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हेल्थ मिनिस्ट्री की नई गाइडलाइन में रेमडेसिविर इंजेक्शन के बारे में जरूरी बात कही गई है

किस मरीज को होम आइसोलेशन में नहीं रहना है, ये भी बताया है.

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Remdesivir की भारी मांग के बीच इसे लेकर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: PTI)
Remdesivir की भारी मांग के बीच इसे लेकर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: PTI)
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अमित
30 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 29 अप्रैल 2021, 03:54 AM IST)
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भारत की हेल्थ मिनिस्ट्री ने 29 अप्रैल को कम या बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) कोरोना मरीजों के होम आइसोलेशन को लेकर नई गाइडलाइन 
जारी कीं. ये गाइडलाइन 2 जुलाई 2020 को जारी गाइडलाइन की जगह लेगी. गाइडलाइन में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर भी सलाह दी गई है. हेल्थ मिनिस्ट्री की सलाह है कि कम या बिना लक्षण वाले कोरोना मरीज रेमडेसिविर इंजेक्शन न खरीदें और न ही लगवाएं. मिनिस्ट्री की ओर से कहा गया कि इस दवा का इस्तेमाल सिर्फ अस्पताल में इलाज के दौरान ही किया जाए. आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि और क्या-क्या बताया गया है इस गाइडलाइन में. किसे कहेंगे कम या बिना लक्षण वाला कोरोना केस? - बिना लक्षण वाले कोरोना के मरीज उसे कहा जाएगा जिसका लैब टेस्ट कोरोना पॉजिटिव हो लेकिन किसी भी तरह के लक्षण न दिख रहे हों. कमरे की हवा में ऑक्सीजन का लेवल 94 फीसदी से ज्यादा हो.
- कम लक्षण वाले कोरोना मरीज की श्रेणी में वो मरीज आएंगे जिन्हें जुकाम और हल्का बुखार होता है. इनकी सांस नहीं फूलती है और कमरे में ऑक्सीजन का लेवल 94 फीसदी से ज्यादा होता है. जब होम आइसोलेशन में रखा जाए # घर में सेल्फ आइसोलेशन और परिवार के बाकी सदस्यों के क्वारंटीन के लिए पर्याप्त जगह मौजूद हो. # एक देखभाल करने वाला व्यक्ति हमेशा मौजूद रहे. देखभाल करने वाला पूरे आइसोलेशन पीरियड में लगातार अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क में रहे. # जिन मरीजों की उम्र 60 साल से ज्यादा है और हाई बीपी, डायबीटीज, दिल की बीमारी, क्रॉनिक फेफड़े, किडनी, लिवर की बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही होम आइसोलेशन पर रखा जा सकता है. # HIV, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर थैरेपी के मरीजों को होम आइसोलेशन में न रखा जाए. इलाज कर रहे डॉक्टर से पूरी तरह से जांच के बाद ही होम इसोलशन की अनुमति दी जाएगी. # मरीज की देखभाल करने वाले और सभी नजदीकी संपर्क में आए लोगों को हाइड्रोक्लोरोक्विन (Hydroxychloroquine) दिया जाना चाहिए. इसकी डोज़ और प्रोटोकॉल के लिए इलाज कर रहे डॉक्टर से सलाह लें.
Home Isolation
मुंबई में लोगों का चेकअप करते हेल्थ वर्कर्स. प्रतीकात्मक तस्वीर. क्रेडिट- PTI.
मरीज क्या करे # कम या बिना लक्षण वाला मरीज परिवार के दूसरे सदस्यों और खासकर बुजुर्गों और दूसरी बीमारी से ग्रसित लोगों से दूर रहे. # जिस कमरे में होम आइसोलेशन किया गया हो वह कमरा हवादार होना चाहिए. # मरीज हमेशा तीन लेयर का मास्क पहने. मास्क के गीला हो जाने पर या 8 घन्टे के बाद मास्क बदल लें. # मरीज का तीमारदार जब कमरे में जाए तो N95 मास्क पहने. हो सके तो मरीज और तीमारदार दोनों ही उस समय N95 मास्क पहनें. # मास्क को फेंकने से पहले उसे 1% सोडियम हाइपोक्लोराइट (sodium hypochlorite) से सैनिटाइज़ करके फेंके. # मरीज को पूरा आराम करना चाहिये और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. # घर पर आइसोलेशन वाले मरीज हाथों की साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें. हाथों के 40 सेकेंड तक साबुन से रगड़-रगड़ कर साफ करें. या एल्कोहल वाले सेनेटाइजर से साफ करें. # मरीज अपने इस्तेमाल में आ रही कोई भी चीज किसी दूसरे से साझा न करें. # जिस चीज को मरीज बार-बार छु रहा है जैसे चम्मच, दरवाजे का हैंडल आदि, उसे 1% hypochlorite solution से साफ करें. # मरीज पल्स ऑक्सीमीटर से oxygen saturation और शरीर का तापमान जरूर करता रहे. ऑक्सीजन लेवल में किसी भी तरह की गिरावट आने पर तुरंत डॉक्टर को रिपोर्ट करें. तीमारदार क्या करें # मरीज की देखभाल करने वाला ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क पहने, मरीज के कमरे में जाने से पहले N95 मास्क पहन लें. # मास्क के सामने के हिस्से का न छुएं. मास्क के साथ आए इस्तेमाल के दिशा-निर्देशों के हिसाब से उसे पहनें और बदलें. # अगर मास्क गंदा या गीला हो गया हो तो उसे फौरन बदल लें. # अपने चेहरे, मुंह और नाक को छूने से बचें, हाथों की सफाई नियम से करते रहें # मरीज की देखभाल के वक्त दस्ताने का उपयोग करें और इसके बाद हाथों को साबुन से 40 सेकेंड तक रगड़-रगड़ कर साफ करें या एल्कोहल वाले हैंड सेनेटाइजर से साफ करें. # मरीज के कपड़ों और दूसरी चीज़ों को छूने से बचें. सिगरेट, बर्तन या चादर आदि शेयर न करें. # मरीज की इस्तेमाल की गई चीज़ें जैसे मास्क, दस्ताने, रूमाल, खाने के पैकेट आदि नियमानुसार 
डिस्पोज़ करें. होम आइसोलेशन में मरीज के इलाज का तरीका # मरीज हमेशा डॉक्टर के संपर्क में रहे. # दिन में दो बार गर्म पानी से गरारे करें और भाप भी ले सकते हैं. # यदि पैरासिटामॉल (Paracetamol) 650 mg की अधिकतम डोज़ के बाद भी बुखार नियंत्रण में नहीं है तो डॉक्टर से संपर्क करें. अगर डॉक्टर सलाह दे तो दिन में दो बार Naproxen 250 mg भी ली जा सकती है. # आइवरमेक्टिन (Ivermectin 200mcg/kg) दिन में एक बार खाली पेट 3 से 5 दिन तक लिया जा सकता है. # यदि 5 दिन से ज्यादा बुख़ार रहता है तो इनहेलर के जरिए नाक के जरिए ली जा सकने वाली बडेसोनाइड (Inhalational Budesonide) दिन में दो बार 5-7 दिनों के लिए दी जा सकती है. # रेमडेसिविर (Remdesivir) या किसी दूसरी थैरेपी को शुरू करने का फैसला किसी डॉक्टर द्वारा ही लिया जाए. खुद से ऐसा करें. न ही रेमडेसिविर खरीद कर घर पर रखें. # हल्के लक्षण में स्टेरॉयड नहीं दिया जाना चाहिये. यदि 7 दिन बाद भी लक्षण रहता है तो डॉक्टर की सलाह से मुंह से लिए जाने वाले कम डोज़ के स्टेरॉयड दिए जा सकते हैं.
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Remdesivir इंजेक्शन को लेकर गाइडलाइन में साफ निर्देश दिए गए हैं.
कब मेडिकल अटेंशन की जरूरत? मरीज लगातार अपनी सेहत पर नजर रखें और नीचे दिए गए किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर फौरन मेडिकल सहायता मांगें. # सांस लेने में तकलीफ होने पर. # कमरे की हवा पर ऑक्सीजन (Oxygen Saturation) लेवल में गिरावट हो रही है. लेवल 94% से नीचे चला गया हो. # छाती में लगातार दर्द या दवाब महसूस हो रहा हो. # दिमागी तौर पर भ्रम की स्थिति बन रही हो और उठने-बैठने में दिक्कत महसूस हो रही हो. होम आइसोलेशन कब खत्म करें बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों का होम आइसोलेशन लक्षण शुरू होने से 10 दिन बाद खत्म कर सकते हैं. इसके अलावा जिन्हें बुखार आदि आ रहा हो यदि उन्हें पिछले 3 दिनों से बुख़ार नहीं आया हो तो होम आइसोलेशन खत्म किया जा सकता है. होम आइसोलशन खत्म होने के बाद जांच की जरूरत नहीं है.
इस गाइडलाइन में राज्य और जिले की हेल्थ अथॉरिटी के लिए भी गाइडलाइन दी गई हैं. इनके अनुसार जिले की मेडिकल अथॉरिटी की जिम्मेदारी है कि वह होम आइसोलेशन के हर केस पर लगातार नजर बनाए रहे. होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों का फोन करके लगातार हालचाल पूछा जाता रहे. फील्ड स्टाफ मरीज के परिवार के सदस्यों और संपर्क में आए लोगों पर भी नजर रखें और प्रोटोकॉल के मुताबिक उनकी टेस्टिंग करें.

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