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डॉनल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को 'युद्ध' क्यों नहीं कह रहे? मजबूरी की वजह जानें

अमेरिका ने आखिरी बार साल 1942 में आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा की थी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूजवेल्ट ने पर्ल हार्बर बंदरगाह पर जापान के हमले के बाद धुरी शक्तियों (शाही जापान, नाजी जर्मनी, फासीवादी इटली और उनके सहयोगी देश) के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी.

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ईरान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध क्यों नहीं बोल रहे हैं. (इंडिया टुडे)
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आनंद कुमार
2 मार्च 2026 (अपडेटेड: 2 मार्च 2026, 08:34 PM IST)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की. इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई समेत सरकार और मिलिट्री से जुड़े कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं. ईरान ने जवाबी कार्रवाई की जद में इजरायल के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों को ले लिया है. 

इन कार्रवाइयों के बीच एक सवाल मौजूं है कि पश्चिमी एशिया के कई देशों तक फैल चुके इस संघर्ष को राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध क्यों नहीं कह रहे हैं? और क्या उनकी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी संविधान के हिसाब से वैध है?

इंडिया टुडे के लिए शौनक सान्याल लिखते हैं कि अमेरिकी संविधान में किसी दूसरे देश के खिलाफ युद्ध घोषित करने का विशेषाधिकार अनुच्छेद 1 के तहत केवल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को दिया गया है. अनुच्छेद 1 का सेक्शन 8 अमेरिकी कांग्रेस को युद्ध घोषित करने, सेना खड़ी करने और उनका समर्थन करने और उसे बनाए रखने का अधिकार देता है.

इसके साथ ही अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को युद्ध की घोषणा किए बिना कई तरह की सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार देता है. संविधान का अनुच्छेद 2 अमेरिकी राष्ट्रपति को देश की सशस्त्र सेनाओं के कमांडर-इन-चीफ के तौर पर विदेशों में सेना के इस्तेमाल की मंजूरी देती है. अमेरिकी राष्ट्रपति को लगता है कि देश की सुरक्षा के लिए सैन्य अभियान की जरूरत है तो वे अमेरिकी सेनाओं को विदेशों में सैन्य अभियान के लिए भेज सकते हैं. यही तकनीकी पेच शायद राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान में चलाए जा रहे सैन्य कार्रवाई को युद्ध कहने से रोक रही है.

अमेरिका में कौन करता है दूसरे देश के खिलाफ युद्ध की घोषणा?

यदि अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध घोषित करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कांग्रेस ऐसा प्रस्ताव या विधेयक तैयार करे और उसे सदन और सीनेट दोनों से साधारण बहुत से पारित करे. विधेयक या प्रस्ताव को कांग्रेस की मंजूरी मिलने और उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के बाद ही अमेरिका युद्ध की घोषणा कर सकता है.

अमेरिका ने आखिरी बार साल 1942 में आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा की थी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूजवेल्ट ने पर्ल हार्बर बंदरगाह पर जापान के हमले के बाद धुरी शक्तियों (शाही जापान, नाजी जर्मनी, फासीवादी इटली और उनके सहयोगी देश) के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी. उसके बाद से लेकर अब तक यानी कोरिया से लेकर अफगानिस्तान तक, अमेरिका द्वारा लड़े गए सभी युद्ध आधिकारिक तौर पर युद्ध नहीं थे. ये तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान थे, जिन्हें बाद में कांग्रेस ने अलग-अलग विधेयकों और प्रस्तावों के माध्यम से मंजूरी दी.  

क्या ट्रंप को ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कांग्रेस को बताना पड़ेगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति को अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सैन्य अभियान चलाने का अधिकार है. लेकिन कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना कौन-कौन सी कार्रवाई की जा सकती है, इसकी हदें तय हैं. वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिकी कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के वीटो को खारिज करते हुए ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन एक्ट, 1973’ पारित किया था. इस अधिनियम के मुताबिक, राष्ट्रपति को युद्ध या अमेरिकी सेना के उपयोग वाली आपातकालीन स्थितियों में कांग्रेस से सलाह लेना जरूरी होगा. यही नहीं, कार्रवाई के बाद नियमित तौर पर कांग्रेस से रायशुमारी जारी रखनी होगी.

इस अधिनियम के मुताबिक, यदि अमेरिकी सेना को कांग्रेस से सलाह लिए बिना तैनात किया जाता है, तो राष्ट्रपति को इसके 48 घंटों के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगा. यदि राष्ट्रपति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से सैन्य अभियान जारी रखने या युद्ध की अनुमति प्राप्त करने में असमर्थ रहते हैं तो उनको सैन्य अभियान रोकना होगा.

अब तक राष्ट्रपति ट्रंप अनुच्छेद 2 की मदद से कांग्रेस की मंजूरी के बिना अपने पिछले सैन्य अभियानों को उचित ठहराने में सफल रहे हैं. जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान को उदाहरण के तौर पर देख सकते हैं. अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के लीगल काउंसिल ने तर्क दिया कि इस अभियान का दायरा संवैधानिक अर्थों में युद्ध के स्तर को मैच नहीं करता इसलिए इसके लिए पहले से कांग्रेस की सहमति की जरूरत नहीं थी.

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क्या ईरान पर ट्रंप का हमला कानूनी तौर पर सही है?

ईरान का मामला वेनेजुएला से अलग है. यहां सैन्य अभियान का दायर वेनुजुएला से काफी बड़ा है. खुद राष्ट्रपति ट्रंप कह चुके हैं कि ये सैन्य अभियान कई हफ्तों तक जारी रहेंगे. कई अमेरिकी न्यूज चैनलों ने इसे युद्ध बताया है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर हमले से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस के चुनिंदा नेताओं को जानकारी दी है. लेकिन अब तक ट्रंप प्रशासन ने सैन्य अभियान जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली है. इसके चलते सभी डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने 2 मार्च को राष्ट्रपति ट्रंप के सैन्य कार्रवाई की वैधता पर चर्चा के लिए कांग्रेस में बहस की मांग की है.

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