पियक्कड़ों का खास ख्याल रखने वाले इस सरकारी ऐड पर आपका दिल आ जाएगा
विपदाएं कभी बताकर नहीं आतीं, लेकिन इस मामले में इसका विज्ञापन पहले ही आ जाता है.

देखो एक होते हैं किड्स, जो अकेले-अकेले दारू पीते हैं. फिर होते हैं मेन्स, जो यार-दोस्तों के साथ दारू पीते हैं. फिर नंबर आता है लेजेंड्स का, जो इस तरह के विज्ञापन बनाते हैं. पहिले देख लो, फिर आगे बतियाते हैं.

विपदाएं कभी बताकर नहीं आतीं. नोटबंदी का कोई विज्ञापन नहीं आया था. सीधे लागू हुई थी. बड़े सिन्हा जी ने फटने से पहले बीजेपी को कोई विज्ञापन नहीं दिया था. राहुल गांधी... खैर छोड़िए. 'जुड़वां 2' के विज्ञापन महीने भर से आ रहे हैं, लेकिन वरुण धवन के फिल्मों में आने का कोई विज्ञापन नहीं आया था. किंतु इस बार जो संकट हमारी आंखों में आंखें डालकर बढ़ रहा है, उसका विज्ञापन आया है. कई दिन का ड्राई-डे.

दिल्ली-NCR के एक्साइज कमिश्नर बता रहे हैं कि किस-किस दिन ठेके बंद रहेंगे. इतना संवेदनशील और परोपकारी विज्ञापन इससे पहले सिर्फ पल्स पोलियो का आया था, जिसमें कहते थे कि संडे को पोलियो पिलाना भूल न जाना. अब बताया जा रहा है कि इस-इस दिन ठेके बंद रहेंगे. आगे जो करना है, वो बताने की ज़रूरत नहीं. 'समझदार को इशारा काफी' वाली कहावत बाद में आई थी. पहले कहते थे, 'पियक्कड़ को महक काफी.' फिर लोक-लाज में 'समझदार' और 'इशारा' कर दिया. वैसे भी पियक्कड़ और समझदार में फर्क तो सिर्फ लेआउट का होता है.

दरुच्चों के 'बड़े पापा'
ये विज्ञापन हर बार आता है. लेकिन इसे देने का आइडिया जिसका होगा, उस सरकारी आदमी के दिमाग की दाद देनी होगी. दरुच्चों का इतना ख्याल कौन रखता है भाई! सभी बेवड़ों को इनके पैर धो-धोकर पीने चाहिए (साथ में दारू मिलाने की बात अलग से नहीं बताई जाएगी).
गजब स्ट्रैटिजी है. 'ये खरीदो' के बजाय कह रहे हैं कि 'ये कब नहीं खरीद पाएंगे'. हिडेन ऐड का बेस्टम-बेस्ट नमूना है ये.
तो एक्साइज डिपार्टमेंट ने अपना काम कर दिया है. आप लोग अपना-अपना देख लो.
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