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मतगणना में हेरफेर के कांग्रेस के आरोपों पर आई ECI की प्रतिक्रिया, लंबा चौड़ा जवाब दिया है

कांग्रेस ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में डाले गए और गिने गए वोटों के आंकड़ों में “भारी विसंगति” के आरोप लगाए थे.

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25 दिसंबर 2024 (पब्लिश्ड: 01:20 PM IST)
ECI
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार. (फोटो- PTI)
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महाराष्ट्र चुनाव में मतदान के बाद वोटिंग डेटा में हेरफेर के कांग्रेस के आरोपों पर निर्वाचन आयोग (ECI) ने जवाब दिया है. आयोग ने कहा कि वास्तविक मतदान के आंकड़ों में बदलाव करना संभव नहीं है. निर्वाचन आयोग का कहना है कि ऐसा इसलिए संभव नहीं है क्योंकि सभी मतदाताओं के मतदान की विस्तृत जानकारी वैधानिक फॉर्म 17-सी में दर्ज है. और यह जानकरी हर मतदान केंद्र पर मतदान समाप्त होने के समय उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंटों के लिए उपलब्ध होती है. आयोग ने कहा,

"आयोग किसी निर्वाचन क्षेत्र, राज्य या किसी चरण के समग्र स्तर पर वोटिंग डेटा जारी करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है. क्योंकि मतदान केंद्र स्तर पर वैधानिक फॉर्म 17-सी में दर्ज किया जाता है. यह पीठासीन अधिकारी द्वारा तैयार किया जाता है और उम्मीदवारों के मतदान एजेंटों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाता है. पीठासीन अधिकारी प्रत्येक मतदान एजेंट को फॉर्म 17-सी (भाग-1) में दर्ज किए गए मतों के खाते की एक कॉपी उपलब्ध भी कराता है."

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वोटिंग डेटा को लेकर कांग्रेस पार्टी के सवालों पर आया ECI का जवाब हरियाणा चुनाव के लिए भी प्रासंगिक माना है. क्योंकि कांग्रेस नेता करण दलाल की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में डाले गए और गिने गए वोटों के आंकड़ों में “भारी विसंगति” के आरोप लगाए. चुनावों में कथित गड़बड़ी और हेरफेर की जांच के लिए गठित पार्टी समिति के प्रमुख करण दलाल ने 23 दिसंबर को चुनाव आयोग पर पारदर्शी नहीं होने का आरोप लगाया था.

ECI ने बयान में कहा, 

"वोटिंग ऐप में दिखने वाले आंकड़े और रुझानों को जानबूझकर या गलतफहमी में इस्तेमाल किया जा रहा है. जिसकी वजह से वैधानिक मतदान और उसकी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हो रहा है."

हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि मतदान केन्द्र पर कंट्रोल यूनिट्स की गिनती न करने के मानक प्रोटोकॉल के कारण चुनाव में डाले गए मतों और गिने गए मतों की संख्या में विसंगति हो सकती है. जिसकी वजह से जीत का अंतर उस मतदान केन्द्र पर डाले गए मतों से अधिक हो सकता है. ECI ने इसके कारण बताए हैं- ईवीएम से मॉक पोल डेटा को हटाए बिना वोटों की गिनती करना, ईवीएम गणना से टेस्टिंग डेटा ना हटाना, डेटा की गलत रिपोर्टिंग और डेटा एंट्री एरर.

मतदान प्रतिशत के आंकड़ों के बारे में चुनाव आयोग का कहना है कि,

शाम 5 बजे से 5.30 बजे के बीच सिस्टम में दर्ज किया गया डेटा अनुमानित मतदान प्रतिशत होता है जो कि अंतरिम डेटा है होता है. शाम 5 बजे का यह डेटा बढ़ना तय है क्योंकि शाम 5 बजे तक या मतदान समाप्ति के अधिसूचित समय तक कतार में लगे मतदाताओं को अपना वोट डालने की अनुमति होती है. शाम 5 बजे के बाद मतदान दलों को मतदान समाप्ति से संबंधित कई तरह के काम करने होते हैं. इसके बाद शाम 7 बजे से मतदान प्रतिशत का अपडेटेड डेटा फिर से ऐप पर दिखना शुरू हो जाता है. चुनाव आयोग ने कहा है कि ये वोट, डेटा में तभी दिखाई देंगे जब मतदान दल रिसीविंग सेंटर पर पहुंचेंगे और मशीन और चुनाव के कागजात जमा करेंगे और वास्तविक डेटा फीड किया जाएगा.

चुनाव आयोग ने कहा कि वोटिंग के आंकड़ों की सटीकता पूरी तरह से मतदान केंद्रों से मतदान के दिन समय-समय पर रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा दी की गई जानकारी पर निर्भर करती है. विभिन्न राज्यों में डेटा एकत्र करने का तरीका तकनीक, कनेक्टिविटी और आवाजाही की व्यवस्था के आधार पर अलग-अलग होता है.

वीडियो: Supreme Court के पूर्व जज KM Joseph ने चुनाव आयोग को क्यों सुनाया?

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