आपको लगता है कि गूगल को सब पता है. दुनिया में जो ऊपरवाले से न मिले वो गूगल परढूंढ़ने से मिल जाता है. मगर खुद गूगल का कहना है कि वो इंटरनेट के एक प्रतिशतहिस्से को ही सर्च कर पाता है. बाकी के 99 प्रतिशत में कई चीज़े हैं जो आम इंटरनेटकी पहुंच से दूर है. इसी में से एक है बिट कॉइन.-------------------------------------------------------------------------------- आखिर है क्या बिट कॉइनबिट कॉइन एक डी सेंट्रलाइज़ क्रिप्टोग्राफिक डिजिटल करेंसी है. इसका सबसे ज़्यादाइस्तेमाल दुनिया भर में एक देश से दूसरे देश में पैसा भेजने में होता है. इस परकिसी भी सरकार या बैंक का नियंत्रण नहीं है तो इसके ट्रांजैक्शन बहुत ही सस्ते हैं.एक बिट कॉइन लेन-देन में लगभग 2 रुपए की फीस देनी पड़ती है वहीं एक सामान्य बैंकखाते के ट्रांसफर में 5 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है.कैसे बना और ज़रूरत क्या हैबिट कॉइन की शुरुआत 'सतोषी अकीमोतो ने की थी. ये सतोषी अकीमोतो कौन हैं ठीक-ठीक कोईनहीं जानता, मगर 2010 में उन्होंने बिट कॉइन की शुरुआत ये दिखाने के लिए की थी किबिना पारंपरिक करेंसी के भी लेन देन किया जा सकता है. इस डी सेंट्रलाइज़्ड सिस्टमको बनाने का उद्देश्य आपके पैसे पर सरकारी दखल को रोकना था. मतलब आपके बैंक में जमापैसे को सरकार किसी और को लोन न दे पाए और वो इसे लेकर भाग न जाए इसकी पूरी गारंटी.कोई क्यों खरीदे बिट कॉइनदुनिया में माइक्रो सॉफ्ट जैसी कंपनियां बिट कॉइन में पेमेंट ले रही हैं. गूगल भीइसमें इनवेस्ट कर रहा है. जब इसकी शुरुआत हुई थी तो 1,000 बिट कॉइन में एक पित्ज़ाखरीदा गया था आज एक बिट कॉइन लगभग 45 हज़ार रुपए का है जिसके बारे में कुछ संस्थाओंका अनुमान है कि ये 2018 तक लगभग 6 लाख रुपए का हो जाएगा.बिट कॉइन का र्ई-वॉलेटइसकी कीमत के पीछे डिमांड और सप्लाई का बेसिक नियम काम कर रहा है. बिट कॉइन डिजिटलकरेंसी ज़रूर है मगर उसकी माइनिंग करनी पड़ती है. ठीक वैसे ही जैसे सोने की होतीहै. दुनिया भर में अलग-अलग जगह पर माइनिंग ब्लॉक्स लगाए जाते हैं. दुनिया केअलग-अलग हिस्सों में फैले शौकिया हैकर्स इन माइंस को चलाते हैं.एक माइनिंग ब्लॉक में बड़े-बड़े सर्वर वाली ऐसी मशीने लगी होती हैं जो आपने शायदहॉलीवुड फिल्मों में ही देखी हों. ये माइनर्स दुनिया भर में हो रहे बिट कॉइन के लेनदेन का किसी क्लर्क की तरह हिसाब रखते हैं और इसके बदले में इन्हें बिट कॉइन दियेजाते हैं.बिट कॉइन माइनिंग फार्मबिट कॉइन की इस माइन से हर 4 साल में निकलने वाले बिट कॉइन की गिनती आधी रह जाती हैऔर 125 साल बाद दुनिया में बिट कॉइन बनना बंद हो जाएंगे. मतलब मांग बढ़ती जा रही हैऔर सप्लाई खत्म होती जा रही है. कल अगर दुनिया को 500 बिट कॉइन चाहिए होंगे तो मिल250 ही रहे होंगे. और जब 1000 की मांग होगी तो 125 ही मिलेंगे.