मनाई है. कहा गया है कि वो सैनिकों से बहुत जुड़ाव महसूस करते हैं.
फिर भी ऐसा क्यों है कि सैनिक रक्षा मंत्रालय से अपने विकलांगता पेंशन की लड़ाई लड़ रहे हैं? क्यों ऐसा है कि वो समान वेतन के लिए लड़ रहे हैं? इस #सन्देशटूसोल्जर्स में कहां कम्युनिकेशन गैप है?  क्यों पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों से लड़ने के बावजूद उन्हें साउथ ब्लॉक की ब्यूरोक्रेसी से भी लड़ना पड़ रहा है? क्यों सर्विस हेडक्वार्टर और ब्यूरोक्रेसी समान वेतन पर भिड़े हुए हैं? नौकरशाहों और आर्मी, नेवी, एयर फ़ोर्स के सीनियर अधिकारियों की मीटिंग के बाद सिवाय रक्षा मंत्रालय से एक बयान जारी करने के, इस मसले पर कुछ भी नहीं हुआ है.
उड़ी हमले के बाद सेना के जवान काफी उत्साह में थे कि उन्हें पाकिस्तानी आतंकवादियों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए हरी झंडी मिली. मुझे बताया गया कि सेना के कमांडर काफी खुश थे कि जब एलओसी पर पीर पंजाल के उत्तर और दक्षिण में कई सर्जिकल स्ट्राइक्स का प्लान बना तब प्रधानमंत्री मोदी उस पर अपनी नज़र बनाए हुए थे. सूत्र बताते हैं कि हर बातचीत में वो इस बात पर जोर दे रहे थे कि अपने सैनिकों को नुकसान हुए बिना दूसरी तरफ ज्यादा नुकसान किया जाए. सरकार का कहना है कि डिफेंस के साथ कोई मतभेद नहीं हैं. रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा ‘समान सर्विस रैंक में कोई कटौती नहीं की गई है. 1991 में इस व्यवस्था को स्पष्ट किया गया था. जिसे 1992, 2000, 2004 और 2005 में दोहराया गया है.’ लेकिन रक्षा सेवाओं ने ब्यूरोक्रेसी पर पूरी सच्चाई न बताने का आरोप लगाया है.
इंडिया टुडे को कुछ ख़ास सूत्रों ने बताया- ‘सरकार इस मामले के लिए बैठाई गई मंत्रियों की एक कमिटी  के आदेशों पर कुछ क्यों नहीं बोल रही? इस कमिटी की अगुवाई प्रणव मुखर्जी ने की थी. इस कमिटी ने जनवरी 2009 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट ने समान वेतन के मुद्दे का बड़ी बारीकी से अध्ययन किया था. कमिटी ने कहा सेना का लेफ्टिनेंट कर्नल (आईएएफ का विंग कमांडर और नेवी का कमांडर) भारत सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी से सीनियर होगा. तब भारत सरकार में डायरेक्टर कर्नल(आर्मी), ग्रुप कैप्टन(एयरफोर्स) और कैप्टन(नेवी) के बराबर होता था. इससे 2009 में इसका समाधान हो गया था.’मीडिया से आधिकारिक रूप से बात न करने की शर्त के बावजूद, एक अधिकारी ने मुझे बताया कि सरकार ने मंत्री कमिटी की रिपोर्ट पर चुप्पी साध रखी है.
सर्विस हेडक्वार्टर अभी इस बारे में स्पष्ट नहीं है कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को 2009 तक के इन पहलुओं की जानकारी है या नहीं. या उन्हें 2005 तक की ही अधूरी जानकारी दी गयी. ब्यूरोक्रेसी पर शक है कि वो सरकार को इन पुराने पहलुओं पर भटका रही है. हालांकि पर्रिकर ने पूरे पहलुओं पर जांच का वादा किया है. सेनाओं और उससे जुड़े अनुभवी लोगों को न्याय का इंतज़ार है. छठवें वित्त आयोग ने लेफ्टिनेंट कर्नल को जॉइंट डायरेक्टर के बराबर और कर्नल को डायरेक्टर के बराबर कर दिया. मंत्री कमिटी ने 2009 में कहा था कि लेफ्टिनेंट कर्नल जॉइंट डायरेक्टर से सीनियर होगा. एक अधिकारी जो इस आदेश से प्रभावित हुए उन्होंने कहा ‘2016 के आदेश में क्यों जॉइंट डायरेक्टर को कर्नल के और डायरेक्टर को ब्रिगेडियर के बराबर कर दिया गया.’
‘विकलांगता पेंशन से लेकर वन रैंक वन पेंशन तक सरकार के फैसलों और आदेशों में अंतर है. हमें लगता है सरकार को विकलांग सैनिकों के बारे में रक्षा अकाउंट से गलत आंकड़े दिये गये हैं. गलत आंकड़ों से गलत फैसले हुए. लेकिन हमें न्याय की पूरी उम्मीद है.’ सूत्रों ने आगे बताया.
सर्विस हेडक्वार्टर रक्षा मंत्रालय से खुश नहीं है. उसने कहा कि जिन 2003, 2005 और 2008 के आदेशों का सरकारी प्रवक्ता ने ज़िक्र किया वो आदेश 2009 के मंत्री कमिटी के निर्णय को निरस्त नहीं कर सकते. हालांकि सर्विस हेडक्वार्टर ने पर्रिकर से अपना पक्ष रखने का समय मांगा है लेकिन कुछ सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि कई अधिकारी कोर्ट तक जाने की तैयारी कर रहे हैं.
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