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मदरसे पर मौलवी साहब का कब्जा, कब्रिस्तान में पढ़ रहे बच्चे

मस्जिद के हेड साहब का कहना है, अगर बच्चे मस्जिद में घुसे तो मस्जिद नापाक हो जाएगी.

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28 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 28 जुलाई 2016, 12:51 PM IST)
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धर्म का मकसद जब तक इंसानियत की भलाई हो. इंसान की प्रगति हो तब तक तो बहुत अच्छा है. पर जब ये बांटने में लग जाए या इंसान की तरक्की में रोड़ा बन जाए तो ऐसे धर्म का इंसान क्या करेगा? ये बात है राजस्थान के धौलपुर जिले की. इस जिले में एक कब्रिस्तान है. जिसके बीच में है मस्जिद. मस्जिद में ही मदरसा भी है. यहां मदरसा 13 साल से चल रहा है. 6 से 14 की साल के करीब 30 बच्चे मदरसे में बच्चे रोज पढ़ने जाते हैं. पर अब बच्चों को वहां पढ़ने नहीं दिया जा रहा है. कारण हैं मस्जिद प्रमुख. क्योंकि उनका कहना है -
इबादतगाह में बच्चों को घुसने देना, मस्जिद को नापाक करना होगा.
तो अब बच्चे मजबूरी में कब्रिस्तान में बोर्ड लगाकर वहीं बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. बच्चे कब्रिस्तान में भी चप्पलें उतारकर घुसते हैं. यहीं के एक गांव वाले ने बताया,
'बच्चों को कब्रिस्तान में तेज आवाज में बोलकर पढ़ने तक नहीं दिया जाता. इलाके के कुछ बेहद धार्मिक और दबंग लोग तो चाहते हैं कि बच्चों का कब्रिस्तान में जाना भी बंद हो जाए.'
इलाके के ही एक और आदमी ने बताया कि राज्य सरकार ने इस मदरसे को दूसरी जगह शिफ्ट करने का भी प्रस्ताव रखा है. पर लोगों को डर है कि अगर मदरसा शिफ्ट हुआ तो बच्चे कम हो जायेंगे. मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी भी इसके खिलाफ ही हैं. उनका कहना है -
अभी जब कोई आस-पार मर जाता है और उसे दफनाया जाना होता है तो उस दिन कब्रिस्तान में लगने वाली क्लास की छुट्टी करनी पड़ती है. वैसे ही किसी तरह बच्चों को मिड-डे मील का लालच देकर बुलाया जाता है. ये सारे स्टूडेंट्स बड़े गरीब परिवारों से आते हैं. ये जगह मदरसा बोर्ड के अंडर में आता है. इसलिए इसको स्टेट से छूट भी मिलती है. इसका रजिस्ट्रेशन राजस्थान वक्फ बोर्ड में भी हुआ है.

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