2015 में हिंदुस्तान में औसतन हर रोज़ 6 रेप और 15 मॉलेस्टेशन केस हुए. इनमें से भी98 प्रतिशत मामलों में लड़की अपराधी को पहले से जानती थी. निर्भया मामले के बादबलात्कार संबंधी कानूनों में काफी बड़े बदलाव हुए. मगर कुछ ऐसे मामले भी आए हैंजिनमें इन कानूनों का फायदा गलत तरीके से उठाया गया है. कई मामलों में देखा गया हैकि लिवइन या रिलेशनशिप टूटने के बाद यौन शोषण, कई साल तक रेप होने के मामले दर्जकराए जाते हैं.--------------------------------------------------------------------------------बॉम्बे हाईकोर्ट के एक जज ने एक फैसला दिया है जिसके अनुसार, एक पढ़ी लिखी लड़की,जिसने अपनी मर्ज़ी से शादी से पहले सेक्स किया हो. ब्रेकअप के बाद बलात्कार का आरोपनहीं लगा सकती. कोर्ट ने 21 साल के एक लड़के को अग्रिम जमानत देते वक्त ये टिप्पणीकी. लड़के पर उसकी गर्ल्फ्रेंड ने ब्रेकअप के बाद रेप का आरोप लगाया था. लड़की केहिसाब से उसके बॉयफ्रेंड ने शादी की बातें करके उसको सेक्स के लिए तैयार किया औरबाद में दोनों का ब्रेकअप हो गया. जस्टिस मृदुला भाटकर ने कहा, 'फ्रॉड करने केमामलो में कोई लालच देना एक ज़रूरी तत्व होता है. इस बात का कोई रिकॉर्ड होना हीचाहिए कि आरोपी ने कुछ प्रलोभन देकर महिला को सेक्स करने के लिए तैयार किया. शादीकरने का वादा सेक्स करने का प्रलोभन नहीं कहा जा सकता.' जज ने इसके आगे भी टिप्पणीदेते हुए कहा कि लड़कियां प्री-मैरिटल सेक्स के मामले में नैतिकता का बोझ लाद लेतीहैं. जब कोई औरत किसी लड़के के साथ प्रेम में हो तो सेक्स करना दोनो के लिए बराबरका ऑप्शन है. मगर लड़कियां बाद में इस फैसले की ज़िम्मेदारी लेने से बचती हैं.हाइकोर्ट की बेंच ने ये भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी अनपढ़ महिला से शादी काझूठा वादा करके संबंध बनाए या अपने आप को कुछ और बताए तो मामला कुछ और हो सकता है.वैसे कोर्ट का ये फैसला इस तरह के आरोप झेल रहे कई लोगों को राहत देगा. दरअसल घरमें ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास वाली नैतिकता की गठरी लिए और बाहर इम्पावरमेंट औरलिबर्टी के आसमान में विचरते आज के युवा (लड़के-लड़की दोनो) के लिए इस तरह केकंफ्यूजन और दोहरी जीवनशैली से बचना बहुत मुश्किल है. ग्लोबलाइज़ेशन के दौर मेंरिलेशनशिप की आज़ादी तो मिली है मगर तथाकथित भारतीय संस्कारों को अपनी-अपनी सहूलियतसे इस्तेमाल करने का मोह नहीं छूटता.. तमाम प्रगतिशीलता के बाद भी लड़कों को शादीके वक्त दहेज की मोटी रकम देख कर मां-बाप का दिल न तोड़ने जैसी बातें याद आ जातीहैं तो लड़कियों को भी कई बार ब्रेकअप के बाद नैतिकता का हवाला देकर ‘सबक सिखाना’सही लगता है. इन सबके बीच कोर्ट का ये फैसला भी है और बेंगलुरु जैसी घटनाएं भी. कुलमिलाकर कहा ये जा सकता है कि ऐसे मामलों में किसी एक बात को आखिरी ओपीनियन को सहीया गलत मानना ही सबसे बड़ी गलती है. हर मामले को बिना किसी पूर्वाग्रह के अलग सेदेखा जाना ही एक मात्र सही हल है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें :जब कपड़ों पर वीर्य के दाग हैं, तो रेप कैसे नहीं हुआ?'मुझे याद है कैसे उस आदमी ने मेरा स्तन कठोरता से निचोड़ा था'रात भर गैंगरेप किया और सुबह सड़क पर फेंक गए