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पाकिस्तान का बड़ा 'आतंकी' एक्स पर मार दिया गया, सुनकर लोग झूमने लगे, पता है फिर क्या निकला?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बीते दिनों एक ट्वीट कर दावा किया गया कि आतंकवादी हाफिज सईद के बेटे को अगवा कर लिया गया. और फिर उसका मर्डर हो गया. बाद में पता चला पाकिस्तान में आखिर मरा कौन था?

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5 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 5 अक्तूबर 2023, 03:04 PM IST)
elon musk x verified policy led to hafiz saeed alleged son killed viral
एलन मस्क के 'X' पर अब क्या नया बवाल हो गया है! (तस्वीर/Reuters, तस्वीर/फाइल फोटो)
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एलन मस्क (Elon Musk) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर आए दिन कुछ न कुछ हलचल मची रहती है. कभी किसी ट्वीट से बवाल खड़ा होता है तो कभी प्लेटफॉर्म अपने नित नए अपडेट्स के कारण चर्चा में रहता है. मस्क ने कुछ महीने पहले ‘ब्लू टिक’ देने के नियम में बड़ा बदलाव किया और उसके बाद दुनिया का कोई भी यूजर चंद पैसे देकर ‘वेरिफाइड’ यूजर का दर्जा पा सकता है. लेकिन अब इससे एक अलग समस्या खड़ी हो गई है. हुआ क्या कि बीते दिनों ‘X’ पर ट्वीट की एक थ्रेड वायरल हो गई. इन पोस्ट में दावा किया गया कि आतंकी हाफिज़ सईद के कथित बेटे को अगवा करके उसकी हत्या कर दी गई और लश्कर ए तैयबा (LeT) के को-फाउंडर को कराची में गोलियों से भून दिया गया.

इसे एक वेरिफाइड यूजर के अकाउंट से ट्वीट किया गया था. एक ग्लोबल आतंकवादी से जुड़ी जानकारी को हासिल करने में आने वाली चुनौतियों और सरकार के तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिलने के कारण इस तरह की ‘खबरों’ को तगड़ा एंगेजमेंट मिला. बाद में इस ‘जानकारी’ को भारत के कई मेनस्ट्रीम मीडिया हाउस ने प्रमुखता से छाप भी दिया.

क्या ये दावा प्रपंच था

इंडिया टुडे के अरविंद ओझा और अंकित कुमार ने इस विषय पर एक रिपोर्ट पब्लिश की है. रिपोर्ट के अनुसार, इंटेलिजेंस से जुड़े सूत्रों ने इन दावों को लेकर दो महत्वपूर्ण बातें बताई हैं. बताया यह कि, इनमें से कई दावे या तो तथ्यात्मक रूप से गलत हैं या फिर एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तगड़ा एंगजेमेंट पाने के मकसद से ‘सूचनाओं’ को जानबूझकर तोड़ मरोड़ कर पोस्ट किया गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि ‘X’ की तरफ से यूजर्स को वायरल पोस्ट करने पर पैसे मिलने लगे हैं, भले यूजर्स ने जानबूझकर गलत तथ्यों को सामने रखा हो.  ख़ुफ़िया सूत्रों ने ऐसे भ्रामक दावों की क्रेडिबिलिटी और उनके भयंकर रूप से वायरल होने को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.

हाफिज़ के बेटे की कहानी, एक कोरी कल्पना!

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर 28 सितंबर को एक ट्वीट किया गया. ट्वीट करने वाले एक कथित भारतीय यूजर ने दावा किया कि उसे पाकिस्तान से किसी सोर्स के हवाले से पता चला है कि हाफिज सईद के ‘बेटे’ को अगवा कर लिया गया है. इस पोस्ट के शेयर होते ही इसपर धुंआधार लाइक्स और रीट्वीट्स होने लगे. और इस पोस्ट के वायरल होते ही इसी तरह के कई गुमनाम हैंडल ने भी कहानी को बढ़ाचढ़ाकर शेयर करना शुरू कर दिया.

