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कुर्सी खतरे में तो नहीं... ईरान में बुरे फंसे ट्रंप ने अब खुफिया एजेंसियों को इस काम पर लगाया

दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ये एनालिसिस सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों के कहने पर किया जा रहा है. और इसका मकसद ये समझना है कि अगर ट्रंप इस जंग से पीछे हटते हैं, तो उसके क्या नतीजे होंगे? खासकर तब, जब उनके कुछ सलाहकार और अधिकारी मानते हैं कि ये जंग आने वाले मिड टर्म इलेक्शन में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को खासा नुकसान पहुंचा सकती है.

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आसिफ़ असरार
| शुभम कुमार
29 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 10:22 AM IST)
iran response on trump victory
अमेरिका-ईरान जंग में आगे क्या हो सकता है ख़ुफ़िया एजेंसी इसका अनुमान लगा रहे हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)
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अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस दो महीने पुरानी जंग को अचानक खत्म करने का ऐलान कर दें, तो उसका क्या असर होगा? और इसपर ईरान का रिएक्शन क्या होगा? यही सवाल इन दिनों अमेरिका की खुफिया एजेंसियों (US Intelligence agencies) के दिमाग में घूम रहा है. दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि एजेंसियां इसी बात का पता लगाने में जुटी हैं. 

दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ये एनालिसिस सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों के कहने पर किया जा रहा है. और इसका मकसद ये समझना है कि अगर ट्रंप इस जंग से पीछे हटते हैं, तो उसके क्या नतीजे होंगे? खासकर तब, जब उनके कुछ सलाहकार और अधिकारी मानते हैं कि ये जंग आने वाले मिड टर्म इलेक्शन में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को खासा नुकसान पहुंचा सकती है. ट्रंप के सामने अभी दो विकल्प हैं. एक, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाई बढ़ा दें. दूसरा, अगर वो अचानक जीत का ऐलान करके तनाव कम करने की कोशिश करते हैं, तो इससे उन पर पड़ रहा राजनीतिक दबाव कम हो सकता है. 

लेकिन दूसरे विकल्प के साथ एक जोखिम भी जुड़ा है. अगर अमेरिका जल्दी पीछे हटता है, तो ईरान और ज्यादा आत्मविश्वास से भर सकता है. वो अपने न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को फिर से खड़ा कर सकता है, जिससे इलाके में अमेरिका के सहयोगियों के लिए खतरा बढ़ सकता है.

पहले की जांच में क्या पता चला?

रिपोर्ट के मुताबिक, ये साफ नहीं है कि खुफिया एजेंसियां अपनी जांच कब पूरी करेंगी. लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब इस तरह का एनालिसिस हो रहा हो. फरवरी महीने में शुरुआती बमबारी के बाद भी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इसी तरह के सवाल का जवाब खंगाला था. तब जो रिजल्ट निकले, वो दिलचस्प थे. बताया गया कि ईरान किसी भी तरह पीछे नहीं हटेगा. या तो अपनी जीत दर्ज करेगा या फिर अमेरिका पर दबाव बनाने की स्ट्रैटेजी निकालेगा. 

सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी  (CIA) के पब्लिक अफेयर्स की डायरेक्टर लिज ल्योन ने कहा, 

 ‘एजेंसी इस तरह के आकलन से परिचित नहीं है. CIA ने ईरान से जुड़े अपने मौजूदा काम को लेकर रॉयटर्स के खास सवालों का जवाब देने से भी इनकार कर दिया है.’

वहीं ऑफिस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस ने इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. यानी आधिकारिक तौर पर कोई साफ तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने मंथन जारी है. उधर अमेरिका और ईरान की भी बातचीत जारी है. दोनों ही देश एक दूसरे के प्रपोज़ल पर सोच रहे हैं. 

अमेरिकी इस जंग से कितने ख़ुश?

रॉयटर्स के हालिया सर्वे में सामने आया है कि सिर्फ 26% लोगों को लगता है कि ये सैन्य अभियान अपने खर्च के लायक रहा है. और सिर्फ 25% का मानना है कि इससे अमेरिका पहले से ज्यादा सुरक्षित हुआ है. यानी ज्यादातर लोग इस जंग से खुश नहीं है. एक तरफ जंग का दबाव है, दूसरी तरफ चुनावी राजनीति. ट्रंप की नज़र से देखें तो मामला थोड़ा फंसा हुआ है. जंग जारी रखते हैं तो जनता और चुनाव में नुकसान हो सकता है, और अगर जल्दी जीत का ऐलान करते हैं तो रणनीतिक जोखिम उठाना पड़ सकता है. 

वीडियो: दुनियादारी: ऊपर से मजबूत दिख रहा ईरान अंदर से टूट चुका है?

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