ईरान में गिरे जेट, घंटों अफसरों पर चिल्लाते रहे ट्रंप, सता रहा था जिमी कार्टर वाला डर
Donald trump को जब पता चला कि Iran में एक अमेरिकी जेट को मार गिराया गया है और उसके दो पायलट लापता हैं, तो वो घंटों तक अपने सलाहकारों पर चिल्लाते रहे. ऐसा लग रहा था कि ट्रंप की जोखिम लेने की इच्छा खत्म हो गई है और उनका डर लगातार बढ़ता जा रहा है.

एक ऐसे राष्ट्रपति जो ड्रामेबाजी में काफी माहिर हैं. जो धमकियां देने के लिए जाने जाते हैं. जो कभी भी आक्रामक हो जाते हैं और कभी भी सुलह वाले मोड में आ जाते हैं. दुनिया उन्हें डॉनल्ड ट्रंप के नाम से जानती है. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप जितना मजबूत खुद को दिखाते हैं, उतने हैं नहीं. पर्दे के पीछे डॉनल्ड ट्रंप अपने ही डर से जूझ रहे हैं. यह डर ईरान युद्ध को लेकर है. वॉलस्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के इसी डर का जिक्र किया है.
तारीख- 4 अप्रैल 2026. गुड फ्राइडे का दिन था. तभी डॉनल्ड ट्रंप को पता चला कि ईरान ने एक अमेरिकी जेट को मार गिराया गया है. उसके दो पायलट लापता हैं. ट्रंप घंटों तक अपने सलाहकारों पर चिल्लाते रहे. ऐसा लग रहा था कि ट्रंप की जोखिम लेने की इच्छा खत्म हो गई है और उनका डर लगातार बढ़ता जा रहा है. उन्होंने बार-बार कहा कि यूरोपीय देश कोई मदद नहीं कर रहे हैं. उस समय गैस की कीमत आसमान छू रही थीं.
रिपोर्ट में कहा गया कि जिन लोगों ने ट्रंप से बात की है, उन्होंने बताया कि 1979 के ईरानी बंधक संकट की तस्वीरें ट्रंप के दिमाग में बार-बार कौंध रही थीं. उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति जिमी कार्टर थे. ईरानी बंधक संकट किसी भी राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय नाकामियों में से एक था. मार्च में ट्रंप ने कहा भी था,
जिमी कार्टर के साथ जो हुआ, उसे देखिए. हेलीकॉप्टरों और बंधकों वाली घटना ने उन्हें चुनाव हरवा दिया. यह कितना भयानक मंजर था.
डॉनल्ड ट्रंप को डर था कि कहीं उनके साथ भी वही न हो जो जिमी कार्टर के साथ हुआ. वे नहीं चाहते थे कि इतिहास उन्हें एक नाकाम राष्ट्रपति के तौर पर याद रखे. ट्रंप ने तुरंत कहा कि दोनों पायलटों को वापस लाने के लिए मिलिट्री को तुरंत भेजा जाए लेकिन यह इतना आसान नहीं था. ईरान की धरती पर कोई अमेरिकी सैनिक मौजूद नहीं था, जो पायलटों को बचा सके. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि जब अधिकारियों को पल-पल की अपडेट मिल रही थी तो उन्होंने राष्ट्रपति को सिचुएशन रूम से बाहर ही रखा. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्हें लगा कि ट्रंप की बेसब्री सिचुएशन को और खराब कर देगी. इसलिए वे ट्रंप को सही मौकों पर अपडेट करते रहे.
एक पायलट को तो जल्दी ही बचा लिया गया, लेकिन 4 अप्रैल की देर रात तक ट्रंप को यह खबर नहीं मिली थी कि दूसरे (वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर) को भी एक बहुत ही जोखिम भरे ऑपरेशन में बचा लिया गया है. ट्रंप उस रात 2 बजे के बाद सोने चले गए. रिपोर्ट के मुताबिक, छह घंटे बाद ईस्टर की सुबह (5 अप्रैल) जब डॉनल्ड ट्रंप सोकर उठे तो उन्हें इसकी जानकारी दी गई. इसके बाद व्हाइट हाउस में बैठे ट्रंप गाली-गलौज पर उतर आए.
ट्रूथ सोशल के अपने अकाउंट पर उन्होंने एक पोस्ट किया. इसमें ‘अपशब्दों’ का प्रयोग करते हुए ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वो डील नहीं करता है तो वे सब कुछ तबाह कर देंगे. मामले से परिचित लोगों ने WSJ को बताया कि ट्रंप भी उन दूसरे राष्ट्रपतियों की तरह ही अपने डर से जूझ रहे हैं, जिन्होंने युद्ध का सामना किया है.
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उदाहरण के लिए, ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों को 'खार्ग द्वीप' पर कब्जा करने के लिए भेजने से मना कर दिया था. यह ईरान का सबसे अहम आइलैंड है, जहां से तेहरान का 90% तेल निर्यात होता है. अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप को यह तो बताया गया था कि यह मिशन सफल होगा और इस इलाके पर कब्जा करने से अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक पहुंच मिल जाएगी, लेकिन उन्हें इस बात की चिंता थी कि इसमें बहुत ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो सकते हैं, जो उन्हें बिल्कुल भी मंजूर नहीं था. राष्ट्रपति ने कहा, "वे तो बस आसान शिकार बन जाएंगे."
वो अलग बात है कि ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम से सलाह लिए बिना ही कई जोखिम भरे बयान दिए हैं. इनमें ईरानी सभ्यता को तबाह करने वाला उनका बयान भी शामिल है. उनका मानना है कि थोड़ा सनकी जैसा दिखने से शायद ईरानी लोग बातचीत के लिए राजी हो जाएं. रिपोर्ट मे कहा गया कि एक समय तो ट्रंप ने यह भी सोचा था कि उन्हें खुद को देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान, ‘मेडल ऑफ़ ऑनर’ दे देना चाहिए.
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