हिमाचल प्रदेश में चुनाव की डेट आ गई है, मगर सबकी गरारी गुजरात विधानसभा चुनाव परअटकी हुई है. अटके भी काहे ना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर का मामला है. चुनावआयोग ने जब हिमाचल चुनाव की डेट जारी की, तब से ही हाय तौबा मची थी कि गुजरात कीडेट काहे नहीं बताई. खैर 25 अक्टूबर के शुभ दिन चुनाव आयोग ने गुजरात चुनाव कीतारीखों की घोषणा कर दी है. 182 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होगा. पहले चरण कीवोटिंग 9 दिसंबर को 89 सीटों के लिए होगी. दूसरे चरण के लिए 14 दिसंबर को वोटिंग 93सीटों पर होगी. 18 दिसंबर को काउंटिंग होगी यानी पता चल जाएगा किसकी सरकारबनी. गुजरात में आचार संहिता 25 अक्टूबर से ही लागू हो गई है. ये केंद्र सरकार परभी लागू होगी यानी केंद्र गुजरात के लिए कोई नई घोषणा नहीं कर सकेगा.ये बातें भी बताईं इलेक्शन कमीशन ने- गुजरात में 4 करोड़ 30 लाख वोटर- 50,128 पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे, सभी में सीसीटीवी कैमरा रहेंगे- सभी बूथों पर वीवीपैट(VVPAT) मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा- गुजराती भाषा में भी वोटिंग गाइड मिलेगी- 102 बूथ पर महिला पोलिंग स्टाफ- हर उम्मीदवार के लिए खर्च की सीमा 28 लाख रुपये होगी, इसके लिए अलग खाता खुलवानाहोगा- राज्य में शराब ना आ पाए, इसके लिए बॉर्डर एरिया के चेक पोस्ट्स पर सीसीटीवीकैमरे लगाए जाएंगे- टीवी, सिनेमा हॉल, एफएम आदि पर विज्ञापनों पर चुनाव आयोग नजर रखेगा- लोगों की शिकायत सुनने के लिए चुनाव आयोग एक खास मोबाइल ऐप लॉन्च करेगागुजरात विधानसभा की मौजूदा स्थितिबीजेपी - 115कांग्रेस - 61अन्य - 6आंदोलनों ने गुजरात का खेला कॉम्पलिकेटेड बना दिया हैपिछले तीन सालों में गुजरात ने दो बड़े जातिगत आंदोलन देखे हैं. पटेल आरक्षण के लिएहुए पटेल अनामत आंदोलन और ऊना में दलितों के पीटे जाने के बाद हुआ दलित आंदोलन. इसदोनों आंदोलनों ने दो युवा चेहरे दिए हैं, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी. हार्दिककी राहुल गांधी और राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत से बातचीत होने की चर्चा है.वो राहुल के गुजरात दौरे का स्वागत भी कर चुके हैं. जिग्नेश का सुर भी बीजेपी सरकारके खिलाफ ही है. एक और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर हैं जो कांग्रेस का दामन थाम चुकेहैं. गुजरात के बारे में कहा जाता है कि 2002 के बाद यहां धर्म के आधार परध्रुवीकरण होता आया है. ऐसे में जातिगत ध्रुवीकरण अगर होता है तो यह बात सत्ताधारीपार्टी के खिलाफ जा सकती है.पाटीदारों के आरक्षण के लिए हार्दिक पटेल पिछले दो साल से आंदोलन चला रहे हैं.कांग्रेस काडर का मनोबल भी ऊंचा दिख रहा है गुजरात में बीजेपी के पास मोदी जैसा कोई करिश्माई चेहरा अब नहीं है. 2014 के बादपार्टी दो दफा मुख्यमंत्री बदल चुकी है. जिस तरीके से सोशल मीडिया पर आनंदीबेन पटेलका 'इस्तीफ़ा' हुआ, वो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में चल रही तनातनी की भनक देताहै. अहमद पटेल जिस तरह एक "टेक्निकल रीज़न" के चलते अपनी राजसभा सदस्यता बचा ले गए,उसने कांग्रेस काडर का मनोबल कुछ ऊंचा किया था. साथ ही शंकर सिंह वाघेला के पार्टीछोड़ने के बाद कांग्रेस के भीतर उस खेमेबंदी का खत्मा हुआ है, जिससे वो लंबे समय सेजूझ रही थी. राजनीतिक लिहाज़ से राहुल गांधी के हालिया दौरे भी सफल कहे जा सकतेहैं.राहुल गांधी इन दिनों गुजरात में लगातार सभाएं कर रहे हैं (फोटोःएपी)बीजेपी के लिए राहुल गांधी गुजरात में परेशानी का सबब बने हुए हैं. इसे इस बात सेसमझा जा सकता है कि राहुल के गुजरात दौरे के दौरान अमित शाह स्मृति ईरानी के साथअमेठी में जनसभा कर रहे थे. इसके अलावा 1995 से सूबे में बीजेपी की सरकार है. ऐसेमें बीजेपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर माने एंटी इनकंबेंसी वाला मामला भी बन सकताहै.दिलचस्प होने जा रहे हैं गुजरात चुनावहमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मोदी भले ही गुजरात की राजनीति में ना हों, लेकिनगुजरात उनकी राजनीति में है. वो मुख्यमंत्री रहते हुए विभिन्न मंचों से 'मेरे छहकरोड़ गुजराती भाई-बहन' कहते हुए सुने जा सकते थे. गुजराती अस्मिता के नाम पर बीजेपीकांग्रेस की सभी रणनीतियों पर पानी फेरने में सक्षम रही है. मोदी भले ही केंद्र कीराजनीति में आ गए हों, लेकिन सूबे में उनके प्रति दीवानगी को कम करके आंकना गलतीहोगी. पीएम मोदी ने अपने हालिया दौरे में भी अपना गुजरात प्रेम जाहिर किया.कांग्रेस को गुजरात का दुश्मन बताया था.पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात में एक बार फिर ऐक्टिव हो गए हैं.गुजरात प्रधानमंत्री का गृह राज्य है और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का भी. गुजरात मेंबीजेपी की हार या जीत के परिणाम दूरगामी होंगे. बीजेपी किसी भी हालत में गुजरातनहीं हारना चाहेगी. वहीं, पंद्रह साल बाद कांग्रेस एक बार फिर से बीजेपी के सामनेकड़ी चुनौती पेश कर रही है. इस लिहाज़ से ये चुनाव काफी दिलचस्प होने जा रहे हैं.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो में देखें गुजरात चुनाव से जुड़ी खबरें- ये भी पढ़ें:गुजरात में किसकी बनेगी सरकार, जानिए क्या कहता है लेटेस्ट सर्वेगुजरात चुनाव की डेट आने में असली पेच ये है!गुजरात चुनाव में वो गंध मचनी शुरू हो गई है, जिसका किसी को अंदाजा नहीं थारो-रो फेरी सर्विस की वो खास बातें, जिसने 8 घंटे के वक्त को 1 घंटे में बदल दियाहै