'भारत ChatGPT चलाए, खर्च अमेरिका उठाए?' डॉनल्ड ट्रंप के एडवाइजर क्यों तिलमिला उठे
Donald Trump के ट्रेड एडवाइजर Peter Navarro ने AI के अलावा विदेशी कंपनियों द्वारा America की खेती की जमीन खरीदने पर भी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनियां अमेरिकी कृषि भूमि को दस गुना ज्यादा कीमत पर खरीद रही हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो को भारतीयों का एआई टूल चैट जीपीटी इस्तेमाल करना पसंद नहीं आ रहा है. उन्होंने सवाल उठाया है कि भारत में इस्तेमाल होने वाले AI (Artificial Intelligence) का खर्च अमेरिका को क्यों उठाना पड़ रहा है. नवारो ने यह टिप्पणी एक इंटरव्यू के दौरान की, जिसमें उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल भारत करता है, लेकिन खर्चा अमेरिका उठाता है.
नवारो का तर्क है कि ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म अमेरिका में चल रहे हैं, जिनमें अमेरिकी बिजली का इस्तेमाल होता है, जबकि इनसे भारत और अन्य देशों के करोड़ों यूजर्स को सर्विस मिल रही है. नवारो का यह बयान ऐसे समय पर आया जब भारत और अमेरिका के बीच कई व्यापारिक मुद्दों को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं.
ट्रंप के दौर में रूस से तेल खरीदने के कारण भारत 50 फीसदी टैरिफ झेल रहा है. भारत-अमेरिका के बीच अभी भी व्यापार समझौते को लेकर खींचतान जारी है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में वाइट हाउस के पूर्व चीफ स्ट्रेटजिस्ट स्टीव बैनन के साथ 'रियल अमेरिका वॉइस' पर नवारो ने एक इंटरव्यू दिया. इसमें उन्होंने विदेशों में AI सर्विस को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल हो रहे अमेरिकी रिसोर्सेज पर सवाल उठाया.
उन्होंने कहा,
भारत में AI के लिए अमेरिकी पैसे क्यों दे रहे हैं? ChatGPT अमेरिकी जमीन पर काम करता है और अमेरिकी बिजली का इस्तेमाल करता है. इससे बड़े पैमाने पर भारत, चीन और दुनिया भर में ChatGPT यूजर्स को सर्विस दी जाती है.
नवारो ने इस इंटरव्यू में केवल AI पर नहीं, बल्कि विदेशी कंपनियों द्वारा अमेरिका की खेती की जमीन खरीदने पर भी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनियां अमेरिकी कृषि भूमि को वास्तविक कीमत से दस गुना ज्यादा कीमत पर खरीद रही हैं, जिससे अमेरिका में खाने-पीने के सामानों पर महंगाई बढ़ सकती है.
यह पहली बार नहीं है जब नवारो ने भारत को लेकर विवादित बयान दिए हैं. इससे पहले भी उन्होंने भारत के व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाए थे और भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर आलोचना की थी. नवारो ने दावा किया था कि भारत डिस्काउंट पर रूसी कच्चा तेल इंपोर्ट करके यूक्रेन में रूस की लड़ाई को हवा दे रहा है.
उन्होंने यूक्रेन लड़ाई में भारत की भूमिका पर और जोर देते हुए नई दिल्ली को क्रेमलिन के लिए 'लॉन्ड्रोमैट' (सेल्फ सर्विस लॉन्ड्री) कहा था. ट्रंप के सहयोगी ने भारत को 'टैरिफ का महाराजा' भी करार दिया है. इसके अलावा उन्होंने भारत के रूसी तेल इंपोर्ट को 'खून का पैसा' कहा है और यूक्रेन लड़ाई को 'मोदी की लड़ाई' भी कहा है.
भारत के नेतृत्व के बारे में 'ब्राह्मण' जैसी बात कहने वाले उनके कॉमेंट की नई दिल्ली ने कड़ी आलोचना की थी. विदेश मंत्रालय ने तब नवारो के कॉमेंट को 'अस्वीकार्य' और 'गलत जानकारी' वाला बताकर खारिज कर दिया था. मंत्रालय ने जोर देकर कहा था इस तरह की बातें आपसी सम्मान को कम करती हैं और भारत-अमेरिका के रिश्ते की गहराई को नहीं दिखाती हैं.
वीडियो: दुनियादारी: क्या ट्रंप के नरम पड़ने पर खामेनेई ने हालात संभाल लिए?

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