'ईस्ट इंडिया कंपनी' हुई दिवालिया, 170 साल बाद फिर से बंद हो गई
East India company ब्रांड अब फिजिकल या डिजिटल किसी भी रूप में मौजूद नहीं है. लंदन के 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट स्थित इसका स्टोर खाली पड़ा है. इसे एक प्रॉपर्टी एजेंसी द्वारा ऑनलाइन बेचा जा रहा है. इसकी वेबसाइट भी अब काम नहीं कर रही है.

कभी दुनिया की सबसे शक्तिशाली व्यापारिक कंपनी रही ईस्ट इंडिया कंपनी एक बार फिर से बंद हो गई है. पहली बार 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद इसे बंद किया गया था और अब एक लग्जरी रिटेलर के तौर पर इसकी दूसरी पारी पर भी विराम लग गया है. मूल ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया था. ग्लोबल बिजनेस में इसे क्रांति की तरह देखा गया लेकिन साथ में कंपनी हिंसा और अंतहीन शोषण की विरासत भी अपने नाम कर गई.
यह कंपनी लगभग 152 साल पहले बंद हो गई थी. फिर साल 2010 में ब्रिटिश मूल के भारतीय बिजनेसमैन संजीव मेहता ने इसके अधिकार खरीदे और एक रिटेलर फर्म खोली. यह फर्म अब दिवालिया हो गई है. फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में एक लग्जरी रिटेल फर्म के तौर पर फिर से शुरू होने वाली यह कंपनी अब लिक्विडेशन (कर्ज न चुका पाने के कारण बंद) में चली गई है. स्टोर और वेबसाइट बंद कर दिए गए हैं और कंपनी पर 7.39 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज होने की जानकारी मिली है.
इसके साथ ही एक समय भारत और ब्रिटेन के इतिहास की दिशा तय करने वाले ब्रांड का बेहद नीरस अंत हो गया. कंपनी हाउस में मौजूद डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में ईस्ट इंडिया कंपनी ने लिक्विडेटर्स नियुक्त किए थे. ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड मूल ईस्ट इंडिया कंपनी ग्रुप का इस फर्म पर 7.39 करोड़ से ज्यादा का बकाया था.
इसके अलावा 2.386 करोड़ रुपये का टैक्स और लगभग 2 करोड़ रुपये कर्मचारियों को देना था. ईस्ट इंडिया कंपनी नाम का उपयोग करने वाली मेहता से जुड़ी कई दूसरी फर्मों को भी बंद कर दिया गया है. इस ब्रांड की भौतिक और डिजिटल उपस्थिति अब मौजूद नहीं है. लंदन के 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट स्थित इसका स्टोर खाली पड़ा है और एक प्रॉपर्टी एजेंसी द्वारा इसे ऑनलाइन बेचा जा रहा है. इसकी वेबसाइट भी अब काम नहीं कर रही है.
ईस्ट इंडिया कंपनी ब्रांड अब फिजिकल या डिजिटल किसी भी रूप में मौजूद नहीं है. लंदन के 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट स्थित इसका स्टोर खाली पड़ा है. इसे एक प्रॉपर्टी एजेंसी द्वारा ऑनलाइन बेचा जा रहा है. इसकी वेबसाइट भी अब काम नहीं कर रही है. यानी दोबारा से ईस्ट इंडिया कंपनी का चैप्टर क्लोज हो गया है.
मूल ईस्ट इंडिया कंपनी का इतिहास क्या है?
ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को महारानी एलिजाबेथ फर्स्ट के रॉयल चार्टर से हुई. इसकी शुरुआत एक जॉइंट स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी के तौर पर हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया समेत पूर्वी इंडीज से मसालों और दूसरे वस्तुओं के लिए प्रतिस्पर्द्धा करना था. इसकी पहली व्यापारिक चौकी साल 1612 और 1613 के बीच भारत के सूरत में खोली गई. धीरे-धीरे इसने केप ऑफ गुड होप के पूर्व में होने वाले ब्रिटिश व्यापार पर अधिकार जमा लिया.
साल 1700 के दशक में यह एक बड़ी ताकत के तौर पर स्थापित हो गया, जिसने किले बनवाए. स्थानीय शासकों के साथ गठबंधन किया और फ्रांसीसियों समेत कई स्थानीय राजाओं के खिलाफ युद्ध लड़ा. साल 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद बंगाल पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्जा हो गया. इसने टैक्स वसूलना शुरू कर दिया और अदालतें बनाकर प्रशासन का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया.
साल 1800 के शुरुआती दशक में कंपनी के पास लगभग 2 लाख 50 हजार सैनिकों की एक निजी सेना थी, जो ब्रिटेन की तत्कालीन सेना से दोगुनी थी. उस समय तक भारत के बड़े हिस्से पर इसका नियंत्रण हो गया था. इसने मसालों, कपास, रेशम, चाय और नील जैसी वस्तुओं के वैश्विक व्यापार पर अपना दबदबा बना लिया. साल 1857 में कंपनी के खिलाफ हुए विद्रोह के बाद इसे औपचारिक तौर पर भंग कर दिया गया. ब्रिटिश राज ने कंपनी से भारत का शासन सीधे अपने हाथों में ले लिया.
वीडियो: तारीख: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में कितने कर्मचारी थे, कितना लूटकर ले गए?

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