'खुश हूं कि वो मर गया', डॉनल्ड ट्रंप ने US के किस पूर्व अधिकारी की मौत पर ये बात कही?
अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई के एक पूर्व डायरेक्टर की मौत की खबर आई तो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें खुशी हुई कि वो मर गए. इन डायरेक्टर को ट्रंप की ही रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति बने जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने नॉमिनेट किया था.

अमेरिका में FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) के पूर्व डायरेक्टर रॉबर्ट मुलर (Robert Mueller) का 20 मार्च की देर रात निधन हो गया. वो 81 साल के थे. परिवार ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. मुलर एफबीआई के वही अधिकारी हैं, जिन्होंने साल 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में रूस और डॉनल्ड ट्रंप के चुनावी कैंपेन के बीच कथित संबंधों के आरोपों की जांच की थी. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को जब उनकी मौत की खबर मिली तो वो बोले कि उन्हें खुशी है कि मुलर मर गए.
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, मुलर के परिवार ने शनिवार, 21 मार्च को एक बयान में बताया,
“गहरे दुख के साथ हम ये बता रहे हैं कि बॉब (रॉबर्ट मुलर) का शुक्रवार रात निधन हो गया.”
रॉबर्ट मुलर ने 2001 से 2013 तक FBI के डायरेक्टर के तौर पर काम किया था. उन्होंने जब ड्यूटी जॉइन की थी, उसके एक हफ्ते बाद ही अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ था. फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को एंटी टेररिस्ट फोर्स में बदलने का क्रेडिट उन्हें ही दिया जाता है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, FBI के मुखिया के तौर पर मुलर का कार्यकाल दोनों राजनीतिक पार्टियों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रपतियों के समय तक चला. उन्हें रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने इस पद के लिए नॉमिनेट किया था. ये वही पार्टी है, जिससे ट्रंप भी राष्ट्रपति बने हैं. उन्हें जब मुलर के मौत की खबर मिली तो खुशी भरे अंदाज में उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया,
“रॉबर्ट मुलर अभी-अभी मर गए. अच्छा हुआ. मुझे खुशी है कि वो मर गए. अब वो बेकसूर लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते!"
इस रिएक्शन से जाहिर होता है कि मुलर को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के मन में कितनी नापसंदगी थी. वो लगातार इसे जाहिर भी करते रहे हैं. उन्होंने मुलर की जांच को कई बार "विच हंट" कहा है.
मुलर से इतनी नफरत क्यों?
मुलर एफबीआई से साल 2013 में रिटायर हो गए थे, लेकिन इसके 4 साल बाद 2017 में जस्टिस डिपार्टमेंट में एक बड़े अधिकारी ने उन्हें फिर से सरकारी सेवा में वापस बुलाया था. उन्हें स्पेशल काउंसल के तौर पर यह जांच करने का काम सौंपा गया कि क्या प्रेसिडेंट ट्रंप ने 2016 के अपने चुनावी अभियान में नतीजों पर असर डालने के लिए रूस से मदद ली थी. तकरीबन 22 महीने तक चली जांच में 34 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए, जिनमें ट्रंप के कई सहयोगी, रूसी खुफिया अधिकारी और तीन रूसी कंपनियां शामिल थीं.
इस जांच के बाद कई लोगों ने अपना जुर्म कबूल किया और उन्हें दोषी ठहराया गया लेकिन, मुलर ने ट्रंप पर कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया. इससे ट्रंप के विपक्षी डेमोक्रेट्स बहुत निराश हुए. अप्रैल 2019 में इस हाई-प्रोफाइल जांच पर उनकी 448 पन्नों की रिपोर्ट जारी की गई. इसमें ट्रंप के चुनाव अभियान और रूस के बीच कई अहम संपर्कों का जिक्र था, लेकिन इसमें किसी आपराधिक साजिश का आरोप नहीं लगाया गया था.
मुलर ने अपनी रिपोर्ट में ट्रंप को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे. इनमें से एक ये भी था कि ट्रंप इस जांच को प्रभावित करना चाहते थे और इस पर अपना कंट्रोल जमाना चाहते थे. यहां तक कि वो इस जांच को पूरी तरह से बंद भी करवाना चाहते थे. हालांकि, मुलर ने रिपोर्ट में ये दर्ज करने से मना कर दिया कि ट्रंप कानून तोड़ रहे थे या नहीं? इसकी एक वजह जस्टिस डिपार्टमेंट की वह पॉलिसी है जो मौजूदा प्रेसिडेंट पर आरोप लगाने से रोकती है.
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जांच में यह पक्का पाया गया कि रूस ने 2016 के अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी लेकिन मुलर को ऐसे सबूत नहीं मिले जिससे साबित हो सके कि डॉनल्ड ट्रंप या उनकी टीम ने चुनाव जीतने के लिए रूस के साथ मिलकर कोई गुप्त योजना बनाई थी. जब बात इस पर आई कि क्या ट्रंप ने जांच को रोकने या उसमें अड़ंगा डालने की कोशिश की तो मुलर ने कोई साफ फैसला नहीं बताया. उन्होंने न तो ट्रंप को अपराधी ठहराया और न ही उन्हें पूरी तरह 'क्लीन चिट' दी. यह फैसला उन्होंने अदालत और संसद पर छोड़ दिया.
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