"सेक्स रैकेट और शराबबाजी चलती है जेएनयू में!"
जेएनयू के खिलाफ़ एक डॉक्यूमेंट जमा किया गया है. कुछ प्रोफेसर्स ने जमा किया है. टीचर्स और स्टूडेंट्स के खिलाफ़ आरोप लगाये गए हैं.
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फोटो - thelallantop
11 जेएनयू टीचर्स ने ये आरोप लगाया है कि जेएनयू ऑर्गनाइज्ड सेक्स रैकेट का अड्डा बन चुका है. कहा ये भी जा रहा है कि ये सभी 11 टीचर्स बीजेपी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पक्षधर हैं. पिछले साल जमा किये गए 200 पेज के डाक्यूमेंट में कहा गया:
"एक हज़ार लड़कों और लड़कियों पर हॉस्टल में शराब पीने और अनैतिक कामों में शामिल होने पर 2000 से 5000 रुपये का फाइन लगाया गया. हॉस्टल के गेट्स पर एक उड़ती हुई नज़र भी डालें तो शराब की सैकड़ों खाली बोतलें मिलेंगी. हॉस्टल के मेस में सेक्स वर्कर्स खुले तौर पर घूम रही होती हैं. वहां वो न सिर्फ लड़कियों को अपने साथ शामिल करती हैं बल्कि लड़कों को 'दूषित' करती हैं. ऐसा क्यूं होता है कि रात में बड़ी और महंगी कारें हॉस्टल के आस पास घूमती पायी जाती हैं? कुछ सेक्योरिटी ऑफिसर्स भी इस रैकेट में शामिल हैं."
द वायर की खबर के अनुसार इस डॉक्यूमेंट को जमा करने वाले ग्रुप को अमिता सिंह लीड कर रही थीं. अमिता सिंह सेंटर फॉर लॉ एंड गवर्नेंस में एक प्रोफ़ेसर हैं. डॉक्यूमेंट का नाम है - Jawaharlal Nehru University: The Den Of Secessionism and Terrorism.
उन्होंने जेएनयू टीचर्स पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो जेएनयू में अलगाववादी मूवमेंट्स को बढ़ावा देते हैं.
"जेएनयू के कुछ एकेडेमिक्स जिसमें प्रो. आयेशा किदवई, प्रो. कमल मित्र चिनॉय, प्रो. अनुराधा चिनॉय, प्रो. निवेदिता मेनन ने जेएनयू को मिसयूज़ किया है. और उन्होंने अपने सीनियर टीचर को एक कवर का इस्तेमाल करते हुए देश विरोधी गतिविधियों को कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट में फ़ैलाने का काम करते हैं. सेमिनार, लेक्चर, पैम्फलेट बांट के, पोस्टर चिपका के, नुक्कड़ नाटकों से, रैलियों और भूख हड़तालों से जेएनयू में रहते हुए इन स्टेट्स में देश विरोधी कामों को बढ़ावा देते हैं. इनका मेन उद्देश्य है देश की एकता को तोड़ना. ये सभी टीचर्स नए लोगों और ताज़ा दिमागों को जेएनयू में बुला रहे हैं. उन्हें नाइट पार्टीज़, शराब और कैश पेमेंट्स से लुभाते हैं. बदले में वो स्टूडेंट्स उनके लिए उनके एजेंडा को आगे बढ़ाते हैं. इस पूरे प्रोसेस में जेएनयू एक ऑर्गनाइज्ड सेक्स रैकेट का गढ़ बन गया है. इसमें कई हॉस्टल के कर्मचारी, मेड, मुनिरका में चलने वाले ब्यूटी पार्लर से आने वाले लोग और साथ ही डीएसएफ़, डीएसयू, एआईएसए इसमें शामिल हैं. "
दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट भी ऐसा ही कुछ कहती है. जैसे कि जेएनयू हॉस्टल में बीफ परोसा जाता था. पुलिस का भी कहना है कि लेफ्टिस्ट स्टूडेंट्स ने 2010 में दंतेवाड़ा में 76 पुलिसवालों के मारे जाने पर जश्न मनाया था. साथ ही इन डाक्यूमेंट्स में भी पुली की रिपोर्ट की ही तरह कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार के हनन पर की जाने वाली पब्लिक मीटिंग्स को अलगाववादी ऐक्टिविटी क़रार दिया गया. संघ परिवार के तमाम जनों ने इन आरोपों को व्हाट्सऐप पर पिछले दो महीनों में जमकर फॉरवर्ड किया. 1970 से ही संघ जेएनयू के खिलाफ़ रहा है. क्यूंकि जेएनयू अपने लेफ़्ट के आईडियाज़ को लेकर चलता है जिससे संघ को हमेशा दिक्कत रही है.
इन आरोपों को जेएनयू के टीचर्स और स्टूडेंट्स के एक बड़े हिस्से ने बकवास ठहराया है. और उनके हिसाब से ये सब कुछ संघ के हिंदुत्व प्रोपोगेंडा का एक हिस्सा हैं.

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