(एक कविता रोज़ में आज पढ़िए प्रेरणा प्रथम सिंह की कविता नीरो की बंसी. प्रेरणाप्रथम सिंह ने सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और उसके बाद डीयू सेपॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स. शुरुआत में थोड़े दिन पत्रकारिता करने के बाद फिरकॉरपोरेट वर्ल्ड में नौकरी करने लगीं. प्रेरणा वर्तमान में आल इंडिया रेडियो एवंअन्य जगहों पर फ्रीलांसर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें लिखना, पढ़ना, और सोलोट्रेवलिंग पसंद है.)--------------------------------------------------------------------------------नीरो की बंसीजब रोम जल रहा था तब नीरो बंसी बजा रहा था पासोनियस ने बेच खाया था यूनान को औरमदमत्त था अपने दीवानघर में शराब और शबाब के बीच नीरो के बंसी ना बजाने से रोम काउद्धार होना नहीं लिखा था पासोनियस यदि चीथड़े लपेटे घूम रहा होता तो भी शायद ईरानकी जीत हो ही जाती लेकिन इनका खड़े हो जाना शायद मृत्यु को टाल देता आशा बड़ी चीज है.पासोनियस के भंडाफोड़ पर उसने देवी की शरण ली थी डेल्फी के मंदिर में जाने वालों कोअभयदान मिल जाया करता था देशद्रोही को देवी के मंदिर में ही चुनवा देने का आदेशदेने वाली उस मंदिर की पुजारिन उसकी मां थी सत्य का रंग खून से गाढ़ा होता है. देशबेचने वाले जब शरण लेते हैं तो भगवान को अपने सामने खड़ा कर छुप जाते हैं लक्ष्मणरेखाएं हमेशा सीता के लिए नहीं खींची जातीं और उस पार हमेशा रावण खड़ा नहीं हुआ करताआवाम के लिए लक्ष्मण रेखा लांघना उतना ही आवश्यक है जितना कृष्ण का युद्ध में पहियाउठा लेना युधिष्ठिर का कहना, 'अश्वत्थामा हतः, नरो वा कुंजरो वा' दुर्योधन का सूईके नोक बराबर भी ज़मीन देने से इनकार कर देना कुछ मामलों में जब सरकार भूल जाये किवो क्या है आवाम का ज़रूरी है सरकार हो जाना !--------------------------------------------------------------------------------'एक कहानी रोज़' में कहानियां यहां पढ़ें:याद एक अमरबेल है!'तुम किसको दीप जलाकर पथ दिखलाना चाहती हो'उसकी आवाज गूंजती है, जैसे लोहे की सांकल बजती है, जैसे ईमान बजता है!'उसके चेहरे पर पालक की कोमलता, हरी मिर्चों की खुशबू पुती थी'क्या हुआ जब मुसलमानों ने बकरीद को दीवाली की तरह मनाने का फैसला किया?'यही तुम अंग्रेजी की एम.ए. हो?'एक कहानी रोज़: 'मुगलों ने सल्तनत बख्श दी'--------------------------------------------------------------------------------Video देखें: केदारनाथ सिंह की 'बनारस':