किसी बड़े इवेंट में पार्टी में डीजे वाले बाबू जमकर गाने बजाते हैं. लोग जमकर झूमतेहैं, लेकिन अब कोई भी गाना बजाना इवेंट वालों की जेब पर भारी पड़ेगा. इन गानों काकॉपीराइट होता है और दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि इन गानों को बजाने पर इवेंटवालों को गाने की रॉयल्टी देनी होगी. अगर कोई इवेंट कर रहा है और उसे गाने बजानेहैं, तो उसे पहले कॉपीराइट सोसायटी को सूचना देनी होगी, जो रॉयल्टी के पेमेंट केलिए कागज़ वगैरह बनाएगी. इन सोसायटी को कॉपीराइट का प्रूफ भी साथ में लगाना होगा. येबात एक फर्म और तीन सोसायटी के झगड़े में हाई कोर्ट ने कही. किसी इवेंट से पहले इनतीन सोसायटी को गानों के बारे में बताना होगा. ये सोसायटी हैं इंडियन परफॉर्मिंगराईट सोसायटी (IPRS), फ़ोनोग्राफ़िक परफॉरमेंस लिमिटेड (PPL) और नोवेक्स कम्युनिकेशनप्राइवेट लिमिटेड. इनमें से एक रॉयल्टी के क्लेम करेगी और अपने कॉपीराइट के प्रूफदिखाएगी. ये सोसायटी असल में कॉपीराइट होल्डर्स की एजेंट हैं. इवेंट ऑर्गेनाइजकरवाने वालों को पहले रॉयल्टी देनी होगी. जस्टिस नजमी वज़ीरी ने इन सोसायटी को अपनेकॉपीराइट गानों की लिस्ट अपनी वेबसाइट में लगाने का ऑर्डर भी दिया. ये ऑर्डर तब आयाहै जब इन सोसायटी ने दावा किया था कि इन गानों के कॉपीराइट रखने वालों के हमआधिकारिक एजेंट हैं. उन्होंने कॉपीराइट एक्ट के सेक्शन 18 (Assignment ofcopyright) और सेक्शन 30 (licences by owners of copyright) के साफ़ तौर पर उल्लंघनकी बात की थी. कोर्ट इन तीन सोसायटी की तरफ से डाली गई एक याचिका की सुनवाई कर रहीथी. ये याचिका 23 दिसंबर के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी जिसमें कोर्ट ने इनसोसायटी को सेक्शन 33 के तहत लाइसेंस देने से मना कर दिया था. ये फैसला Event andEntertainment Association (EEMA) की याचिका पर आया था. EEMA ने कहा था कि IPRS औरPPL सोसायटी का रजिस्ट्रेशन 2013 में ख़त्म हो गया था, जबकि नोवेक्स सोसायटी कभीरजिस्टर ही नहीं हुई थी. कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को करेगी. अब देखनाये है कि कितने इवेंट से पहले गानों के कॉपीराइट का ख्याल रखा जाता है और कितनों तकरॉयल्टी पहुंचती है?--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.