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'ईरान की सरकार इस समय सबसे कमजोर', खुफिया इनपुट के चक्कर में आ गए ट्रंप?

Iran पर America और Israel के संयुक्त हमलों के बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट फिर से चर्चा में आ गई है. कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने खुफिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है.

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डॉनल्ड ट्रंप को ईरानी सरकार के कमजोर होने की खुफिया रिपोर्ट मिली थी. (इंडिया टुडे)
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आनंद कुमार
3 मार्च 2026 (अपडेटेड: 3 मार्च 2026, 09:51 PM IST)
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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 4 से 5 हफ्ते तक जारी रह सकता है. इस बीच ईरान को लेकर पिछले दिनों अमेरिका को मिले खुफिया इनपुट की चर्चा हो रही है. इसमें दावा किया गया था कि ईरानी सरकार की सत्ता पर पकड़ कमजोर हो रही है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले दिनों इस पर रिपोर्ट की थी, तब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे थे. रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप को ऐसी खुफिया रिपोर्ट्स मिली हैं, जिसके मुताबिक साल 1979 की इस्लामिक क्रांति में मोहम्मद रजा पहलवी को बेदखल किए जाने के बाद से ईरानी सरकार की सत्ता पर पकड़ सबसे कमजोर स्थिति में है.

खुफिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि पिछले साल के अंत में भड़के विरोध प्रदर्शन ने ईरानी सत्ता को हिलाकर रख दिया है और ईरान की सरकार बेहद मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रही है. खुफिया रिपोर्टों में बार-बार जिक्र किया गया कि ईरान के विरोध प्रदर्शनों के अलावा ईरान की अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक रूप से कमजोर हालात में है. 

अखबार के मुताबिक खुफिया रिपोर्ट्स में बताया गया,

“आर्थिक हालात बिगड़ने और महंगाई बढ़ने के चलते पिछले साल दिसंबर के अंत तक छिटपुट प्रदर्शन शुरू हुए. जनवरी में विरोध प्रदर्शनों में तेजी आने लगी. ईरानी सरकार के पास आर्थिक कठिनाइयों से निपटने के बेहद कम विकल्प मौजूद हैं. अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए दमनकारी कदम उठाए, इससे आबादी के एक बड़े हिस्से का असंतोष और बढ़ गया.”

अब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की ये रिपोर्ट फिर से चर्चा में आ गई है. कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने खुफिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है.

यहां ये बात गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई कर रहे ईरान को देखकर लगता नहीं कि उसके अंदरूनी हालात भी संकटग्रस्त हैं. युद्ध शुरू हुए चार दिन हो चुके हैं, सुप्रीम लीडर खामेनेई मारे गए हैं, इसके बावजूद ईरान की इस्लामिक सत्ता के खिलाफ कोई बड़ा जनआंदोलन खड़ा होता नहीं दिख रहा. खामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी चुनने की कवायद जल्दी ही शुरू होगी. तब तक अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाए गए हैं.

हालांकि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच अभी तक ये साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में जमीनी सैनिक उतारेंगे या नहीं. इसकी संभावना को उन्होंने पूरी तरह से खारिज नहीं किया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा,

“हर राष्ट्रपति कहता है कि ईरान में जमीन पर सैनिक नहीं भेजे जाएंगे. लेकिन मैं ऐसा नहीं कहता. मैं कहता हूं कि शायद हमें उनकी जरूरत नहीं पड़े, अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें भेज भी सकते हैं.”

हालांकि कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी हमले की संभावना बेहद सीमित है. उनका मानना है कि अभी तक यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि अमेरिका इस युद्ध से चाहता क्या है. उसने ईरान पर हमला तो कर दिया है, लेकिन जमीनी सेना उतारना उनके लिए राजनीतिक और सामरिक दोनों मोर्चे पर आसान नहीं होगा.

वीडियो: ईरान ने किया अमेरिकी ठिकानों पर हमला, ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?

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