15 देशों के प्रतिनिधि जम्मू-कश्मीर पहुंचे हैं, लेकिन यूरोपियन यूनियन पीछे क्यों हट गया?
यूरोपीय संघ में 28 देश आते हैं.
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बायीं तरफ यूरोपियन यूनियन का मैप ज्सिमें आपको उसमें शामिल देश दिख रहे हैं. दायीं तरफ जम्मू-कश्मीर की एक सांकेतिक तस्वीर (तस्वीर: विकिमीडिया/PTI)
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15 देशों के प्रतिनिधि कश्मीर आए हुए हैं. इनमें USA, वियतनाम, नॉर्वे, बांग्लादेश और पेरू के साथ दूसरे 10 देश भी शामिल हैं. इनके साथ यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधियों के आने की भी बात हुई थी. लेकिन वो इस समूह में शामिल नहीं होंगे.
ये प्रतिनिधि कश्मीर क्यों आए हैं?
5 अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के तहत लगा हुआ स्पेशल स्टेटस हटा दिया गया था. इसके बाद से वहां पर इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. ये प्रतिनिधि वहां के हालात बेहतर तरीके से समझने के लिए आए हैं. इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कुछ देशों ने रिक्वेस्ट की थी कि उन्हें कश्मीर के हालात को अपनी नज़र से देखना है. भारत सरकार ने इन प्रतिनिधियों का स्वागत किया है. इसे एक डिप्लोमैटिक कदम कहा जा रहा है भारत सरकार का. क्योंकि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं. उन अफवाहों के खिलाफ भारत अपनी पोज़िशन मजबूत करना चाहता है अंतरराष्ट्रीय प्लैटफॉर्म पर.
कश्मीर घाटी में पिछले 154 दिनों से इंटरनेट सेवा बंद है. इसको लेकर लगातार मांग की जा रही है कि उन्हें दुबारा बहाल किया जाए. ये भी एक मेजर कंसर्न है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर. कई पब्लिकेशन इस पर स्टोरी कर चुके हैं कि किस तरह इस इंटरनेट बंदी से वहां की ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त हो गई है. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)
यूरोपियन यूनियन क्यों नहीं शामिल हुआ?
इन प्रतिनिधियों के साथ यूरोपियन यूनियन के कुछ देशों के प्रतिनिधि भी आने वाले थे, ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं. लेकिन उन्होंने इस ट्रिप से खुद को अलग कर लिया. वजह बताई जा रही है कि सरकार यूरोपियन यूनियन के कुछ ही सदस्य देशों को बुलाना चाह रही थी. लेकिन वो सभी एक साथ आना चाहते थे. जोकि संभव नहीं था. इससे पूरा डेलिगेशन काफी बड़ा हो जाता. बता दें कि यूरोपियन यूनियन में 28 देश हैं. कहा जा रहा है कि उन्होंने नज़रबंद लीडरों से मिलने की दरख्वास्त भी की थी. ये प्रतिनिधि फ़ारुख अब्दुला, उमर अब्दुल्ला, और महबूबा मुफ़्ती से मिलना चाहते थे. अब यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधि किसी दूसरी तारीख पर कश्मीर का दौरा करेंगे.
गुरुवार, 9 जनवरी को दिल्ली से ये प्रतिनिधि श्रीनगर पहुंचे. यहां इनको सुरक्षा इंतजाम दिखाए गए. सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों से इनकी मुलाक़ात कराई गई. सिविल सोसाइटी के लोगों से मिलाया गया. इसके बाद उन्हें जम्मू ले जाया जाएगा. जहां वो लेफ्टिनेंट गवर्नर गिरीश चंद्र मुर्मू से मिलेंगे और फिर दिल्ली वापस लौट जाएंगे. मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल एफेयर्स यानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस करके इस बाबत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस विजिट से जुड़ी पूरी जानकारी कल दी जाएगी जब इन प्रतिनिधियों का टूर पूरा हो जाएगा.
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ये प्रतिनिधि कश्मीर क्यों आए हैं?
5 अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के तहत लगा हुआ स्पेशल स्टेटस हटा दिया गया था. इसके बाद से वहां पर इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. ये प्रतिनिधि वहां के हालात बेहतर तरीके से समझने के लिए आए हैं. इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कुछ देशों ने रिक्वेस्ट की थी कि उन्हें कश्मीर के हालात को अपनी नज़र से देखना है. भारत सरकार ने इन प्रतिनिधियों का स्वागत किया है. इसे एक डिप्लोमैटिक कदम कहा जा रहा है भारत सरकार का. क्योंकि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं. उन अफवाहों के खिलाफ भारत अपनी पोज़िशन मजबूत करना चाहता है अंतरराष्ट्रीय प्लैटफॉर्म पर.
कश्मीर घाटी में पिछले 154 दिनों से इंटरनेट सेवा बंद है. इसको लेकर लगातार मांग की जा रही है कि उन्हें दुबारा बहाल किया जाए. ये भी एक मेजर कंसर्न है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर. कई पब्लिकेशन इस पर स्टोरी कर चुके हैं कि किस तरह इस इंटरनेट बंदी से वहां की ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त हो गई है. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)यूरोपियन यूनियन क्यों नहीं शामिल हुआ?
इन प्रतिनिधियों के साथ यूरोपियन यूनियन के कुछ देशों के प्रतिनिधि भी आने वाले थे, ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं. लेकिन उन्होंने इस ट्रिप से खुद को अलग कर लिया. वजह बताई जा रही है कि सरकार यूरोपियन यूनियन के कुछ ही सदस्य देशों को बुलाना चाह रही थी. लेकिन वो सभी एक साथ आना चाहते थे. जोकि संभव नहीं था. इससे पूरा डेलिगेशन काफी बड़ा हो जाता. बता दें कि यूरोपियन यूनियन में 28 देश हैं. कहा जा रहा है कि उन्होंने नज़रबंद लीडरों से मिलने की दरख्वास्त भी की थी. ये प्रतिनिधि फ़ारुख अब्दुला, उमर अब्दुल्ला, और महबूबा मुफ़्ती से मिलना चाहते थे. अब यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधि किसी दूसरी तारीख पर कश्मीर का दौरा करेंगे.
गुरुवार, 9 जनवरी को दिल्ली से ये प्रतिनिधि श्रीनगर पहुंचे. यहां इनको सुरक्षा इंतजाम दिखाए गए. सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों से इनकी मुलाक़ात कराई गई. सिविल सोसाइटी के लोगों से मिलाया गया. इसके बाद उन्हें जम्मू ले जाया जाएगा. जहां वो लेफ्टिनेंट गवर्नर गिरीश चंद्र मुर्मू से मिलेंगे और फिर दिल्ली वापस लौट जाएंगे. मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल एफेयर्स यानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस करके इस बाबत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस विजिट से जुड़ी पूरी जानकारी कल दी जाएगी जब इन प्रतिनिधियों का टूर पूरा हो जाएगा.
उन्होंने ये भी जानकारी दी कि ये दल सिविल सोसाइटी के लोगों से तो मिला ही, साथ ही साथ कुछ राजनेताओं से भी मिला. इनके नाम अभी पब्लिक नहीं किए जाएंगे.MEA: There first meeting was with security officials to get a sense of security situation in J&K, and also threat posed by terrorism in maintaining peace. Objective of visit was the envoys to see first hand the efforts which have been made by govt's to normalise situation https://t.co/pLsGELndeY
— ANI (@ANI) January 9, 2020
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