सोमवार शाम से ही मीडिया और सोशल मीडिया गुलज़ार है. बॉर्डर पर डटे BSF जवान तेजबहादुर यादव ने कच्चा माल सप्लाई कर दिया है. उसका अपलोड किया गया वीडियो 70 लाख सेऊपर व्यू उठा चुका है. जवान ने दूसरे वीडियोज़ में सूखी रोटी और पनीली दाल भी दिखादी. होम मिनिस्ट्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं. BSF की तरफ से भी जवाब आ गया है.कि इस जवान का करियर अनुशासनहीनता की जाती जागती मिसाल है. लेटेस्ट अपडेट ये है किजवान की ड्यूटी बदल दी गई है. प्लंबर ड्यूटी में लगाया गया है. और उस पर वीडियोडिलीट करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है. तो देखो कि एक्शन का रिएक्शन शुरू होचुका है. सभी अपना काम कर रहे हैं. लेकिन इस बीच सबसे अजीब जो चीज देखने में आई है,वो है हमारा अपना व्यवहार. मतलब सर्दी में अंगीठी के सामने मूंगफली बढ़िया हरी चटनीके साथ खा रहे, या रजाई के अंदर से ट्वीट, फेसबुक पोस्ट कर रहे लोग. जिनको न जांचसे मतलब है न फैसले से. जज बनकर बैठे और जवान की कुंडली अपनी कल्पनाशक्ति से बनाकरपेश कर दी. मतलब जांच की जरूरत ही नहीं है, दोषी ये फौजी ही है. बताओ. इस फौजी कीउम्र भी 60 साल नहीं होगी. देखो इस कहानी में देशभक्ति से जुड़ा हर मसाला है. सेनाहै. बॉर्डर है. कश्मीर का माइनस डिग्री वाला टेम्प्रेचर है. मुसीबतों और दुश्मनोंसे एक साथ लड़ता फौजी है. लेकिन एक कमी है. भारी वाला ब्लंडर. वहां शहीद नहीं है.हमको फौजी सिर्फ शहीद पसंद है. अपनी समस्या बताता है तो अच्छा नहीं लगता. वो अगरपानी जैसी दाल खा रहा है तो दारू पीकर नंगा नाच भी तो करता है. अगर 11 घंटे ठंड मेंखड़ा रहकर हमारी हिफाजत कर रहा है तो अपने सीनियर्स से बदसुलूकी भी तो की है. हमारेपास सौ लॉजिक हैं उसको विलेन साबित करने के. हम खोज रहे हैं इसकी सर्विस के दौरानकी छोटी से छोटी गलती. ताकि उल्टे यही अपने जाल में फंस जाए. लेकिन गुरू इसकी सौगलतियां निकल आएं, वो पानी जैसी दाल और सूखी रोटी तो नहीं बदलेगी. तेज बहादुर नेन्यूज चैनलों से बातचीत में ये भी बताया है कि उसे 16 बार सम्मानित किया जा चुकाहै. एक बार गोल्ड मेडल भी मिला है. अगर शराब पीकर पागलपन सवार हो जाता है इस पर तोबॉर्डर जैसी संवेदनशील जगह पर क्यों लगाया गया है सुरक्षा के लिए. कम से कम इसकीजांच की गुंजाइश तो है. बिना जांच बिना केस फैसला ऑन द स्पॉट. दिमाग में बॉबी देओलकी क्रांति फिल्म चलाकर बैठे हैं हम. थोड़ी ठंड रखो भाई. फौज के नियम कायदे बड़ेकड़े होते हैं. अनुशासन वहां पहले नंबर पर आता है. तो फौजी के खिलाफ एक्शन तो लियाजाता है, लिया जाएगा. लेकिन जो आरोप उसने लगाए हैं उनकी भी तो जांच हो जाने दो. पतातो लगे कौन बड़ा विलेन है. ऐसे क्विक रिएक्शन देने के चक्कर में हम कहीं अपने उनहीरोज़ का गला तो नहीं घोंट रहे जो बॉर्डर पर खड़े होने के अलावा चुनाव जितवाने मेंभी काम आते हैं.--------------------------------------------------------------------------------तेज बहादुर यादव से जुड़ी अपडेट्स पढ़ें: तेज बहादुर शराबी, बदतमीज़ और आदतनअनुशासनहीन: BSF BSF जवान ने अफसरों की पोल खोल दी, देशभक्तों को ये वीडियो देखनेचाहिए