अब यहां गौर करने वाली बात है कि हाफिज सईद जिसे संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल आतंकी घोषित किया हुआ है, जिसको लेकर कई सारे डोजियर और खूफिया जानकारी मौजूद हैं, उसमें कहीं भी सईद के कथित बेटे ‘हाफिज़ कमलुद्दीन सईद’ का जिक्र नहीं है. हाफिज सईद से जुड़ा एकमात्र बेटा हाफिज तलहा सईद है, जिसे सरकार ने यूएपीए के तहत ‘आतंकवादी’ घोषित कर रखा है.

‘X’ पर संदिग्ध अकाउंट से पोस्ट करने वालों ने हाफिज के पिता कमल-उद-दीन का नाम इस्तेमाल करके उसके कथित बेटे की एक नई पहचान गढ़ी और उसके लापता होने और उसकी हत्या की पूरी मनगढ़ंत कहानी को तोड़ मरोड़कर पोस्ट किया.  

कराची में हुई हत्या, दावा- मोस्ट वांटेंड आतंकी मारा गया

हाफिज़ सईद के कथित बेटे को लेकर किए गए पोस्ट पर मिली सफलता के बाद इन गुमनाम अकाउंट ने कराची में हुई एक घटना का फायदा उठाकर पूरी तरह से एक अलग कहानी गढ़ने का प्रयास किया. हुआ क्या कि वहां की लोकल मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम से संबंध रखने वाले मुफ्ती कैसर फारूक़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. 30 साल के फारूक़ को सोहराब में एधी सेंटर के पास गुलशन-ए-उमर -मस्जिद के बाहर अज्ञात व्यक्तियों ने गोली मार दी.

स्थानीय मीडिया ने फजल की हत्या वाली अपनी रिपोर्ट में इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी पब्लिश किया था. ‘X’ पर मौजूद इन वेरिफाइड हैंडल्स ने उन सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल करके यह दावा किया कि फारूक़  लश्कर-ए-तैयबा का वांटेड सदस्य था और कुछ यूजर्स ने तो उसे आतंकवादी संगठन का को-फाउंडर भी बता दिया था.

लेकिन यहां गौर करने वाली बात है कि फारूक का नाम सरकार की मोस्ट वांटेंड आतंकियों की आधिकारिक लिस्ट में नहीं है. फारूक का जिक्र भारतीय एजेंसियों की देखरेख में तैयार होने वाली इंटरपोल रेड कॉर्नर वारंट लिस्ट में भी नहीं है.

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बता दें, Let की स्थापना हाफिज सईद ने साल 1986 में मरकज दावा-वल-इरशाद (एमडीआई) के रूप में की थी, जिसका नाम बाद में बदलकर जमात-उद-दावा (जेयूडी) कर दिया गया था.

इस संगठन ने 90 के दशक में कश्मीर में अपने चरमपंथी अभियानों के लिए खुद को एक अलग पहचान देने का प्रयास किया था. अगर आधिकारिक रिकॉर्ड और फारूक की उम्र को देखें तो वो न ही 'मोस्ट वांटेड' हो सकता था और न ही लश्कर का को-फाउंडर.

इसके अलावा, लश्कर-ए-तैयबा के को-फाउंडर जफाक इकबाल, अब्दुल रहमान मक्की, शेख अब्दुल्ला आजम और अमीर हमजा आदि को लेकर डॉक्यूमेंटेड जानकारियां मौजूद हैं.

‘X’ पर दुष्प्रचार फैलाने वालों पर कोई लगाम नहीं

यूरोपीयन कमीशन की एक हालिया रिपोर्ट आई है. इसमें तीन देशों में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कॉटेंट की एक स्टडी की गई है. इसमें यह निष्कर्ष निकला कि छह प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ‘X’ पर सबसे ज्यादा भ्रामक खबरें फैलती हैं.

X के रेवन्यू को लेकर जारी की गई नई पॉलिसी शुरू होने के बाद से यूजर्स को भ्रामक पोस्ट पर शिकायत (रिपोर्ट) करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म पर भ्रामक खबरों को फैलने से रोकने का तरीका ढ़ूढ़े बिना अधिक से अधिक पोस्ट शेयर करने को खुलेआम प्रोत्साहित किया है.

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(ये एक्सक्लूसिव स्टोरी इंडिया टुडे के वरिष्ठ रिपोर्टर अरविंद ओझा और अंकित कुमार की है.)

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