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'अफसरों ने ट्रंप को बताया था ईरान से जंग खतरनाक', जिन अखबारों ने ये छापा, सबकी जांच शुरू

Iran War updates: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अटॉर्नी जनरल को न्यूज आर्टिकल्स का एक बंडल सौंपा. इन आर्टिकल्स पर एक 'स्टिकी नोट' लगा था, जिस पर ‘देशद्रोह’ लिखा था. ट्रंप की इस शिकायत के बाद न्याय विभाग (DOJ) ने जांच शुरू कर दी है.

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12 मई 2026 (अपडेटेड: 12 मई 2026, 10:19 AM IST)
donald Trump Complaint About Iran War media coverage
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान जंग पर हुई मीडिया कवरेज से बेहद नाराज हैं. उन्होंने मीडिया पर जंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप लगाया है. इसे लेकर ट्रंप ने कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच से निजी तौर पर शिकायत भी की. ट्रंप की इस शिकायत के बाद न्याय विभाग (DOJ) ने जांच शुरू कर दी है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने मामले से परिचित अधिकारियों के हवालों से यह जानकारी दी. एक अधिकारी ने बताया कि अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने खास तौर पर उन पत्रकारों को समन जारी करवाने का वादा किया, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील खबरों पर काम किया है. अटॉर्नी जनरल किसी देश का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी और सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है.

एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि एक मीटिंग में ट्रंप ने ब्लैंच को न्यूज आर्टिकल्स का एक बंडल सौंपा. इन आर्टिकल्स पर एक 'स्टिकी नोट' लगा था, जिस पर ‘देशद्रोह’ लिखा था. इन आर्टिकल्स के बारे में ट्रंप का मानना था कि ये नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा हैं. मीटिंग्स से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, जस्टिस डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों ने जांच पर चर्चा करने के लिए पेंटागन के अपने समकक्षों से मुलाकात की है. 

यह पूरा मामला पिछले महीने का है, लेकिन यह जानकारी 11 मई को सामने आई है. इसी जांच के तहत वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के पत्रकारों को भी समन जारी किए जा चुके हैं. अधिकारियों ने बताया कि डॉनल्ड ट्रंप ने खासतौर पर उन आर्टिकल्स पर अपना गुस्सा निकाला है, जिनमें इस बात की जानकारी दी गई थी कि उन्होंने युद्ध शुरू करने का फैसला कैसे लिया. साथ ही जब वे इस पर विचार-विमर्श कर रहे थे, तब उनके सलाहकारों ने उन्हें क्या बताया था.

WSJ को मिला समन

वॉल स्ट्रीट जर्नल को 4 मार्च की तारीख वाले ग्रैंड जूरी के समन मिले. इसमें WSJ के रिपोर्टरों के रिकॉर्ड मांगे गए थे. ग्रैंड जूरी के पास समन जारी करने की शक्ति होती है, जिसके जरिए वह किसी को गवाही देने या दस्तावेज (जैसे पत्रकारों के कॉल रिकॉर्ड) पेश करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर कर सकती है. 

यह समन 23 फरवरी के एक आर्टिकल से जुड़ा था. इसमें बताया गया था कि पेंटागन के अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ लंबे मिलिट्री कैंपेन के खतरों के बारे में चेतावनी दी थी. एक्सियोस और वाशिंगटन पोस्ट समेत दूसरे न्यूज आउटलेट्स ने भी उस दिन ऐसी ही खबरें छापीं. ट्रंप ने इसके पांच दिन बाद यानी 28 फरवरी को जंग शुरू कर दी.

ये भी पढ़ें: अमेरिकी पायलट 24 घंटे छिपा रहा, फिर हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, ईरान को भनक न लगी

जर्नल पब्लिश करने वाली कंपनी डॉव जोन्स के चीफ कम्युनिकेशन ऑफिसर अशोक सिन्हा ने एक बयान में कहा, 

“वॉल स्ट्रीट जर्नल और हमारे रिपोर्टर्स को सरकार ने जो समन भेजे हैं, वो अमेरिकी संविधान पर हमला हैं. हम जरूरी रिपोर्टिंग को दबाने और डराने-धमकाने के इस कोशिश का जोरदार विरोध करेंगे.”

एक्सियोस और वाशिंगटन पोस्ट ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने ट्रंप न्यूयॉर्क टाइम्स में 7 अप्रैल के एक आर्टिकल से भी बहुत नाराज थे. आर्टिकल में बताया गया था कि कैसे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान पर बमबारी करने के लिए उकसाया था.

वीडियो: ईरान ने US के कितने ठिकाने तबाह किए? ट्रंप की पोल खुली

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