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चिराग पासवान और पशुपति पारस के झगड़े में लोजपा का बहुत बड़ा नुकसान हो गया!

ECI ने बड़ा एक्शन लिया.

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2 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 2 अक्तूबर 2021, 01:08 PM IST)
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पशुपति पारस (बाएं) और चिराग पासवान (दाएं) के बीच लोजपा अध्यक्ष पद को लेकर जून में विवाद शुरू हुआ था. (फाइल फोटो- PTI)
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बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी यानी लोजपा में चाचा-भतीजे का जो झगड़ा चल रहा है, उसके चलते पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. चुनाव आयोग ने पार्टी के चुनाव चिह्न को अगले आदेश तक फ़्रीज़ कर दिया है. यानी पार्टी अब अपने चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेगी. लोजपा का चुनाव चिह्न है – बंगला. चुनाव आयोग का ये फ़ैसला लोजपा के लिए और भी अहम इसलिए है, क्योंकि बिहार में खाली पड़ी 2 विधानसभा सीटों के लिए आने वाली 30 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं. ये दो सीटें हैं – मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा सीट और दरभंगा की कुशेश्वरस्थान सीट. लेकिन चूंकि पशुपति पारस और चिराग पासवान, दोनों ही चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा ठोंक रहे थे, इसलिए आयोग ने कार्रवाई करने का फ़ैसला किया. आयोग ने आदेश जारी करते हुए कहा कि चिराग और पारस, दोनों में से किसी के भी गुट को लोक जनशक्ति पार्टी के नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. जून से चल रहा विवाद दरअसल लोजपा के भीतर का ये पूरा विवाद जून में शुरू हुआ था. चिराग पासवान 13 जून की रात तक 6 लोकसभा सांसदों वाली लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय दल के नेता और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे. फिर पांच सांसदों ने चाचा पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में उनके ख़िलाफ़ बगावत कर दी. सबसे पहले उन्हें लोजपा संसदीय देल के नेता के पद से हटाया गया, जिसे लोकसभा स्पीकर की मंजूरी भी मिल गई. फिर बागी सांसदों ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपातकालीन बैठक बुलाकर पार्टी के संविधान का हवाला दिया और चिराग को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. इस पर चिराग पासवान ने कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते पांचों सांसदों को पार्टी से निष्काषित कर दिया. यहां से लोजपा में चाचा-भतीजे की जो लड़ाई शुरू हुई, वो अभी तक चल रही है. हालात ये हैं कि राम विलास पासवान की बनाई हुई लोजपा इस समय दो गुटों में बंटी हुई है. एक का नेतृत्व उनके बेटे चिराग कर रहे हैं तो दूसरे गुट का नेतृत्व उनके भाई पशुपति पारस. हालांकि, लोकसभा में पशुपति पारस गुट को ही स्पीकर ओम बिरला ने लोजपा के तौर पर मान्यता दी हुई है और केंद्र में भी लोजपा कोटे से पारस ही मंत्री भी हैं.

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