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कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों पर ना थोपी जाएं ईसाई परंपराएं, नई गाइडलाइन में और क्या-क्या है?

Catholic Bishops’ Conference of India (CBCI) ने अपने अधिकार क्षेत्र के तहत सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए गाइडलाइन जारी की है. इसमें सभी आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान करने की बात लिखी है.

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कॉनवेंट स्कूलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की कुछ घटनाएं सामने आईं थी (सांकेतिक फोटो- पेक्सेल)
4 अप्रैल 2024
Updated: 4 अप्रैल 2024 11:58 IST
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देश के कॉन्वेंट स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है (Christian Convents Schools). कहा गया है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बाकी धर्म के बच्चों पर ईसाई परंपराओं को ना थोपा जाए. गाइडलाइन में सभी आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान करने की बात भी लिखी है. पिछले दिनों इन स्कूलों के खिलाफ हमलों और विरोध प्रदर्शन की कई घटनाएं सामने आई थीं. माना जा रहा है कि उसी कड़ी में ये फैसला लिया गया है.

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के अंडर लगभग 14 हजार स्कूल, 650 कॉलेज, सात यूनिवर्सिटी, पांच मेडिकल कॉलेज और 450 तकनीकी और व्यावसायिक संस्थान आते हैं. CBCI के मुताबिक, ताजा गाइडलाइन देश में 'वर्तमान सामाजिक-सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक स्थितियों की वजह से उभरती चुनौतियों' से निपटने में मदद करने के लिए जारी की गई हैं.

क्या है नई गाइडलाइंस?

-स्कूल तक पहुंच को कंट्रोल करने के लिए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं. जैसे बंद दरवाजे, एंट्री गेट पर सुरक्षा सिस्टम, विजिटर्स के लिए चेक-इन प्रक्रियाएं और निगरानी कैमरे.

-स्कूल बिल्डिंग के एंट्री गेट पर Preamble प्रदर्शित करें और सुबह की एसेंबली के दौरान छात्रों से रिसाइट करवाएं.

-ना केवल स्कूली छात्रों बल्कि स्टाफ सदस्यों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता और विविधता को लेकर सम्मान को बढ़ावा दिया जाए.

-कुछ प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों, वैज्ञानिकों, कवियों, राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरें स्कूल की लॉबी, लाइब्रेरी आदि में लगाई जाएं.

-परिसर में एक अलग 'अंतर-धार्मिक प्रार्थना कक्ष' या सर्वधर्म प्रार्थनालय रखने का आह्वान किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल फरवरी में त्रिपुरा में एक कॉन्वेंट स्कूल टीचर पर एक छात्र को हिंदू धर्म से जुड़ा कलावा पहनने से रोकने और उसे जब्त करने के आरोप लगे थे. घटना के बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था. उसी महीने असम में एक कट्टरपंथी हिंदू समूह ने राज्य के ईसाई स्कूलों में प्रीस्ट-ननों से ईसाई प्रतीकों और धार्मिक आदतों को हटाने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था.

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CBCI के राष्ट्रीय सचिव फादर मारिया चार्ल्स SDB ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि चर्च ऐसी स्थितियों को लेकर सतर्क और संवेदनशील है. बोले कि इन दिनों उभर रही राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए, हमें कैथोलिक स्कूलों के रूप में और ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है. 

वीडियो: तारीख: पाकिस्तानी स्कूलों में भारत के बारे में क्या पढ़ाया जाता है?

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