शुरू से अब तक बिट कॉइन की कीमतफायदे क्या हैबिट कॉइन के बड़े फायदे हैं. एक जगह से दूसरी जगह भेजना बहुत आसान है. वहीं सरकारऔर बैंकों के टैक्स के झंझट से मुक्ति रहती है. ऊपर से बिट कॉइन के खोने का डर भीनहीं है. बिट कॉइन से हुए लेनदेन का हिसाब भी किसी को देना नहीं पड़ता. (वैसे आपकोअपने अकाउंट को हैकर्स से बचाने और पासवर्ड को याद रखने जैसी सावधानियां रखनी पड़तीहैं)बिट कॉइन का पर्सनुकसान और खतरेबिट कॉइन के फायदे ही उसके नुकसान हैं. एक वेब ब्राउज़र होता है टॉर. टॉर में याटॉर को सपोर्ट करने वाले ब्राउज़र में वो वेबसाइट्स खोली जा सकती हैं जिन्हेंसरकारों ने आपके देश में प्रतिबंधित कर रखा है या सामान्य रूप से आप अपने ब्राउज़रपर जिन्हें नहीं खोल सकते हैं. इसके अलावा इस्तेमाल करने वाले की लोकेशन औरहिस्ट्री का भी पता नहीं चलता है. इसी टॉर का इस्तेमाल आप डार्क वेब खोलने के लिएकर सकते हैं. डार्क वेब की वेबसाइट .COM की जगह .onion जैसे एक्सटेशन वाली होतीहैं. इनमें सिल्करोड नाम की वेबसाइट से सबसे प्रसिद्ध है. सिल्करोड जैसी वेबसाइट्सपर दुनिया भर के ड्रग्स, चाइल्ड सेक्स खरीद जाता है. फ्लेश ट्रेडिंग (ऊंचे स्तर परदेह व्यापार) होता है. इससे किसी भी देश में हथियार डिलीवर करवा दिए जाते हैं औरइसकी ट्रैकिंग ‘लगभग’ असंभव है. इस पूरी खरीदारी में सबसे ज़्यादा लेनदेन बिट कॉइनसे होता है. इसी वजह से दुनिया भर की सरकारें बिटकॉइन को कानूनी मान्यता देने मेंएक मत नहीं हैं.सिल्करोड 2.0वैसे आपको एक बात और बता दें कि जहां सिल्करोड 2.0 (फिलहाल सिल्करोड 3.0 ) कोअमेरिका ने 2014 में बंद करवा दिया था और वो टॉर को भी शक की निगाहों से देखती है.इसकी शुरुआत भी अमेरिका ने ही की थी.हिंदुस्तान में बिट कॉइनरघुराम राजन ने अपने कार्यकाल में स्पष्ट किया था कि बिट कॉइन को भारत सरकार औररिजर्व बैंक करेंसी नहीं मानता है मगर इसका इस्तेमाल गैर कानूनी नहीं है. पिछले सालसरकारी एजेंसियों ने ड्रग व्यापार में इस्तेमाल के चलते 500 बिट कॉइन (तब कीमत 2.5करोड़) फ्रीज़ किए थे. इसके अलावा बिट कॉइन से जुड़ी ठगी, चिट फंड और हैकिंग जैसीघटनाएं भी हुई हैं.लास वेगास कसीनो में बिट कॉइन एटीएमनिचोड़ ये है कि बिट कॉइन सैद्धांतिक रूप से मुद्रा की एक बिल्कुल नई व्यवस्था है औरइसके काम करने के ढंग और इसके भविष्य के बारे में कई सारी बातें अभी भी साफ नहींहैं. एक तरफ तो ये कैशलेस और ग्लोबल फ्री इकॉनमी को बढ़ावा देती है साथ ही आतंकवादऔर ड्रग्स के कारोबार में भी इसका बड़ा इस्तेमाल होता है. तो इसके बारे में कोई एकराय देना सही नहीं होगा. मगर एक आम इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले का इससे दूर रहना हीफायदेमंद है.